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मानव कंकालों की खोज पर उत्तराखंड की राजनीति गरमाई

केदारघाटी में मिल रहे नरकंकालों को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा आमने-सामने आ डटे हैं। हरीश रावत ने कहा कि मेरे कार्यकाल में कभी भी सर्च आॅपरेशन नहीं रोका गया।

केदारघाटी में मिल रहे नरकंकालों को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा आमने-सामने आ डटे हैं। हरीश रावत ने कहा कि मेरे कार्यकाल में कभी भी सर्च आॅपरेशन नहीं रोका गया। यह सर्च आॅपरेशन पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के जमाने में रोका गया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को हिटो केदार कार्यक्रम के तहत ट्रेकिंग करने वाले दल ने जैसे ही उन्हें केदारघाटी में नरकंकालों के मिलने की सूचना दी, वैसे ही उन्होंने गढ़वाल मंडल के आइजी संजय गुंज्याल के नेतृत्व में 20 सदस्यीय टीम नरकंकालों की खोज के लिए भेज दी। उधर, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मुख्यमंत्री हरीश रावत पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि रावत केदारनाथ हादसे के तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और नरकंकालों के नाम पर राजनीति करने में जुटे हैं। बहुगुणा ने कहा कि उनकी सरकार ने कभी भी केदारनाथ हादसे के बाद सर्च आॅपरेशन नहीं रोका था। केदारनाथ हादसे में शवों को निकालने का काम भारतीय थल सेना, वायुसेना, केंद्रीय सुरक्षाबलों, एनडीआरएफ और सूबे की पुलिस ने मिलकर किया था।

इन्होंने संयुक्त रूप से शवों को निकालने और आपदा में फंसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम बड़ी ही जिम्मेदारी के साथ निभाया था। उस वक्त पूरे देश ने इनके काम की जमकर तारीफ की थी। इस तरह हरीश रावत नरकंकालोें के नाम पर राजनीति कर भारतीय सेना और सुरक्षाबलों तथा उत्तराखंड की पुलिस का अपमान कर रहे हैं। बहुगुणा ने कहा कि उन्हें समझ में नहीं आता कि कैसे लोग निजि स्वार्थों के लिए नरकंकालों के नाम पर राजनीति कर लेते हैं। दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि रावत सरकार साढ़े तीन साल से सत्ता में जमी हुई है और उसने एक भी बार नरकंकालों को खोजने का काम नहीं किया। राज्य सरकार खुद कटघरे में खड़ी है और केदारनाथ में गाने-बजाने का काम कर मनोरंजन में लगी रही। उसे कभी नरकंकालों के खोजने की सुध नहीं आई।

रावत ने भाजपा पर शवों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले भाजपा ने पूरे देश में राम जन्मभूमि आंदोलन के नाम पर कारसेवकों के शवों को लेकर राजनीति की और अब भाजपा केदारनाथ के नरकंकालों को लेकर राजनीति कर रही है। विजय बहुगुणा पर तंज कसते हुए उन्होेंने कहा कि जिस पूर्व मुख्यमंत्री के शासनकाल में केदारनाथ हादसा हुआ, वे आज भाजपा के सबसे दुलारे नेता हैं। जब कांग्रेस सरकार में विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा ने बहुगुणा को केदारनाथ हादसे का दोषी बताया था। आज भाजपा उन्हीं का बचाव कर रही है। उन्होंने कहा कि यह उनकी समझ से बाहर है कि भाजपा इस पर राजनीति क्यों कर रही है। रावत ने बताया कि अभी दस दिन तक केदारघाटी में नरकंकालों को ढूंढ़ने का काम चलेगा। जरूरत पड़ी तो आगे भी यह काम जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अब तक जितने भी नरकंकाल मिले हैं उनमें से 23 का डीएनए टेस्ट कर अंतिम संस्कार कर दिया गया है। बाकी बचे नरकंकालों का अंतिम संस्कार डीएनए टेस्ट के बाद जल्द ही कर दिया जाएगा।

उन्होंने जानकारी दी कि जांच दल से जो रिपोर्ट हासिल हुई है उससे ऐसा लगता है कि अनेक लोग 2013 में केदारनाथ आपदा के वक्त अपनी जान बचाने के लिए त्रियुगीनारायण मार्ग पर चले गए थे। वहां गुफा तथा अन्य स्थानों पर उन्होंने शरण ली। परंतु उन लोगों ने भूख, प्यास, सर्दी और थकान की वजह से दम तोड़ दिया। रावत ने कहा कि विजय बहुगुणा सरकार के जमाने में रोके गए काम्बिंग आॅपरेशन को उनकी सरकार ने दोबारा शुरू करवाया था। उन्होंने कहा कि भाजपाई हमें बेहतर सुझाव दें, तो हम उनका स्वागत करते हुए उन पर अमल करेंगे। परंतु केवल आरोप लगाने से राज्य का भला नहीं होने वाला है। रावत ने आपदा सचिव को निर्देश दिए हैं कि एक बार फिर से यह जांच की जाए कि मुआवजे की राशि हासिल करने से कोई पक्ष छूट न गया हो।

रावत ने कहा कि मैंने पहले भी कहा कि बरसात के बाद सर्च आॅपरेशन शुरू किया जाएगा। हिटो केदार के तहत विभिन्न ट्रेक रूटों पर दलों को भेजने के पीछे हमारा यह मकसद था कि नरकंकालों की खोज की जाए। माटा के सहयोग से यह अभियान चलाया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा पर हमलावर होते हुए रावत ने कहा कि जब मैंने मुख्यमंत्री का दायित्व संभाला था तो बहुत से लोगों ने कहा कि केदारनाथ यात्रा को दस साल और चारधाम यात्रा को तीन साल के लिए रोक दिया जाए। रावत ने कहा कि उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए और असामान्य परिस्थितियों में असामान्य फैसले लिए। और आज राज्य की चारधाम यात्रा और अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आई है। इस साल चारधाम यात्रा में पंद्रह लाख तीर्थयात्री पहुंचे। आने वाले एक वर्ष में हमने यह तादाद तीस से चालीस लाख तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

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