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वाराणसी- गंगा की काशी भी प्यासी

वैसे जल संकट दूर करने के लिए काशी में नगर निगम ने पांच दर्जन बड़े ओवरहेड टैंक बनवाए, पर इसका लाभ जनता को नहीं मिला।
Author वाराणसी | May 25, 2017 04:48 am
गंगा किनारे स्थित वाराणसी के घाट। (Source: PTI)

अरविन्द कुमार  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा है, फिर भी यहां पानी का टोटा है। पिछले 10 वर्षों में भूमिगत जल स्रोत के बेतहाशा दोहन से संकट गहरा गया है। वही गंगा समेत अन्य नदियों का जल प्रभाव क्रमश: कम होता जा रहा है। गर्मी में यह संकट और विकराल हो गया है। मोदी के सांसद बने तीन साल हो गए हैं लेकिन गंगा का अविरल व निर्मल जल और काशीवासियों को स्वच्छ जल आज भी सपना है। वैसे जल संकट दूर करने के लिए काशी में नगर निगम ने पांच दर्जन बड़े ओवरहेड टैंक बनवाए, पर इसका लाभ जनता को नहीं मिला। काशी में गंगा नदी के घटते जलस्तर पर बनारस के जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र के 10 मई 2017 को सिंचाई विभाग को निर्देश दिए जाने पर नरौरा वैराज से जल गंगा नदी पर छोड़ने पर स्थिति में मामूली सुधार हुआ। बाद में जलस्तर घटने से शुलटेकेश्वर, रामनगर और दशाश्वमेध, अस्सीघाट के सामने के किनारे तेजी से सिकुड़ने लगे। पाण्डेय घाट, राजघाट, मानमंदिर घाट, राजाघाट समेत कई घाटों पर गंगा जल तट से काफी दूर खिसक गया है।

मोदी के संसदीय कार्यालय के रास्ते पड़ने वाली शकुलधारा में पोखरे सूख जाने पर जल निगम व जलकल विभाग ने खुदाई कर भूमिगत जल स्रोत खोजने का काम शुरू किया। दो सप्ताह बीतने के बावजूद इसमें सफलता नहीं मिल पाई है। एक समय काशी में सात नदियों का समागमन प्रभाव था। यहां की असी नदी नाले के रूप मे तब्दील हो गई है जबकि वरुणा भू-माफिया के कारण संकरी हो चुकी है। काशी के 64 तालाब, कुण्डों, पोखरी में 70 फीसद भू-माफिया के कब्जे में होने से जलसंकट बढ़ा है। गंगा में कम होते जलस्तर की बात प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद नरौरा से गंगा मे पानी छोड़ा गया। इसके बाद केन्द्रीय जल आयोग ने बनारस में 11 मई से 18 मई के बीच गंगा के जलस्तर में 13 सेमी की बढ़ोतरी दर्ज की। लेकिन पेयजल की किल्लत शहरवासियों में बरकरार है। 13 लाख से अधिक आबादी वाले काशी में 172 एलपीसीडी पानी प्रत्येक व्यक्ति को जरूरत है। गर्मियों में पंपिंग स्टेशनों का जलस्तर 14 इंच नीचे चला गया है।

 

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