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राम मंदिर मामला: यूपी सीएम योगी आदित्‍यनाथ से मिले श्री श्री रविशंकर

13 नवंबर को श्री श्री रविशंकर ने कहा था वह अपनी ओर से मंदिर विवाद में मध्यस्थता करने 16 नवंबर को अयोध्या जाएंगे और सभी पक्षकारों से मिलेंगे।
आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख श्री श्री रवि शंकर। (File Photo)

अयोध्या की बुधवार को होने वाली अपनी यात्रा से पहले आर्ट आॅफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, श्री श्री रविशंकर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी। उत्तर प्रदेश सरकार के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘यह दोनों के बीच एक शिष्टाचार मुलाकात थी। बैठक ठीक ठाक रही और करीब 15 से 20 मिनट तक चली।’’ उन्होंने बताया कि जहां तक अयोध्या का मामला है, मुख्यमंत्री जी का रूख पूरी तरह से साफ है। राज्य सरकार इस मामले में पक्षकार नहीं है। सरकार अदालत के हर फैसले का सम्मान करेगी।

गौरतलब है कि 13 नवंबर को श्री श्री रविशंकर ने कहा था वह अपनी ओर से मंदिर विवाद में मध्यस्थता करने 16 नवंबर को अयोध्या जाएंगे और सभी पक्षकारों से मिलेंगे। उन्होंने कहा था, ‘‘मेरा इस मुद्दे पर कोई एजेंडा नहीं है और अपनी अयोध्या यात्रा के दौरान मैं सभी की बातें सुनूंगा।’’ उल्लेखनीय है कि सांसद असुद्दीन ओवैसी ने अयोध्या विवाद हल करने के लिए आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की कोशिशों को सोमवार को महज एक मजाक करार दिया था और कहा कि उन्हें इस विवाद को सुलझाने की कोई अथॉरिटी नहीं है। श्री श्री को जोकर करार देते हुए ओवैसी ने कहा था कि वे कुछ भी कर लें उन्हें उनकी इस कोशिश के लिए नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने वाला है।

ओवैसी के मुताबिक, कुछ ऐसे लोग जो मुगल लिखना तक नहीं जानते मुगलों का वंशज होने का दावा करते हैं, और अयोध्या विवाद पर अपना पक्ष रखते हैं। ओवैसी ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस मामले में पहले ही कह चुका है कि उसे किसी तरह का ऑफर स्वीकार नहीं है। इसलिए इस मुद्दे पर रविशंकर को पतंगबाजी नहीं करनी चाहिए। श्री श्री की खिल्ली उड़ाते हुए ओवैसी ने कहा था, “पहले एनजीटी ने जो जुर्माना उनपर लगाया है वो उसे चुकाएं फिर शांति की बात करें।”

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  1. M
    manish agrawal
    Nov 15, 2017 at 2:41 pm
    कल्याण सिंह की बीजेपी हुकूमत ने,हिन्दोस्तान की अदालत-ए-उज़्मा में,हलफनामा दिया हुआ था कि बाबरीमस्जिद की पूरी हिफाज़त की जायेगी,लेकिन फिर भी मस्जिद को शहीद कर दिया गया ! यानि बीजेपी हुकूमत की नाकामयाबी और अदालत द्वारा दिए गए stay को कायम रखवाने में नाफरमानी साबित हुयी ! जब अदालत के जारी किये गए stay के हुक्मनामे के बाबजूद बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया गया तो क्या अदालत की ये जिम्मेदारी नहीं बनती थी की पहले बाबरी मस्जिद की दोवारा तामीर करवाकर,स्टे आर्डर को enforce कराया जाता,और तब तक अदालती कार्रवाई मुल्तवी रखी जाती?अयोध्या में प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था,इस बात से किसी को इंकार नहीं,पर माता कौशल्या ने मस्जिद वाले भूखंड पर ही उनको जन्म दिया था, ये तथ्य साबित नहीं किया जा सकता ! पुरातत्व सर्वेक्षण महकमे के द्वारा बाबरीमस्जिद के नीचे खुदाई की गयी थी,उसमे निकले अवशेष की कार्बन डेटिंग से यदि वो डेढ़ लाख वर्ष पुराने राजा दशरथ के महल के साबित हों, तब कुछ बात बनेगी,अन्यथा ये सब वकवास है ! हिन्दुओं की किसी भी मज़हबी किताब में रामजन्मभूमि की कोई निशानी नहीं दी गयी है, ना ही अयोध्या का नक्शा दिया है !
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