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हर लड़की की बात सुनने लगे तो इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी नहीं चल पाएगी: बीएचयू वीसी जीसी त्रिपाठी

बीएचयू के वीसी जीसी त्रिपाठी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "हम एक सिक्योरिटी सिस्टम बना रहे हैं जिसमें वरिष्ठ छात्र-छात्राएं भी सलाहकार परिषद के सदस्य होंगे।"
Author September 28, 2017 18:43 pm
बीएचयू में छेड़खानी के विरोध में प्रदर्शन कर रही छात्राओं पर कल पुलिस ने लाठी चार्ज किया था। (PTI)

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में गुरुवार (21 सितंबर) को एक लड़की से छेड़खानी के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के पीछे यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर जीसी त्रिपाठी “बाहरी तत्वों” का हाथ मानते हैं। वीसी त्रिपाठी मानते हैं कि बीएचयू कैम्पस लड़कियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और मौजूदा विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी यात्रा के मद्देनजर कुछ लोगों ने अपने “निहित स्वार्थों” के चलते उभारा। जीसी त्रिपाठी ने इंडियन एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में पूरे मामले से जुड़े सवालों का जवाब दिया।  उनसे बात की एक्सप्रेस संवाददाता सारा हाफिज ने। पढ़ें साक्षात्कार के चुनिंदा अंश-

बीएचयू के छात्रों के अनुसार परिसर में लड़कियों की सुरक्षा एक गंभीर मसला है। खासकर, गुरुवार (21 सितंबर) को एक छात्रा द्वारा यौन दुर्व्यवहार की शिकायत के बाद। छात्राएं इतना असुरक्षित क्यों महसूस कर रही हैं?

ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुझे इसका बहुत अफसोस है। लेकिन कई बार ऐसे मसले होते हैं और कई बार बना दिए जाते हैं। ये मसला बनाया गया है। मेरे विचार में ये मुद्दा बाहरी लोगों द्वारा खड़ा किया गया है और जैसी शक्ल इसने ले ली है वो उस घटना से भी ज्यादा दुखदायी है।

ये लोग एक झूठ को सच बनाना चाहते हैं। मासूम और अपरिपक्व मस्तिष्क इसे ही सच मान लेते हैं। विश्वविद्यालय राजनीति की जगह नहीं है। नौजवान हमेशा ही सच और न्याय के लिए खड़े हुए हैं। लेकिन यहाँ छात्र ऐसी चीज के लिए खड़े हैं जो सच लग रही है लेकिन वो झूठ है।

कुछ लोग निहित स्वार्थों से घटना को तूल दे रहे हैं। छात्रों को अगर कोई समस्या है तो उन्हें विश्वविद्यालय को इस बारे में सुझाव देना चाहिए था। लेकिन उच्च शिक्षा के संस्थानों में अव्यवस्था पैदा करने की मानसिकता इसके पीछे काम कर रही है। बीएचयू अकेला नहीं है। देश की हर यूनिवर्सिटी इसकी शिकार है।

ये दुखद है कि जिन्हें पीड़ित से संवेदना दिखानी चाहिए थी वो उनका राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं। पीड़ित ने हमसे बात की है और वो उसकी शिकायत पर उठाए गए कदम से संतुष्ट है। असल में वो इस घटना पर की जा रही राजनीति से नाखुश है।

मैं महिलाओं को परिसर में सुरक्षा देने के लिए पूरा प्रयास कर रहा हूं। हम और ज्यादा स्ट्रीटलाइटें लगवा रहे हैं और सुरक्षा गार्ड तैनात कर रहे हैं।

gc tripathi, bhu vc gc tripathi बीएचयू के वीसी जीसी त्रिपाठी का कार्यकाल इसी साल खत्म होने वाला है। (एक्सप्रेस फोटो)

वो कौन लोग हैं जो यौन उत्पीड़न की घटना का राजनीतिक इस्तमाल कर रहे हैं?

पहले तो ये कि ये यौन उत्पीड़न नहीं बल्कि छेड़खानी की घटना है।

ये वो लोग हैं जो देश के लिए नहीं बल्कि अपने फायदे के लिए समर्पित हैं। वो देश या संस्थाओं के बारे में नहीं सोचते। उनके निजी हित ही सब कुछ हैं। उस दिन प्रधानमंत्री आने वाले थे, इसलिए मुझे लगता है कि ये सब कुछ कराया गया था। मुझे लगता है कि छेड़खानी की घटना इस आग में घी डालने के लिए करवाई गई।

कुछ मासूम छात्र, कुछ अपराधी कुछ अज्ञात लोग उन लोगों के साथ आ गये। इसलिए हम ये नहीं पता कर पाए कि इसकी शुरुआत किसने की। वो चाहते थे कि मैं बाहर आकर उनसे मिलूं लेकिन मैं बाजार (बीएचयू गेट) जाकर उनसे मिलता? मैं महिला महाविद्यालय जाने को तैयार था। लेकिन अपराधी तत्वों ने पेट्रोल बम और पत्थर फेंके। मैं कैसे जाता?

अगर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है तो छात्राओं का उत्पीड़न कैसे हो रहा है? शिकायत करने वाली छात्रा का नाम कैसे सामने आ गया?

ऐसी घटनाएं होती हैं। कैम्पस में 10 हजार लड़कियां रहती हैं। हम हॉस्टल में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं, वहां कर्फ्यू टाइम (आने-जाने का समय) है। लेकिन सड़क पर कर्फ्यू टाइम नहीं है। सड़क पर ऐसी घटनाएं होती हैं। महत्वपूर्ण है कि ऐसी घटनाओं से हम कैसे निपटते हैं। ये बहुत बड़ा कैम्पस है, कहीं भी कुछ भी हो सकता है। हम हर छात्र के संग एक गार्ड नहीं लगा सकते।

ये आरोप झूठा है कि विश्वविद्यालय छात्रों की नहीं सुनता। ये झूठ कुछ छात्रों ने फैलाया है। कैम्पस में 10 हजार लड़कियां हैं जिनमें से मुट्ठीभर ऐसी शिकायतें करती हैं। हम छात्रों के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं। हमने मामले की जांच के लिए हाई कोर्ट के जज नेतृत्व में एक कमेटी बनाई है।

ये अफवाह है कि कैम्पस में लड़कियां असुरक्षित महसूस करती हैं। जहां गुरुवार को ये घटना हुई वहां एम्फीथिएटर है जहां लड़कियां शॉर्ट्स पहनकर खेल खेलती हैं। उनसे पूछिए कि क्या उन्हें डर लगता है? ये कहना गलत है कि बीएचयू कैम्पस महिलाओं के असुरक्षित है। जब से मैं वीसी बना हूं ऐसी कोई घटना नहीं हुई। यहां कोई लड़की असुरक्षित नहीं है। ऐसा केवल वही लड़कियां महसूस करती हैं जो आइसा या एसएफआई की सदस्य हैं। हम सुरक्षा के लिए काफी कुछ कर रहे हैं। हम एक सिक्योरिटी सिस्टम बना रहे हैं जिसमें वरिष्ठ छात्र-छात्राएं भी सलाहकार परिषद के सदस्य होंगे।

क्या शनिवार रात विरोध प्रदर्शन कर रहे लड़के-लड़कियों पर लाठीचार्ज को आप जायज मानते हैं खासकर पुरुष पुलिसकर्मियों का महिलाओं पर लाठी चलाना?

बल प्रयोग अपराधी तत्वों के खिलाफ किया गया, लड़कियों के खिलाफ नहीं। ऐसे हालात थे कि बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने बल प्रयोग किया लेकिन देर रात को ताकि प्रदर्शनकारियों को हटाया जा सका। अगर लड़कियों पर बल प्रयोग हुआ हो तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है।

दशहरा अवकाश की घोषणा चार दिन पहले ही क्यों कर दी गयी? यूनिवर्सिटी छात्रों को छात्रावास से क्यों निकाल रही है?

छात्रावास खाली कराने का कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। ये उन कई अफवाहों मे एक है जो फैलायी जा रही हैं। छुट्टियां हालात देखते हुए पहले कर दी गयीं लेकिन अब हालात काबू में हैं और शांत हैं। लेकिन अगर कोई “नेतागिरी”करता है तो हम जरूर हॉस्टल और कैंपस बंद कर देंगे।

छात्रों का कहना है कि उनका विरोध प्रदर्शन केवल सुरक्षा को लेकर नहीं है। वो विश्वविद्यालय और हॉस्टल में लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव के भी खिलाफ हैं?

ये एक आरोप है…ये बहुत बड़ा विश्वविद्यालय है। इसके प्रबंधन में बहुत सारी समस्याएं आती हैं लेकिन यहां कोई लैंगिक भेदभाव नहीं है। हॉस्टलों में भी कोई लैंगिक भेदभाव नहीं है। मसलन, छात्राओं को साइबर लाइब्रेरी एक्सेस की क्या जरूरत है जब हमने उनके हॉस्टल में वाई-फाई दे रखा है। कौन सी यूनिवर्सिटी में चौबीसों घंटे लाइब्रेरी खुली रहती है?

महिला महाविद्यालय की छात्राओं का कहना है कि उनके हॉस्टल में वाई-फाई दो हफ्ते पहले शुरू हुआ है जबकि लड़कों के हॉस्टल में ये पहले से है?

ये हाल ही में लगा है लेकिन यही हम कह रहे हैं कि हम छात्राओं के लिए सर्वोत्तम प्रयास कर रहे हैं, हम उनकी सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं।

लड़के और लड़कियों के लिए कर्फ्यू टाइमिंग (हॉस्टल में आने-जाने का समय) अलग-अलग क्यों है?

कोई लड़की देररात तक बाहर नहीं रुकती। किसी ने इसे लेकर कभी शिकायत नहीं की है। अगर लड़कियों को कर्फ्यू टाइम के बाद ट्यूशन, कोचिंग, या दूसरे कारणों से बाहर रुकना होता है तो वो लिखित अनुरोध करके ऐसा कर सकती हैं। जब उन्हें जरूरत होती है तो हम तुरंत उन्हें अनुमति देते हैं। और इस व्यवस्था से सभी संतुष्ट हैं।

अभिभावक मानते हैं कि ये सबसे सुरक्षित कैम्पस है। अगर उनकी बेटियों को कुछ हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा? लड़कियों के लिए हॉस्टल में शाम को आठ बजे और लड़कों को 10 बजे के बाद बाहर जाने पर रोक है। इसकी वजह दोनों की सुरक्षा है। एमएमवी और त्रिवेणी में लड़कियों के लिए कर्फ्यू टाइम आठ बजे है, बाकी लड़कियों के हॉस्टल में छह बजे है। लड़कों और लड़कियों की सुरक्षा का मानदंड कभी एक समान नहीं हो सकता। अगर हम हर लड़की की मांग सुनने लगे तो यूनिवर्सिटी नहीं चल सकेगी। ये सारे नियम उनकी सुरक्षा के लिए हैं, और लड़कियों के पक्ष में हैं।

लड़कियों के हॉस्टल में नॉन-वेज खाना नहीं मिलता जबकि लड़कों के हॉस्टल में मिलता है?

ये इसलिए है क्योंकि 80 रुपये प्रतिदिन में हम नॉन-वेज खाना नहीं दे सकते। हम लड़कियों को दिन में चार बार पौष्टिक आहार देते हैं। सुबह नाश्ते में ऑमलेट दिया जाता है जो नॉन-वेज है। नॉन-वेज खाने पर कोई रोक नहीं है। लड़कियां ही खाने की सूची तय करती हैं। हम 80 रुपये की मेस फीस में नॉन-वेज कैसे दे सकते हैं।

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  1. आदित्य कुमार चौधरी
    Sep 26, 2017 at 12:57 pm
    जनाब वीसी अपनी अलग ही दलील दे रहे हैं। एक बात समझ में नहीं आती है कि जब कोई दुर्घटना घट जाती है तब ऐसे लोग बयां देने आते हैं। विश्विद्यालय का अब तक का सबसे जाहिल वीसी बोले तो भी शायद इसके लिये कम पड़ जाये। प्रतिदिन कहाँ नानवेज रहता है। मेरे समय में तो मात्र रविवार की दोपहर को ही नानवेज रहता था। ये 80 रुपये प्रतिदिन का बोझ नहीं उठा पा रहे हैं इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी के कर्ता धर्ता बने बैठे हैं। ये अपने बच्चों को तो पढ़ने के लिये विदेश भेज देते हैं और यहाँ बेतुके मिसाल कायम करने के लिये नये नये नियम निकालते हैं। मोदी जी की बड़ी फिकर है। ये बातें बोलकर अपनी मंशा साफ जाहिर कर रहे हैं कि इन्हें तो विश्विद्यालय में हो रही दुर्घटनाओं से कोई लेना देना नहीं। ये जनाब(धूर्त व्यक्ति) बोलता है कि मा े का राजनिकरण हुआ है। जब मोदी bhu के दीक्षांत समारोह में अपनी सरकार का गुणगान और पुरानी सरकार की बेइज्जती की तब कोई राजनिकरण नही हुआ? इसको मोदी की इतनी फिकर होती तो मा े की सुनवाई और छत्राओं की माँगो को तुरंत सुन लेता। ले डूबा न अपने साथ मोदी और योगी की इज्जत भी।
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