December 10, 2016

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डाकघर में जमा हुए 11 हजार के नकली नोट, पोस्ट मास्टर को रकम खुद जमा करानी होगी

पोस्ट मास्टर जब जमा हुए रुपयों को जमा कराने के लिए मुख्य डाकघर पहुंचे, तो मशीन ने 11000 रुपए के नकली नोट छांट कर अलग कर दिए।

Author नोएडा | November 22, 2016 04:04 am
हजार रुपए के नोट।

नोटबंदी के बाद ग्रामीण इलाकों के डाकघरों में पुराने नोट जमा कराने वालों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। इसकी वजह यह है कि डाकघरों में कुछ लोगों ने बड़ी संख्या में 500 और 1000 रुपए के नकली नोट जमा करा दिए हैं। पोस्ट मास्टर जब जमा हुए रुपयों को जमा कराने के लिए मुख्य डाकघर पहुंचे, तो मशीन ने 11000 रुपए के नकली नोट छांट कर अलग कर दिए। बताया जा रहा है कि मुख्य डाकघर ने नकली नोट लेने से इनकार कर दिया है। लिहाजा नकली नोटों जितनी रकम पोस्ट मास्टर को खुद जमा करानी होगी।  इसके कारण संसाधन उपलब्ध हुए बिना ग्रामीण डाकघरों के कर्मचारी रुपए जमा करने से कतरा रहे हैं। सोमवार को एक डाकघर में नकली नोट जमा होने की सूचना मिलने पर सेक्टर-16 स्थित मुख्य डाकघर और सेक्टर-19 स्थित डाकघर में कर्मचारियों ने नाराजगी जताई। डाकघर कर्मियों के मुताबिक, ग्रामीण डाकघरों में संसाधनों के नाम पर कुछ भी नहीं है। नोटबंदी से पहले डाकघरों में बहुत कम नकदी का लेन- देन होता था। एकाएक हुई नोटबंदी के बाद लोगों की भीड़ बढ़ने पर कुछ लोग कर्मचारियों को नकली नोट थमा गए।

जानकारी के मुताबिक, नोटबंदी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने दनकौर स्थित डाकघर में 500 और 1000 रुपए के नकली नोट जमा करा दिए थे। शनिवार को जब पोस्टमास्टर नकदी लेकर बुलंदशहर के मुख्य डाकघर पहुंचे, तो नोट गिनने वाली मशीन ने 11000 रुपए के नकली नोट पकड़ लिए। मुख्य डाकघर के अधिकारियों ने नकली नोट लेने से साफ मना कर दिया। दनकौर के डाकघर में असली और नकली नोट की जांच करने वाली मशीन नहीं है। नोटबंदी की घोषणा के बाद बिना मशीन वाले डाकघर नोट बदलने को तैयार नहीं थे, लेकिन लोगों के हंगामे के कारण 16 नवंबर से 500 व 1000 रुपए के नोट खातों में जमा करना शुरू कर दिया गया था। करीब 4 दिनों के भीतर ही दनकौर डाकघर में 1 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम ग्राहकों के खातों में जमा हो गई। सूत्रों के मुताबिक, लोगों की भीड़ और डाकघर में मशीन की कमी का फायदा उठाकर कई लोगों ने नकली नोट जमा करा दिए। बता दें कि गौतमबुद्धनगर के दनकौर, रबूपुरा व जेवर समेत कई गांवों के डाकघर बुलंदशहर के मुख्य डाकघर से जुड़े हुए हैं। वहीं संसाधनों की कमी का खमियाजा लोगों के अलावा डाककर्मियों को भी झेलना पड़ रहा है।इस मामले में नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी बैंक के अधिकारी ने बताया कि लोगों की भीड़ के आगे बैंककर्मी बेबस हो गए हैं।

 

 

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First Published on November 22, 2016 4:04 am

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