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बीजेपी के लिए यहां चुनाव जीतना ‘नाक’ का सवाल, बागियों को बनाया स्टार प्रचारक

पांच राज्यों में होने वाले चुनाव को लेकर बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं दूसरी तरफ अन्य पार्टियां बीजेपी की लहर को शांत करने के लिए गठबंधन का सहारा ले रही है।
भाजपा की चुनावी रैली में पार्टी के झंडे लहराते उनके समर्थक। (सांकेतिक फोटो)

पांच राज्यों में होने वाले चुनाव को लेकर बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं दूसरी तरफ अन्य पार्टियां बीजेपी की लहर को शांत करने के लिए गठबंधन का सहारा ले रही है, जबकि बीजेपी इस चुनावी मैदान में अकेले उतर रही है। ऐसे में पांचों राज्यों में कमल खिलाने की कोशिश में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और पीएम मोदी जुटे हुए हैं। यही हाल देवभूमि उत्तराखंड का भी है। जहां बीजेपी हर कीमत पर फतेह हासिल करना चाहती है। यही वजह है कि जब बीजेपी ने राज्य में प्रचार के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की तो उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सबसे ऊपर था। वहीं 15 फरवरी को राज्य में होने वाले चुनाव के लिए पीएम मोदी को रैली करने की इजाजत मिल गई है। ऐसे में राज्य में सत्ता वापसी के लिए बेचैन बीजेपी के स्टार नेताओं का कार्यक्रम भी शुरू हो चुका है।

सूबे में बीजेपी को पूरा यकीन है कि वो पीएम मोदी के चेहरे से सत्ता पर काबिज हो जाएगी। केंद्र में बीजेपी सरकार आने के बाद राज्य में जिस तरह से राजनीतिक उठापटक हुई और विरोधियों ने इसका तथाकथित आरोप बीजेपी और मोदी पर लगाया उससे केंद्र सरकार की छवि पर नकारात्मक असर पड़ता दिखा। उत्तराखंड सरकार के कई अहम नेता व मंत्री पार्टी छोड़कर दिए और राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया। सरकार को अस्थिर हुई और फिर कोर्ट से छह महीने बाद फिर से राज्य की कांग्रेस सरकार को बहाल कर दिया, हरीश रावत दोबारा मुख्यमंत्री बन गए। इस पूरी घटना के बाद बीजेपी की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए और उस पर राज्यपाल के माध्यम से राज्य में सरकार चलाने का आरोप भी लगा।

पूरे घटनाक्रम के बाद किसी भी तरह चुनाव जीत कर सत्ता वापसी के लिए बेकरार बीजेपी कांग्रेस के उन तमाम बागी और दागी नेताओं को अपनाने से नहीं की। हालात यहां तक आ गए कि जिस घोटाले और भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर बीजेपी राज्य सरकार पर हमलावर हो रही थी, उसी के आरोपी नेताओं को पार्टी में पूरे सम्मान के साथ शामिल कर लिया। इसका मात्र एक मकसद किसी तरह से सत्ता में वापसी के तौर पर देखा जा रहा है।

राज्य में चुनाव प्रचार के लिए उन सभी बड़े चेहरे को स्टार प्रचारक की लिस्ट में ऊपर जगह दी गई। बीजेपी उन सभी चेहरे को चुनाव मैदान में भेजने की रणनीति बनाई जिसे जीत मिलना लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि इसको लेकर पार्टी में भी बगावती शुर भी सुनाई दिए लेकिन बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व उसे नजरअंदाज कर दिया। हालांकि अब नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश जारी है।

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