ताज़ा खबर
 

नोएडा: 22 साल बाद उड़ान भरेगी विकास की सोच

नोएडा के मुकाबले विकास की रफ्तार में अभी तक पिछड़ रहे ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्रों में जेवर हवाई अड्डा बनने की मंजूरी से बेहताशा तेजी आएगी।
Author नोएडा | June 26, 2017 02:17 am
नई दिल्‍ली हवाई अड्डे पर उतरने के बाद एक पाकिस्‍तानी शख्‍स ने खुद को आईएसआई एजेंट बताया। उसने इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर हैल्‍प डेस्‍क पर तैनात महिलाकर्मी के पास जाकर यह दावा किया।

सब कुछ तय योजना के मुताबिक चला तो 2023 में जेवर हवाई अड्डे से उड़ान भरने का मौका मिलेगा। जेवर में हवाईअड्डा बनाने का यह सपना शुरुआती सोच से तकरीबन 22 साल बाद पूरा होगा। जब एक पट्टी तैयार होने के बाद यहां से हवाई जहाज उड़ान भरेंगे। माना जा रहा है कि नोएडा के मुकाबले विकास की रफ्तार में अभी तक पिछड़ रहे ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्रों में जेवर हवाई अड्डा बनने की मंजूरी से बेहताशा तेजी आएगी। जो देश में अभी किसी भी इलाके में विकास की रफ्तार को लेकर नया कीर्तिमान तय करेगा। हवाई अड्डे से कृष्णा सर्किट या पश्चिमी उप्र के 16 जिले नहीं बल्कि हरियाणा और राजस्थान को भी बड़ा फायदा मिलेगा। ग्रेटर नोएडा इलाके में यमुना नदी पर बन रहे दो नए पुल पलवल, बल्लभगढ़ और फरीदाबाद को सीधे ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे से जोड़ेंगे। वहीं, हवाई अड्डे की मंजूरी के साथ जेवर तक मेट्रो चलने का भी रास्ता तकरीबन साफ है।

जेवर हवाई अड्डे को कुल दो चरणों में तैयार किया जाएगा। पहले चरण को 5 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके लिए करीब 1 हजार हेक्टेयर जमीन की जरूरत आएगी। एक हवाईपट्टी वाले इस चरण को पूरा करने में करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। वहीं करीब 15 साल में जेवर हवाई अड्डा परियोजना पूर्ण होगी। जहां 4 हवाईपट्टियों से जहाज उड़ान भरेंगे। करीब 3 हजार हेक्टेयर जमीन का इस्तेमाल होगा और करीब 20 हजार करोड़ रुपए परियोजना पर खर्च होंगे। जानकारों का मानना है कि हवाई अड्डे की ना केवल जेवर इलाके बल्कि इसके ईर्द- गिर्द के सेकड़ों किलोमीटर के इलाके में विकास की संजीवनी का काम करेगी। खास तौर पर कृष्ण सर्किट में आने वाले विदेशियों देशवासियों की संख्या में कई गुना ज्यादा बढ़ोत्तरी हो जाएगी। पर्यटन के लिहाज से मथुरा-वृंदावन- गोवर्धन को विश्व मानचित्र पर अलग पहचान मिलेगी। वहीं, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मेरठ, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, मुज्जफरनगर, मुरादाबाद, पलवल, बल्लभगढ़, फरीदाबाद, राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में आने-जाने वालों को राहत मिलेगी। दिल्ली हवाई अड्डे पर भार कम होगा और लोगों को दिल्ली के जाम में फंसने के झंझट से भी छुटकारा मिल जाएगा।

2007 से उप्र में सत्तारूढ़ रही बसपा सरकार के कार्यकाल में जेवर हवाई अड्डे के लिए करीब 10 हजार हेक्टेयर जमीन सुरक्षित रखी गई थी। यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण ने मास्टर योजना में इस जमीन को हवाई अड्डा परियोजना के लिए आरक्षित रखा था। हालांकि सपा सरकार के कार्यकाल में विमानन नीति के तहत दिल्ली के पालम हवाईअड्डे से जेवर की दूरी महज 86 किलोमीटर बताकर परियोजना को अन्यत्र ले जाने की वकालत की थी। विमानन नीति के तहत दो हवाईअड्डों में 150 किलोमीटर की दूरी होने का प्रावधान है। जानकारों का मानना है कि मंदी के मौजूदा दौर में जेवर में हवाईअड्डे को मंजूरी मिलने के बाद से ही जमीनों के भाव में 3-4 गुना तक की तेजी आ गई है। जिसका असर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा तक पड़ रहा है। वहां भी जमीनों के भाव में एकाएक तेजी आनी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि हवाई अड्डा परियोजना से 10 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। करीब 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का पूंजी निवेश होगा।

2001 में राजनाथ सिंह के कार्यकाल में हुई शुरुआत- 2017 योगी आदित्यनाथ ने दी मंजूरीउप्र में करीब 16 साल पहले भाजपा सरकार के शासनकाल में जेवर में हवाई अड्डा बनाने का प्रस्ताव बनाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के कार्यकाल में जेवर हवाई अड्डे का प्रस्ताव रखा था। 2002-03 में मुख्यमंत्री के रूप में मायावती ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था।
2007 में बसपा शासनकाल में जेवर हवाईअड्डे के प्रस्ताव में तेजी आई थी। इसके लिए जमीन को रिजर्व रखने का भी काम जमीनी स्तर पर शुरु हुआ था। 2012 में उप्र में सपा सरकार के आने के बाद हवाई अड्डे को जेवर के बजाए आगरा या शिकोहाबाद के पास बनाए जाने की वजह से इसमें पेच फंस गया था। हालांकि 2014 में डॉक्टर महेश शर्मा ने सांसद बनने के बाद जोर- शोर से जेवर में हवाई अड्डा बनाने की वकालत की थी। डॉक्टर महेश शर्मा और सपा सरकार के बीच जेवर हवाईअड्डे को लेकर बयानबाजी कई सालों तक सुर्खियों में रही। 2017 में हुई उप्र विधान सभा चुनावों में भी जेवर में हवाईअड्डे की मंजूरी एक राजनीतिक मुद्दा था।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग