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एससी-एसटी मामलों के निपटारे के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार बना रही है स्पेशल कोर्ट

नए कोर्ट के निर्माण पर 100 करोड़ रुपए का खर्चा आएगा, जिसके लिए राज्य सरकार को जल्द ही प्रस्ताव भेजा जाएगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ। (File Photo)

उत्तर प्रदेश में बहुमत के साथ सत्ता में आई बीजेपी की सरकार जल्द ही नए 25 कोर्ट खोलने जा रही है। इन सभी कोर्ट के खोले जाने के पीछे का उद्देश्य काफी समय से कोर्ट में लंबित पड़े एससी-एसटी के मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करना है। प्रदेश के कानून विभाग ने इस योजना को प्राथमिकता दी है। सूत्रों के अनुसार नए कोर्ट के निर्माण पर 100 करोड़ रुपए का खर्चा आएगा, जिसके लिए राज्य सरकार को जल्द ही प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके साथ ही सरकार 275 नए पदों पर भर्तियां करेगी जो कि नए कोर्ट में होने वाले कामों का ठीक से संचालन करेंगे। इन कोर्ट की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायधीश करेंगे।

सरकार द्वारा एससी-एसटी मामलों के लिए स्पेशल नए कोर्ट का निर्माण किया जाना एक राजनीतिक कदम दिखाई पड़ता है। देखा जाए तो सत्ताधारी बीजेपी का ध्यान राज्य के दलित वोट बैंक पर है। बीजेपी की सरकार सत्ता में रहते हुए किसी भी धर्म या समुदाय के लोगों को कठिनाई नहीं देना चाह रही है क्योंकि अगर वे अभी अच्छा काम करती है तो अगले चुनावों में लोग उन्हीं को चुनेंगे। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में बहुजन समाजवादी पार्टी को करारी शिकस्त मिली थी। प्रदेश में दलितों को लुभाने के लिए बीजेपी ने डॉ भीम राव अंबेधकर के जन्म की वर्षगांठ को समरस्ता दिवस के तौर पर मनाया था। बसपा को हराने के बाद अपनी इस योजना से बीजेपी दलितों को अपने पक्ष में करना चाह रही है।

इन विधानसभा चुनावों में बीजेपी और इसकी समर्थक पार्टियों ने कई वर्गों के लिए आरक्षित 86 सीटों में से 70 सीटें जीती थीं। जिनमें कई एससी भी शामिल हैं। विधानसभा चुनावों में जीते के बाद बीजेपी चाहती है कि वह अपना दायरा बढाए, जिससे कि 2019 में होने वाले विधानसभा चुनावों में दलित भी बीजेपी के समर्थन में वोट करें। इसके लिए बीजेपी के कई नेता जमीनी स्तर पर प्रयास कर रहे हैं कि वे सीधे तौर पर एससी मतदाताओं से मिलें और उन्हें जागरुक करें कि पार्टी उनकी किंतनी चिंता करती है।

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