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योगी सरकार का आदेश- मदरसों में पढ़ाई जाए NCERT की किताबें, स्वामी बोले, मानो आदेश या बंद कर दिए जाओगे

योगी सरकार द्वारा जारी किए इस आदेश का सूबे के 16 हजार मदरसों पर प्रभाव पड़ेगा।
एक मदरसे में धार्मिक शिक्षा ग्रहण करते छात्र (Express file Photo)

शिक्षा में सुधार लाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में एनसीआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश दिए हैं। यह जानकारी सूबे के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा द्वारा दी गई है। दिनेश शर्मा ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा मदरसा बोर्ड मदरसों में एनसीआरटी सिलेब्स लागू करने की योजना बना रहा है। मदरसों में अब उच्च स्तर पर गणित और साइंस को अनिवार्य किया जाएगा। आधुनिक विषयों के साथ स्कूलों के साथ बराबरी करने की मदरसा तैयारी कर रहा है। इससे पहली आई एक टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार द्वारा मदरसों के पाठ्यक्रम में सुधार लाने के लिए 40 सदस्यों की एक कमिटी का गठन किया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार मदरसों में एक स्तर पर हिंदी, अंग्रेजी, गणित, साइंस और समाजिक विज्ञान जैसे विषयों को लागू करने पर विचार किया जा रहा था। अब योगी सरकार द्वारा जारी किए इस आदेश का सूबे के 16 हजार मदरसों पर प्रभाव पड़ेगा। 40 सदस्यों की इस कमिटी में एनसीआरटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, लखनऊ यूनिवर्सिटी के एक-एक सदस्य शामिल हैं। इनके अलावा अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के ख्वाजा मोइनूद्दीन चिस्ती उर्दू के कई सदस्य शामिल हैं।

वहीं इस मामले के सामने आने के बाद धर्म गुरुओं का कहना है कि कुरान के साथ किताब कैसे पढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही उनका कहना है कि धार्मिक किताब के साथ विज्ञान की किताबें नहीं पढ़ाई जा सकतीं और योगी सरकार को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। धार्मिक गुरुओं द्वारा मदरसों में एनसीआईटी किताब पढ़ाए जाने की बात का विरोध करने पर सुब्रमणयम स्वामी ने कहा कि या तो आदेश को मानों वरना मदरसों को बंद करा दिया जाएगा। स्वामी ने कहा कि वे राज्य सरकार द्वारा कई सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं इसलिए सरकार के आदेश को उन्हें मानना ही होगा।

बता दें कि इससे पहले शिक्षा नीति में सुधार लाने के लिए योगी सरकार ने 23 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और 13 डेंटल कॉलेजों की फीस के नियमों में सुधार लाने के निर्देश दिए गए थे। नए फीस नियम लागू होने के बाद अब एमबीबीएस डिग्री के लिए छात्रों को 8.05 से 11.50 लाख रुपए देने होंगे। वहीं बीडीएस के छात्रों के लिए फीस 1.37 से 3.65 लाख रुपए हो गई है। यह नया नियम अगले तीम अकेडमिक सेशन के लिए लागू रहेगा। इस मामले पर स्वास्थय मंत्री आशुतोष तंडन ने कहा था कि हमें फीस को लेकर कई छात्रों की शिकायत मिली हैं, जिनमें कहा गया है कि प्राइवेट कॉलेज बहुत ज्यादा फीस लेते है जिसके कारण कई छात्र एडमिशन नहीं ले पाते।

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