May 28, 2017

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बाजार भाव और सर्कल दर के अंतर की खाई नहीं पाट पाई नोटबंदी, आयकर विभाग के बढ़ोतरी कर ने उड़ाई बिल्डरों की नींद

जमीनों की खरीद-फरोख्त में बाजार भाव और स्टांप ड्यूटी में कोई सीधा सिद्धांत नहीं है’।

Author नोएडा | March 7, 2017 03:43 am
आज जीडीपी में रीयल एस्टेट की हिस्सेदारी नौ फीसद है।

‘अजी साहब, मोदी या नोटबंदी क्या करे, सत्ता और प्रशासनिक मशीनरी अपना पुराना ढर्रा बदलने को तैयार ही नहीं है। नोटबंदी का असर संपत्ति बाजार पर यह हुआ है कि लोगों के पास नकदी नहीं बची है। जबकि सफेद धन में इतने महंगी हो चुकी जमीन की कीमत दिखाना बहुत कठिन हो गया है।  इसकी वजह यह है कि पिछले 4-5 सालों में इलाकों के बाजार भाव से इतर इतना ज्यादा सरकार ने बढ़ा दिया है कि चुनिंदा मामलों को छोड़कर यह बाजार भाव से काफी ज्यादा हो गया है। ऐसे में स्टांप विभाग और आयकर विभाग के बीच पिसने से बचने के लिए लोग खरीदारी करने से डरने लगे हैं। जमीनों की खरीद-फरोख्त में बाजार भाव और स्टांप ड्यूटी में कोई सीधा सिद्धांत नहीं है’। होने वाली सैकड़ों रजिस्ट्री में अधिकारी अपने उच्चाधिकारियों के सामने ऐसे कुछ चुनिंदा मामले उदाहरण के रूप में रखते हैं। जिसमें खरीदार नौकरीपेशा वर्ग का होता है और कर्ज लेने की वजह से वह सर्कल भाव से भी ऊंची कीमत पर स्टांप लगाता है। ऐसे 1-2 फीसद मामलों को ही रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी आधार मानकर उसी अनुपात में सर्कल भाव को हर साल बढ़ा देते हैं।

जानकार बताते हैं कि जिन सेक्टरों में 2012 तक सर्कल दर महज 36500 रुपए प्रति मीटर थी, वह 2016 में 103500 रुपए प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई है। चार साल में 300 फीसद की बढ़ोतरी करने का नतीजा यह हुआ है कि अब लोगों के पास जमीन खरीदने की गुंजाइश ही नहीं बची है। ऐसे में नोटबंदी के 50 दिनों के भीतर तो पूरा मामला ही चरमरा गया। इस दौरान खरीद-फरोख्त तकरीबन पूरी तरह से ठप रही। जबकि उसके पहले हो चुके सौदों को जैसे-तैसे निपटाने के लिए लोग भाग-दौड़ कर रहे हैं। नोएडा से ज्यादा खराब हालात ग्रेटर नोएडा में हैं। ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों की बदहाली से त्रस्त लोग कई गुना नुकसान उठाकर भी भागने की कोशिश कर रहे हैं। सेक्टर-48 में रहने वाले प्रॉपर्टी जानकार गौरव बताते हैं कि ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों की सर्कल दर 14 हजार रुपए प्रति मीटर तय है, जबकि प्राधिकरण की आबंटन दर करीब 10800 रुपए प्रति मीटर है। कुछ इलाकों को छोड़कर ज्यादातर औद्योगिक सेक्टर पूरी तरह से बदहाल हैं। ऐसे ही एक औद्योगिक सेक्टर ईकोटेक-11 में रीसेल में 5-6 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर पर भी जमीनें उपलब्ध हैं। हालांकि सर्कल भाव और बाजार भाव में दोगुने से ज्यादा का अंतर इनकी खरीदारी रोक रहा है।

उन्होंने बताया कि इस सेक्टर में 8 साल पहले 2 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर में भूखंड आबंटित कराने वाला अब उसे अगर 6 हजार रुपए प्रति मीटर की कीमत पर बेचता है, तो उसे 4 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर का मुनाफा मिलता दिखाई देता है, जबकि उसमें अगर 8 साल का ब्याज जोड़ा जाए, तब उसे फायदे के बजाए नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद खरीदारी करने वालों को 14 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर की रकम की अदायगी दिखानी भी जरूरी है। अगर खरीदार समझौते के तहत 14 हजार रुपए की स्टांप देकर रजिस्ट्री कराने को तैयार भी हो जाता है, तब सबसे पहले बेचने वाला आयकर विभाग के शिकंजे में फंस जाता है। 2 हजार रुपए में खरीदे भूखंड को 14 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर पर बेचने पर आयकर विभाग 12 हजार रुपए का फायदा मानकर 20 फीसद यानी 2400 रुपए प्रति वर्ग मीटर का गेन टैक्स (वृद्धि कर) वसूलने का नोटिस जारी करता है। इस वजह से 6 हजार रुपए की कीमत पर भूखंड बेचने वालों को 2400 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से आयकर विभाग को कर देना पड़ेगा। तब 8 साल बाद बिकने वाले भूखंड पर उसे महज 1600 रुपए प्रति वर्ग मीटर ही मिलेगा।

 

 

 

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First Published on March 7, 2017 3:43 am

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