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उत्तराखंड: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का आदेश, अब अतिथियों का स्वागत फूलों की जगह किताबों से किया जाएगा

इन समारोह में अतिथियों को विवेकानंद, रविंद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी की पुस्तक मुख्य रूप से दी जाएंगी।
शिक्षा मंत्री धान सिंह रावत ने कहा कि सरकारी कॉलेजों में सेमिनार, कॉन्वोकेशन प्रोग्राम में भी अतिथियों का स्वागत फूलों की जगह पुस्तकों से किया जाएगा। (फाइल फोटो)

उत्तराखंड सरकार के नए फैसले के तहत अब सूबे में किसी भी गणमान्य व्यक्ति का स्वागत फूलों के गुलदस्ते से नहीं किया जाएगा। बल्कि फूलों की जगह अतिथियों के सम्मान में उन्हें किताबें भेंट की जाएंगी। मंगलवार (27 जून, 2017) को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने आदेश जारी करते हुए कहा कि उत्तराखंड में अब अतिथियों का सम्मान फूलों की जगह किताबें भेंट कर किया जाएगा। जानकारी के अनुसार बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम ‘मन की बात’ से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री ने ये फैसला लिया है। मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने विभिन्न समारोह में अतिथियों और गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत समारोह में फूले की जगह की किताबें भेंट किए जाने का समर्थन किया था। जानकारी के अनुसार अतिथियों को भेंट की जाने वाली ये किताबें उत्तराखंड की एतिहासिक, भौगोलिक, सामाजिक व सांस्कृतिक जानकारी से जुड़ी होंगी। वहीं डॉक्टर विजय अग्रवाल की किताब सदा सफल हनुमान भी अतिथियों के स्वागत समारोह में भेंट की जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का स्वागत फूलों के स्थान पर उत्तराखंड का इतिहास पुस्तक भेंट कर इस परंपरा की शुरुआत की गई।

दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री धान सिंह रावत ने कहा कि सरकारी कॉलेजों में सेमिनार, कॉन्वोकेशन प्रोग्राम में भी अतिथियों का स्वागत फूलों की जगह पुस्तकों से किया जाएगा। इन समारोह में अतिथियों को विवेकानंद, रविंद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी की पुस्तक मुख्य रूप से दी जाएंगी। धान सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया ने कहा, ‘हमारा मकसद लोगों को उन महान हस्तियों से रूबरू कराना है, जिन्होंने हमारी जिंदगियों को प्रभावित किया है। फूलों की जिंदगी तो थोडे़ समय के लिए होती है लेकिन किताबें सालों तक हमारे साथ रहती हैं। ये जिंदगी भर प्रेरणा देती हैं।’ धान सिंह ने आगे कहा कि इसे जुलाई में होने वाले शैक्षणिक सत्र में सख्ती से लागू किया जाएगा।

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