ताज़ा खबर
 

नोएडा से ग्रेनो वेस्ट तक जाने वाली मेट्रो परियोजना को मंजूरी

सौम्य श्रीवास्तव ने बताया कि सामुदायिक भवनों को क्लब के रूप में तब्दील करने की मंजूरी मिल गई है।
Author नोएडा | December 22, 2016 02:47 am
दिल्ली मेट्रो।

उप्र विधानसभा चुनाव से पहले प्राधिकरण की अंतिम बोर्ड बैठक में लोगों को कई सौगात देने की कोशिश की गई है। सेक्टरों के बने सामुदायिक भवनों को क्लब में तब्दील करने का बड़ा फैसला नोएडा बोर्ड ने लिया है। 1997 से 2008 तक जमीन देने वाले करीब 2000 किसानों को 5 फीसद भूखंड सेक्टर-145 में आवंटित किए जाएंगे। जबकि शेष 5 फीसद की एवज में किसानों को नकद भुगतान किया जाएगा। बिल्डर और खरीदारों के हित में बोर्ड ने प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी (पीपीपी) को मंजूरी प्रदान की है। पॉलिसी को कैबिनेट पहले मंजूर कर चुका है। इसके अलावा नोएडा को ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक जाने वाली मेट्रो परियोजना को भी प्राधिकरण बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर करीब 2682 करोड़ रुपए खर्च होंगे। करीब 1.23 लाख मुसाफिरों के रोजाना सफर करने का अनुमान है। नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक बुधवार को लखनऊ में हुई। जिसमें प्राधिकरण चेयरमैन रमा रमण, सीईओ दीपक अग्रवाल, एसीईओ शिशिर सिंह और डीसीईओ सौम्य श्रीवास्तव मौजूद थे।

सौम्य श्रीवास्तव ने बताया कि सामुदायिक भवनों को क्लब के रूप में तब्दील करने की मंजूरी मिल गई है। भवन के कितने हिस्से में क्लब का निर्माण किया जाएगा, भवन नियमावली के आधार पर इसे तय किया जाएगा। निर्माण करने से पहले संबंधित क्लब के नक्शे को प्राधिकरण से मंजूरी लेनी होगी। क्लब बनाने का खर्च और संचालन संबंधित आरडब्लूए करेगी। प्राधिकरण ने खेल और सांस्कृतिक क्लब के उप नियम 2016 के तहत यह प्रावधान शामिल किया है। क्लब की सदस्यता शहर में रहने वाला कोई भी व्यक्ति ले सकेगा। आरडब्लूए की मंजूरी पर मेहमान भी क्लब का सदस्य बन सकता है लेकिन विवाद की स्थिति में उसकी सदस्यता निरस्त हो सकती है। राष्ट्रीयकृत बैंक में क्लब का खाता खोलना जरूरी होगा। जो क्लब या संचालक व सचिव के नाम से होगा। सांस्कृतिक, सामाजिक, खेलकूद और मनोरंजन की गतिविधियां बढ़ाने के लिए प्राधिकरण ने शहरवासियों को यह तोहफा दिया है।

बिल्डर और फ्लैट खरीदार, दोनों के हित में परियोजना निस्तारण नीति (प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी) को प्राधिकरण बोर्ड ने मंजूर कर लिया है। इसके तहत प्राधिकरण को प्रत्येक बिल्डर कंपनी के साथ मिलकर एक एस्क्रो खाता खोलना होगा। इस खाते में परियोजना से जुड़ी रकम जमा होगी। खरीदारों को भी यह पता रहेगा कि उनकी रकम का इस्तेमाल उसी परियोजना में किया जा रहा है। निर्माण कार्य शुरू नहीं करने या परियोजना पूरी नहीं होने की स्थिति में प्राधिकरण एस्क्रो खाते में जमा बिल्डर का 30 फीसद रकम जब्त कर लेगी। बाकी 70 फीसद रकम, खरीदारों को वापस की जाएगी। यदि खरीदार अपने फ्लैट की रजिस्ट्री कराने में असमर्थ होता है, तो बिल्डर कंपनी 10 फीसद अपने स्तर से जमा करेगी। जिसके बाद खरीदार अपने फ्लैट की लीज डीड करा सकेगा। इससे दोनों को फायदा होगा।

नोएडा में मेट्रो का जाल बिछाने की योजना के तहत नोएडा के सेक्टर- 71 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के नॉलेज पार्क-5 तक जाने वाली मेट्रो परियोजना पर भी बोर्ड ने मुहर लगा दी है। कुल 2682 करोड़ रुपए की लागत से 14.958 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाया जाएगा। कुल 9 में से 7 स्टेशन ग्रेटर नोएडा और 2 नोएडा में होंगे। परियोजना को 2020-21 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ से इस परियोजना का शिलान्यास किया था। परियोजना पर 10 फीसद खर्च ग्रेटर नोएडा और 5 फीसद नोएडा प्राधिकरण वहन करेंगे। केंद्र और राज्य सरकार के अनुदान के अलावा करीब 45 फीसद रकम वित्तीय संस्थाओं से जुटाई जाएगी। इस मेट्रो से नोएडा का सीधा संपर्क ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक हो जाएगा।

 

अब कैश नहीं चेक या अकाउंट में ही आएगी सैलरी; वेतन अध्यादेश पर लगी कैबिनेट की मुहर

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.