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वसुंधरा ने बांटी अपनों को रेवड़िया

वसुंधरा राजे ने विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए फिलहाल पांच विधायकों को संसदीय सचिव बनाया है।
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (फाइल फोटो)

राजस्थान में लंबे इंतजार के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भाजपा नेताओं को सरकार में पद बांटना शुरू कर दिया है। निगम और बोर्डों में तैनाती के साथ ही राजे ने विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए फिलहाल पांच विधायकों को संसदीय सचिव बनाया है। राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला लगातार चलता रहेगा। मंत्री के दर्जे वाले इन पदों की पहली खेप में अभी मुख्यमंत्री समर्थकों को ही जगह मिली है। दूसरी ओर, आरएसएस ने भी अब अपने लोगों की तैनाती का दबाव सरकार पर बढ़ा दिया है। संघ की तरफ से प्रदेश भाजपा के सहसंगठन प्रभारी वी सतीश पैरवी में जुटे हुए हैं।

राज्य में दो साल से सत्ता सुख का इंतजार कर रहे भाजपा नेताओं के लिए सोमवार देर शाम राजनीतिक नियुक्तियों की सौगात मिली। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी ने सोमवार को लंबी मंत्रणा के बाद पांच विधायकों को संसदीय सचिव भी बना दिया। सरकार के निगम और आयोगों में जगह पाने वाले नेताओं ने मंगलवार को मुख्यमंत्री राजे से मिल कर उनका आभार भी जताया। इनमें से कई नेताओं ने तो मंगलवार को अपना पद भी संभाल लिया। भाजपा विधायकों में बढ़ती नाराजगी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री राजे ने संसदीय सचिव भी बना दिए। इससे विधानसभा के आगामी बजट सत्र में सरकार को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। संसदीय सचिव बनने वालों में विधायक लादूराम विश्नोई, सुरेश रावत, डा. विश्वनाथ मेघवाल, जितेंद्र गोठवाल और भैराराम चौधरी हैं। इन सभी को सरकार में राज्यमंत्री स्तर का दर्जा दिया गया है।

मुख्यमंत्री राजे ने संसदीय सचिवों की तैनाती में पूरी तरह से राजनीतिक गणित को ध्यान में रखा है। अनुसूचित जाति में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए इस वर्ग के दो विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया है। इसके अलावा मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय असंतुलन के चलते जोधपुर, बाड़मेर, अजमेर, बीकानेर और सवाई माधोपुर जिलों के विधायकों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। सरकार ने राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद पर सिख समाज के नेता जसवीर सिंह को अध्यक्ष बनाया है।

विधायक प्रेम सिंह बाजोर को सैनिक कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष, तो वरिष्ठ विधायक श्रीचंद कृपलानी को चित्तौड़गढ़ नगर सुधार न्यास का अध्यक्ष बना कर खुश किया गया है। इन दोनों विधायकों की मंत्री पद की प्रबल दावेदारी थी। इसी तरह विधायक हरी सिंह रावत को मगरा विकास बोर्ड का अध्यक्ष बना कर मंत्री का दर्जा देकर खुश किया गया है। पूर्व विधायक और अजा के शंभूदयाल बड़गुर्जर को राजस्थान खादी बोर्ड का अध्यक्ष बनाया है। सांसद राहुल कास्बां की माता कमला कास्बां को समाज कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।

मुख्यमंत्री के करीबी चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ के बढ़ते कद को रोकने के लिए ही कमला कास्बां को आगे लाया गया है। चूरू जिले की भाजपा राजनीति में कास्बां और राठौड़ एक दूसरे के विरोधी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने गृह जिले झालावाड़ के श्रीकृष्ण पाटीदार को जनअभाव अभियोग समिति का चेयरमेन बनाया है। अल्पसंख्यक तबके की मेहरूनिशा टांक को राज्य मदरसा बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। मेहरूनिशा पहले कांग्रेस में थीं, पर लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा से जुड़ गई थीं। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष परनामी के खेमे में माना जाता है।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि जल्द ही कई खाली निगम और बोर्डो के साथ ही अकादमियों में भी नियुक्तियां होंगी। इसमें संघ से जुड़े नेताओं को तवज्जो दी जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री ने संघ के प्रदेश पदाधिकारियों से भी राय ली है। मुख्यमंत्री की मंशा है कि जल्द ही सभी पदों पर राजनीतिक नियुक्तियां कर दी जाए। इससे प्रदेश में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा।

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