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योगी आदित्यनाथ ने दशहरा, मुहर्रम में डीजे-लाउडस्पीकर पर लगाया बैन, तजिया और दुर्गा प्रतिमा की ऊंचाई पर भी दिशा-निर्देश

इसके अलावा प्रतिमा विसर्जन और तजिया जुलूस के लिए अलग-अलग रास्ते बनाने के भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। (फोटो पीटीआई)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुर्गा पूजा, दशहरा और मोहर्रम के दौरान डीजे बजाने, लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। त्योहारों के दौरान शांति और सद्भाव कायम रखने के लिए मुख्यमंत्री ने राज्य में सुरक्षा के मद्देनजर एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक के बाद सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को गाइलाइंस जारी किया है। गाइडलाइंस के मुताबिक समारोह के दौरान डीजे और लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध होगा। हालांकि कुछ शर्तों के साथ लाउडस्पीकर बजाने की छूट होगी। इसके अलावा प्रतिमा विसर्जन और तजिया जुलूस के लिए अलग-अलग रास्ते बनाने के भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

गाइडलाइंस के मुताबिक दुर्गा प्रतिमा की ऊंचाई और तजिया की ऊंचाई को भी निर्धारित किया गया है। ताकि राज्य में शांतिपूर्वक त्योहार मनाया जा सके और किसी तरह की साम्प्रदायिक हिंसक घटना न हो सके। सूत्रों ने बताया कि राज्य में कानून-व्यवस्था को बरकरार रखने की बड़ी चुनौती के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने राज्य के आलाधिकारियों के साथ शनिवार (16 सितंबर) की शाम समीक्षा बैठक की थी। बैठक में ही कई तरह के निर्णय लिए गए।

बता दें कि अगले पखवाड़े दशहरा और मोहर्रम है। इस दौरान राज्य में कानून व्यवस्था और शांति बहाली आदित्यनाथ सरकार के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि राज्य का पूर्वी और पश्चिमी इलाका साम्प्रदायिक हिंसा के लिहाज से संवेदनशील है। हाल के दिनों में भी यूपी के कई इलाकों में साम्प्रदायिक घटनाएं हुई हैं। इसलिए भी सरकार के लिए दशहरा-मुहर्रम का त्योहार एक बड़ी चुनौती है।

26 सितंबर से चार दिवसीय दशहरा उत्सव शुरू हो रहा है जो 30 सितंबर तक चलेगा। 30 सितंबर को विजयादशमी है जबकि एक अक्टूबर को मुहर्रम है। राज्य में लाउडस्पीकर बजाने और जुलूस के दौरान हिंसा का इतिहास पुराना है। इसलिए योगी सरकार ने शांतिपूर्ण त्योहार मनाने के लिए विशेष सुरक्षा बंदोबस्त किए हैं। इस बात की आशंका है कि 1 अक्टूबर को तजिया का जुलूस और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ सकते हैं। लिहाजा, प्रशासन को साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि दोनों के जुलूस का रास्ता अलग-अलग तय किया जाए। सभी आयोजकों को इस बारे में लिखित रूप से प्रशासन को सूचित करने को भी कहा गया है।

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