ताज़ा खबर
 

गंगा में खनन के खिलाफ अनशन पर साधु, प्रशासन ने कहा-इजाजत से पहले सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी से ली मंजूरी

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में केवल हरीश रावत ही खनन के समर्थक थे जबकि भाजपा की राज्य सरकार में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, वित्त मंत्री प्रकाश पंत, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक और विधायक यतिश्वरानंद खनन के प्रबल समर्थक हैं।
Author देहरादून  | May 15, 2017 00:34 am
गंगा किनारे स्थित वाराणसी के घाट। (Source: PTI)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड वन विकास निगम ने गंगा नदी में खनन की इजाजत दे दी है। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक स्वामी यतिश्वरानंद ने रविवार को फीता काटकर गंगा नदी में खनन के काम की शाुरुआत की। गंगा नदी में खनन की अनुमति देने का साधु संतों और पर्यावरणविदों ने एकजुट होकर विरोध किया है। इस कदम के विरोध में पर्यावरण से जुड़ी संस्था मातृ सदन के स्वामी शिवानंद सरस्वती ने अनशन करने का एलान किया है। रविवार को उनके शिष्य खनन के विरोध में स्वामी आत्मबोधानंद अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं।  गंगा नदी की मुख्य धारा की श्यामपुर और चिड़ियापुर रेंज में खनन कार्य शुरू करने का जबरदस्त विरोध करते हुए स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि यह गैरकानूनी है और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का खुला उल्लंघन है। नैनीताल हाई कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की धारा-5 के अनुसार गंगा नदी में खनन करने पर पूरी तरह पाबंदी लगा रखी है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार के जिलाधिकारी ने राज्य सरकार के दबाव में गंगा नदी में खनन खोलने की इजाजत दी है। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार से गंगा नदी में खनन के मामले में भाजपा की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार एक कदम और आगे बढ़ गई है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में केवल हरीश रावत ही खनन के समर्थक थे जबकि भाजपा की राज्य सरकार में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, वित्त मंत्री प्रकाश पंत, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक और विधायक यतिश्वरानंद खनन के प्रबल समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि जब तक गंगा नदी में खनन बंद नहीं होगा उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उधर, उत्तराखंड वन विकास निगम के एक अधिकारी अशोक कुमार का कहना है कि खनन की इजाजत देने के लिए उन्होंने राष्टÑीय हरित अधिकरण (एनजीटी), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट से अनुमति ली है। खनन की इजाजत निर्धारित मानकों के आधार पर दी गई है और गंगा नदी के घाटों में सीसीटीवी कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक टोल कांटा और ई-रवन्ना की व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि एक ट्रक में 140 कुंटल से ज्यादा रेत बजरी नहीं भरी जाएगी और शाम छह बजे के बाद गंगा में खनन का काम नहीं होगा। साथ ही गंगा में खनन के लिए जेसीबी याअन्य मशीनें नहीं ले जाई जाएंगी। खनन कार्य 31 मई चलेगा और एक जून से 30 सितंबर तक गंगा में खनन का काम बंद रहेगा।

 

 

जेट एयरवेज के मुंबई से दिल्ली जा रहे विमान में हाईजैक की अफवाह; यात्री ने किया था पीएम मोदी को ट्वीट

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.