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एक स्कूल, जहां से निकलती हैं आत्मनिर्भर बेटियां

जिले की अनूपशहर तहसील का परदादा-परदादी गर्ल्स वोकेशनल स्कूल इलाक़े की बेटियों को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है।
Author बुलंदशहर | April 13, 2017 04:46 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

बेटियों को सशक्त बना रहा है बुलंदशहर का परदादा-परदादी स्कूल। जिले की अनूपशहर तहसील का परदादा-परदादी गर्ल्स वोकेशनल स्कूल इलाक़े की बेटियों को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है। स्कूल का मुख्य मकसद बेटियों का उत्थान करना है। अगर बेटियों की ज़िन्दगी बेहतर होगी तो वे अपने परिवार को और बेहतर कर सकेंगी और अगर परिवार बेहतर होगा तो समाज भी बेहतर बनेगा। पेशे से टेक्सटाइल इंजीनियर रहे स्कूल के संस्थापक वीरेन्द्र सिंह बताते हैं कारोबारी मकसद से अपनी यात्राओं के दौरान उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित बच्चों की दयनीय स्थिति देखने को मिली। एक बार हिमाचल प्रदेश के धमर्शाला में दलाई लामा का स्कूल देख उनके मन में बेटियों के लिए कुछ बेहतर करने का विचार आया। इसके बाद उन्होनें बेटियों को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया और साल 2000 में नौकरी छोड़ कर भारत लौट आए। इसके बाद वह अपने इलाक़े के लोगों के बीच गए और उनके सामने उनकी बेटियों को मुफ्त शिक्षा, खाना-पीना, कपड़े आदि देने का प्रस्ताव रखा।

वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि उन्होंने पाया कि इलाक़े की महिलाएं अपनी बेटियों की शादी को लेकर ज़्यादा चिंतित थीं। इसके लिए उन्होंने उनके सामने एक और प्रस्ताव रखा। इसके तहत उनके स्कूल आने वाली हर बेटी को रोजाना दस रुपये की पेशकश की गई। इस हिसाब से अगर कोई बिटिया उनके स्कूल से 12वीं उत्तीर्ण करके निकलेगी तो उसके पास 40,000 रुपए जमा हो जाएंगे जो कि उनकी शादी में काम आ जाएंगे। इन पैसों से छात्रा के नाम से बैंक अकाउंट खोले जाने का प्रावधान है।वीरेन्द्र सिंह ने साल 2000 में परदादा-परदादी एजुकेशनल सोसाइटी बनाई। इसके तहत परदादा-परदादी गर्ल्स वोकेशनल स्कूल की स्थापना की। शुरुआती साल में उनके स्कूल में चौदह छात्राओं ने दाखिला लिया। नसर्री से शुरू हुआ स्कूल अब बारहवीं तक है। स्कूल यूपी बोर्ड से सम्बद्ध है और रोजाना आठ घंटे संचालित होता है। शुरुआत के चार घंटे पढ़ाई और बाद के चार घंटे व्यक्तित्व विकास के लिए। इसमें अंग्रेजी में वार्तालप और कंप्यूटर शिक्षा, प्रयोगशाला, नाटक, क्लब इत्यादि का संचालन होता है। छात्राओं को मुफ्त शिक्षा के अलावा मुफ्त नाश्ता, दोपहर का खाना और शाम का नाश्ता भी दिया जाता है। इसके अलावा मुफ्त किताबें और कपड़े दिए जाते हैं। छात्राओं को रविवार को छोड़कर सालाना सोलह अवकाश दिए जाते हैं।

यह अवकाश मुख्य पर्वों जैसे की दिवाली होली आदि के मौकों पर दिए जाते हैं। वीरेन्द्र सिंह बताते हैं अब तक सौ से ज्यादा शौचालयों का निर्माण करवा चुके हैं। छात्रओं के लिए परिवहन व्यवस्था भी है। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद छात्राओं को कोर्स से लेकर कॉलेज चयन करने व उनके शिक्षा पर आने वाले खर्चे के लिए स्कूल बैंकों या अन्य वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से उनकी मदद करता है। इतना ही नहीं स्कूल चलाने वाली संस्था इन छात्राओं के परिवार की महिलाओं को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर किए जाने की दिशा में काम कर रही है। महिलाओं के उत्थान के लिए अलग अलग योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें स्वयं सहायता समूह, महिलाओं से दूध क्रय योजना, संस्था द्वारा चलाए जा रहे उद्योगों में रोजगार दिया जाना शामिल हैं। वीरेन्द्र सिंह के मुताबिक उनके स्कूल में इस वक़्त 1360 छात्राएं पढ़ रही हैं। वीरेन्द्र सिंह बताते हैं उनका लक्ष्य तीन-चार साल में स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या पांच हजार करने का है।

 

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