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जिस गैंगरेप पीड़िता से मिले थे योगी उसे चौथी बार बनाया गया निशाना, पहले पिलाया था, अब चेहरे पर डाला तेजाब

महिला के साथ रायबरेली में 2008 में कुछ बदमाशों ने गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था, और इस पर एसिड भी फेंक दिया था।
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्य नाथ।

उत्तर प्रदेश की सरकार तो बदल गई लेकिन कानून व्यवस्था में कोई बदलाव नही आया है। अपराधी पहले भी बिना डरे वारदातों को अंजाम देते थे और आज भी हाल वैसा ही है। ताजा मामला लखनऊ का है जहां पर 35 वर्षीय गैगरेप पीड़िता पर आरोपियों ने चौथी बार एसिड फेंक कर हमला किया। यह घटना गुरुवार शाम 8 से 9 बजे हुई, जब अलिगंज इलाके स्थित पीड़िता अपने हॉस्टल के बाहर बने हैंडपंप से पानी लेने के लिए निकली थी। प्रदेश में अपराधी कितने निडर हैं इसका अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह घटना तब हुई जब पीड़िता को पुलिस सुरक्षा प्राप्त है और बंदूकधारी हॉस्टल का गार्ड वहीं थे।

पीड़िता लखनऊ स्थित एसिड अटैक पीड़ितों द्वारा चलाए जा रहे एक कैफे में काम करती है। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। एक पुलिस अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस अटैक के बाद पीड़िता के चेहरे पर काफी गंभीर चोट आई हैं। पीड़िता इस वक्त सदमें में है। लखनऊ के एडीजी अभय कुमार प्रसाद ने कहा कि हम इस पर कड़ी कार्रवाई करेंगे और किसी भी आरोपी को बक्शा नहीं जाएगा।

आपको बता दें कि पीड़िता दो बच्चों की मां है और वह रायबरेली की रहने वाली है। इस महिला के साथ रायबरेली में 2008 में कुछ बदमाशों ने गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था, और इस पर एसिड भी फेंक दिया था। पुलिस ने इस केस में तीन आरोपियों को गिरफ़्तार किया था। इस दौरान ये महिला बच गई थी और 9 साल से इंसाफ के लिए लड़ रही है। इस बीच महिला पर केस वापस लेने के लिए लगातार धमकियां मिल रही थी, लेकिन पीड़िता ने इंसाफ के लिए अपना संघर्ष जारी रखा।

वहीं गुरुवार (23 मार्च) को बदमाशों ने महिला पर फिर हमला किया और उसे एसिड पीने को मजबूर किया। हमले के वक़्त महिला ट्रेन में थी और ऊंचााहार से अपने बच्चों से मिलकर वापस आ रही थी। तभी ट्रेन में ही बदमाशों ने उस पर हमला कर दिया था। इस हमले के बाद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने भी पीड़िता से मुलाकात कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करवाने का आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री अपने वादे पर कितने खरे उतरे वह तो हाल ही में हुए पीड़िता पर हमले से लगाया जा सकता है। इस मामले में पुलिस की असंवेदनशीलता भी सामने आई थी। पिछले हमले के बाद पीड़िता अस्पताल के जिस वार्ड में भर्ती थी वहां पर तीन महिला कांस्टेबल सेल्फी लेते हुए दिखाई दी थीं।

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  1. B
    bitterhoney
    Jul 2, 2017 at 3:59 pm
    अगर योगी जी में तनिक भी नैतिकता है तो उनको तुरंत ही त्यागपत्र दे देना चाहिए. इस समय प्रान्त में अराजक तत्त्वों का ही बोलबाला है उनपर योगी जी लगाम कसने में असमर्थ हैं वह कभी भी उनपर कोई कठोर कार्रवाई कर ही नहीं सकते क्योंकि वह सभी योगी जी के ही चेले हैं. योगी जी ने पुलिस के हाथ बांध दिए हैं पुलिस वाला कार्रवाई कर ही नहीं सकता, अगर कोई पुलिस वाला अपनी वर्दी की लाज रखने के लिए कार्रवाई कर बैठता है तो उसका वही हाल होता है जो श्रेष्ठा ठाकुर का हुआ. अगर किसी को बीजेपी राज में नौकरी करनी है तो पहले अपने स्वाभिमान की बलि चढ़ा दे. मोदी मोदी योगी योगी के नारे लगाने होंगे.
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