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हरिद्वार: सिर पर मेला, सिर फुटौव्वल से फुरसत नहीं

हरिद्वार की नगर पुलिस अधीक्षक ममता वोहरा के मुताबिक दस सालों से कांवड़ियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।
कांवड़ मेला शुरू होने में अभी 12 दिन ही बचे हैं।

हरिद्वार में आगामी 8 जुलाई गुरुपूर्णिमा से शुरू होने वाले कांवड़ मेले की तैयारियां आधी-अधूरी हैं। जिस कछुआ चाल से कांवड़ मेले का कामकाज चल रहा है, उससे लगता है कि अव्यवस्थाओं के बीच यह शुरू होगा। कांवड मेले के काम को लेकर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग, राष्टÑीय राजमार्ग निर्माण विभाग, नगर निगम हरिद्वार और हरिद्वार के जिला प्रशासन विभाग के बीच सीधा टकराव चल रहा है।  उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, उत्तराखंड के महानिदेशक और हरिद्वार के जिलाधिकारी कांवड़ मेले के कामकाज को लेकर कई समीक्षा बैठकें कर चुके हैं। पर्यटन मंत्री सतपाल की बैठक में तो हरिद्वार नगर निगम के मेयर मनोज गर्ग और उत्तरप्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों की कांवड़ मेले की दुकानों के ठेके को लेकर जमकर नोक-झोंक हुई।

सिंचाई विभाग के अधिकारी विभाग की जमीन में कांवड़ मेले के दौरान हर साल दुकानों के ठेके देकर मोटी कमाई करते हैं लेकिन नगर निगम के कर्मचारियों को मेले क्षेत्र की सफाई करनी पड़ती है। इस बार सिंचाई विभाग की जगह नगर निगम ने दुकानों के ठेके देने की मांग जिला प्रशासन से की है। परंतु इस पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने आपत्ति जताई है। सिंचाई विभाग के खंड हरिद्वार के अधिशासी अभियंता डीके सिंह ने दो टूक कहा कि हरिद्वार नगर निगम को सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग की मेला भूमि पर पार्किंग का ठेका नहीं देने दिया जाएगा।हरिद्वार में हरकी पैड़ी और उसके आसपास रोड़ी बेलवाला, पंतद्वीप, उत्तरी गंगनहर की जमीन सिंचाई विभाग उत्तरप्रदेश के कब्जे में है। अभी तक इस जमीन के बंटवारे को लेकर कोई फैसला दोनों राज्यों के बीच नहीं हो पाया है। उत्तरी गंगनहर पटरी मार्ग का इस्तेमाल पैदल कांवड़ लेकर जाने वाले कांवड़ियों के लिए किया जाता है। परंतु सिंचाई विभाग उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड ने अभी तक इस सड़क की मरम्मत नहीं की है। हरिद्वार से रुडकी, मुजफ्फरनगर, खतौली, मेरठ, मुरादनगर होते हुए कानपुर जाती है। इस कांवड़ पटरी पर जगह-जगह पर बडेÞ गहरे गड्ढे बने हुए हैं और कांवड़ पटरी के बीचोंबीच बिजली के खंबे खडेÞ हैं, जिन्हें अभी तक नहीं हटाया गया है, जबकि कांवड़ मेला शुरू होने में अभी 12 दिन ही बचे हैं।

इस बार कांवड़ मेले के लिए सबसे बड़ी मुसीबत दिल्ली-हरिद्वार-ऋषिकेश-देहरादून राष्टÑीय राजमार्ग बना हुआ है। राष्टÑीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही से अभी तक राजमार्ग अधूरा पड़ा है जबकि यह राजमार्ग सन 2013 में पूरा होना था। अधूरे पडेÞ इस राजमार्ग निर्माण विभाग के ठेकेदारों ने रुड़की से लेकर हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून तक सड़क को बीच-बीच में खोद डाला है और मिट्टी डाल दी है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज तथा हरिद्वार के जिलाधिकारी दीपक रावत भी कई दफा राष्टÑीय राजमार्ग के अधिकारियों को इस बारे में कह चुके हैं पर बात बनी नहीं है।उधर ज्वालापुर का रेलवे का लालपुल अधूरा पड़ा है। इसीलिए इस बार हरिद्वार के जिला प्रशासन को कांवड़ मेले में अधूरे पडेÞ हरिद्वार-दिल्ली राजमार्ग, टूटी-फूटी पड़ी नहर पटरी तथा अधूरे बने रेलवे के लालपुल से होने वाली मुसीबतों से जूझना पडेÞगा। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी कांवड़ मेले को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों की समीक्षा बैठक कर चुके हैं और पहली बार उत्तराखंड सरकार ने अपने बजट में कांवड़ मेले के लिए अलग से बजट रखा है। इससे कांवड़ मेला पहली बार राज्य सरकार के मेलों की सूची में शामिल किया गया है।

भले ही प्रशासन की तैयारियां कांवड़ मेले को लेकर आधी-अधूरी चल रही हैं, परंतु 15 दिन तक चलने वाली सावन मास की इस कांवड़ यात्रा को लेकर हरिद्वार के व्यापारी प्रशासन से ज्यादा सजग हैं। और होटलों, धर्मशालाओं, अतिथि गृहों, आश्रमों और दुकानदारों ने कांवड़ मेले की तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रशासन की ओर से पंतद्वीप पर कांवड़ बाजार बनाया जाता है। इसके अलावा स्थानीय व्यापारी भीमगोडा, खड़खड़ी, मोती बाजार, बड़ा बाजार, रेलवे रोड, विष्णु घाट, रामघाट, बिरला घाट, पोसट आॅफिस, रोड बेलवाला में कांवड़ बाजार सजाते हैं। 15 दिन के इस कांवड़ मेले में स्थानीय व्यापारियों का कारोबार सौ करोड़ से ऊपर बैठता है। हरिद्वार व्यापार मंडल के प्रमुख कैलाश केशवानी का कहना है कि कांवड़ मेले के दौरान कई हुड़दंगी कांवड़िए हरिद्वार आकर दबंगई दिखाते हंै जिससे व्यापारियों में भय बना रहता है और दुकानदारों व कावंड़ियों के बीच हर साल टकराव होता है। साथ ही हरिद्वार, सहारनपुर, बिजनौर के व्यापारी भी कांवड़ मेले के दौरान अच्छा कारोबार करते हैं। वहीं दूसरी ओर कांवड़ मेले के दौरान दिल्ली से हरिद्वार तथा मुरादाबाद से हरिद्वार राजमार्ग कांवड़ियों की भारी भीड़ के कारण छोटे-बडेÞ वाहनों के लिए 10-12 दिन के लिए बंद कर दिया जाता है। इस कारण हरिद्वार के बीएचईएल तथा सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में इसका खास प्रभाव पडता है और इस औद्योगिक क्षेत्र में 15 दिन तक माल का आना-जाना बंद हो जाता है, जिससे करोड़ों रुपए का औद्योगिक कारोबार ठप पड़ जाता है।

कांवड़ियों की बढ़ती संख्या

हरिद्वार की नगर पुलिस अधीक्षक ममता वोहरा के मुताबिक दस सालों से कांवड़ियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। 2008 में 50 लाख, 2009 में 75 लाख, 2010 में सवा करोड़, 2011 में डेढ़ करोड, 2012 में पौने दो करोड़, 2013 में दो करोड़, 2014 में दो करोड़ 66 लाख, 2015 में तीन करोड़ 20 लाख, 2016 में तीन करोड़ 30 लाख कांवड़िए हरिद्वार आए थे। प्रशासन ने इस साल चार करोड़ के लगभग कांवड़ियों के आने का अनुमान लगाया है। 1980 के दशक में सावन मास के दौरान कांवड़ियों की आवाजाही बहुत कम रहती थी। वैसे पहले सावन मास की जगह कांवड़िए महाशिवरात्रि में ही हरिद्वार गंगाजल भरने आते थे। सावन मास की कांवड़ यात्रा में पश्चिम उत्तरप्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कुछ इलाकों से कांवड़िए बड़ी संख्या में आते हैं।

 

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