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अब हेलीकॉप्टर से भी लगाई जा सकेगी गिरिराज पर्वत की सात कोसी परिक्रमा

पूरे परिक्रमा पथ का एक चक्कर लगाने में आठ से 10 मिनट का समय लगेगा। बुकिंग सहायता के लिए फोन नंबर 9411256859 पर संपर्क किया जा सकता है।
Author July 7, 2017 15:40 pm
गोवर्धन पहुंचने वाले श्रद्धालु इस सुविधा का लाभ अगले दो दिन तक उठा सकेंगे। (Photo: Youtube)

गुरू पूर्णिमा के अवसर पर गोवर्धन के ‘मुड़िया पूनों’ मेले में गिरिराज पर्वत की सात कोसी परिक्रमा लगाने के लिए आने वाले तीर्थयात्री अब हेलीकॉप्टर के जरिए हवाई परिक्रमा भी लगा सकेंगे। गोवर्धन पहुंचने वाले श्रद्धालु इस सुविधा का लाभ अगले दो दिन तक उठा सकेंगे।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के उप निदेशक दिनेश कुमार ने बताया कि मुड़िया पूर्णिमा मेले में आठ और नौ जुलाई को सुबह 9.30 बजे से शाम पांच बजे तक सरकारी हवाई सेवा प्रदाता कंपनी पवनहंस के हेलीकॉप्टर तीर्थयात्रियों को हवाई परिक्रमा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसका शुल्क प्रति व्यक्ति 2499 रुपए होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘इस सेवा के लिए वृन्दावन, मथुरा और अड़ींग आदि कई स्थानों का अवलोकन किया गया। अंतत: सेवा प्रदाता कंपनी के विशेषज्ञों की सलाह पर गोवर्धन के डीएवी इण्टर कॉलेज के खेल मैदान का चयन किया गया। वहीं पर अस्थाई हेलीपैड बनाया गया है।’’

पर्यटन सूचना अधिकारी प्रदीप टमटा एवं नगर मजिस्ट्रेट डॉ. बसंत अग्रवाल ने कहा, ‘‘श्रद्धालु कालेज परिसर में पहुंचकर हेलीकॉप्टर की सेवाएं ले सकेंगे। पूरे परिक्रमा पथ का एक चक्कर लगाने में आठ से 10 मिनट का समय लगेगा। बुकिंग सहायता के लिए फोन नंबर 9411256859 पर संपर्क किया जा सकता है।

क्यों मनाया जाता है गुरू पूर्णिमा?
यह पर्व भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति के रूप में मनाया जाता है। ऐसे माना जाता है कि बुद्ध, विष्णु भगवान के नौवें अवतार हैं। गौतम बुद्ध भगवान का जन्म, 563 ईसा पूर्व-निर्वाण 483 ईसा पूर्व को हुआ। वह विश्व महान दार्शनिक, वैज्ञानिक, धर्मगुरु और उच्च कोटी के समाज सुधारक के रूप में अवन्तरित हुए थे। बुद्ध भगवान बौद्ध धर्म के संस्थापक थे। उनका जन्म राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था, उनकी माता का नाम महामाया था, सात दिन बाद ही उनकी मां की मृत्यु हो गई थी जिसके बाद महाप्रजापती गौतमी ने उनका पालन किया।

शादी के बाद वह संसार को दुखों से मुक्ति का मार्ग दिलाने के लिए पत्नी और बेटे को छोड़कर निकल गए थे। सालों कठोर साधना करने के बाद वह बोध गया (बिहार) में बोधी वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह सिद्धार्थ गौतम से बुद्ध बन गए। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। वर्षा ऋतु की शुरुआत में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन से अगले चार महीने तक साधु-सन्त एक जगह पर ठहरकर अपने ज्ञान की गंगा को बहाते हैं।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन घर को फूलों से सजाने के बाद दीप जलाएं जाते हैं। पूजा पाठ करने के बाद बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है। वृक्ष की जड़ में दूध और सुगंधित पानी डालते हैं और दीपक जलाते हैं।

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