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अब मांस की दुकानों पर नहीं कटेगा मुर्गा, दुकानों पर केवल बूचड़खानों से आने वाला मांस और मछली ही बिकेगी

खाद्य व औषधि विभाग ने मांस विक्रेताओं को लाइसेंस जारी करने को लेकर स्पष्ट किया है कि लिखित शर्तों के अलावा जिंदा मुर्गा या मछली काटने की इजाजत नहीं मिलेगी।
Author नोएडा | April 4, 2017 03:38 am
अवैध बूचड़खानों को लेकर योगी सरकार सख्त, हड़ताल पर मीट कारोबारी। (File Photo)

आशीष दुबे

उत्तर प्रदेश में मांस की दुकानें अब बदले हुए रूप में नजर आएंगी। इन दुकानों पर केवल बूचड़खाने से आने वाले कटे मांस की बिक्री की जा सकेगी। यानी इन दुकानों पर अब जिंदा मुर्गा या मछली काटकर नहीं बेची जा सकेगी। खाद्य व औषधि विभाग ने मांस विक्रेताओं को लाइसेंस जारी करने को लेकर स्पष्ट किया है कि लिखित शर्तों के अलावा जिंदा मुर्गा या मछली काटने की इजाजत नहीं मिलेगी। ऐसे में चिकन के शौकीनों को लाइसेंसी दुकानों से जिंदा मुर्गा खरीदना होगा। उसके बाद का सारा काम खरीदार को अपने घर पर करना होगा।  उधर, मांस विक्रेताओं के विरोध और लाइसेंस जारी करने की गहमा-गहमी के बीच सोमवार शाम को लाइसेंस जारी करने वाली जिला स्तरीय कमेटी ने नोएडा में मांस की 26 दुकानों के लाइसेंस जारी किए। लाइसेंस कमेटी की अगली बैठक 7 अप्रैल को प्रस्तावित है। मांस विक्रेताओं को बूचड़खाने से बकरे या भैंस का मांस लाना होगा। खरीद का पूरा ब्योरा विक्रेता को जांच के समय उपलब्ध कराना होगा।

गौतम बुद्ध नगर के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरपी सिंह ने बताया कि मांस की दुकान का लाइसेंस जारी करने के लिए प्राधिकरण, नगर निगम या नगर पालिका का एनओसी अनिवार्य है। धार्मिक स्थल से तय दूरी, ऊंचाई, टाइल, जानवर का मांस बेचे जाने संबंधी साइन बोर्ड, अवशिष्ट जल की निकासी, फ्रिज, बूचड़खाने से मांस लाने के तरीके, मांस का निरीक्षण, विक्रेता व कर्मचारियों का मुख्य चिकित्साधिकारी से सत्यापन आदि शर्तों को पूरा किया जाना भी जरूरी है। हालांकि लाइसेंस जारी करने की पूर्व निर्धारित शर्तों को लोगों के विरोध के बाद विभाग ने लचीला बनाया है। मांस की दुकानों के लिए पहले उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अहम शर्त के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन इस शर्त के अव्यावहारिक होने के चलते अब इसे हटा दिया गया है। उधर, 26 लाइसेंस जारी होने के बावजूद लोगों ने लाइसेंस को आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है और जिंदा मुर्गा या मछली काटने पर रोक के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि गौतम बुद्ध नगर के खाद्य विभाग के पास इससे पहले मांस विक्रेताओं को जारी हुए लाइसेंसों का ब्योरा नहीं है। अलबत्ता नई शर्तों की वजह से पुराने लाइसेंसों की अहमियत भी खत्म मान ली गई है। विभाग सूत्रों के मुताबिक, मांस विक्रेताओं को जो लाइसेंस पूर्व में जारी हुए हैं, ऐसे विक्रेताओं को अब नई शर्तों को पूरा करते हुए दोबारा आवेदन करना होगा। दूसरी तरफ उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष नरेश कुच्छल ने मांस दुकानों को एकतरफा कार्यवाही के तहत बंद कराने को पूरी तरह से गलत बताया है।
कुच्छल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने दो दिन पहले खाद्य व औषधि विभाग गौतम बुद्ध नगर के अभिहित अधिकारी से मुलाकात कर जल्द लाइसेंस उपलब्ध कराने की मांग की थी और खासतौर पर उन दुकानों में मांस बेचने की अनुमति मांगी थी, जिन्होंने लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है। साथ ही इन दुकानों पर टाइल व शीशा लगा होने के अलावा गर्म पानी की भी व्यवस्था है। .

 

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