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यमुना एक्सप्रेस वे: 17 बिल्डर परियोजनाओं पर फंसा पेच

उत्तर प्रदेश में बदले निजाम का असर प्रशासनिक फैसलों में साफ दिखाई देने लगा है।
Author नोएडा | April 20, 2017 02:27 am
यमुना एक्सप्रेस वे।

उत्तर प्रदेश में बदले निजाम का असर प्रशासनिक फैसलों में साफ दिखाई देने लगा है। अभी तक परोक्ष रूप से बिल्डर समर्थक सरकारों के विपरीत योगी सरकार के अफसर अब उन पर सख्ती बरतते दिखाई दे रहे हैं। इस कड़ी में यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने 17 बिल्डर परियोजनाओं के इमारतों के नक्शे (बिल्डिंग प्लान )निरस्त कर दिए गए हैं। इनमें से 11 बिल्डर परियोजनाएं अकेले जेपी समूह की हैं। जबकि 6 भूखंड अलग-अलग बिल्डर कंपनियों को आबंटित हुए थे। बताया गया है कि प्राधिकरण अधिकारियों को हाल ही में पता चला कि 5 बिल्डरों ने इमारत नक्शे संबंधी आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया है। इन आपत्तियों को 2014 से 2016 के दौरान दूर कराया जाना था। जांच करने पर पता चला कि ऐसी कुल 17 बिल्डर परियोजनाएं हैं। जिसके बाद इन सभी परियोजनाओं के इमारतों के नक्शे निरस्त किए गए। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भी यमुना प्राधिकरण ने जेपी समूह की 5 परियोजनाओं के नक्शे निरस्त कर दिए थे।

यमुना प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक जेपी समूह को ग्रेटर नोएडा से आगरा तक बनाए यमुना एक्सप्रेस वे के एवज में हुए समझौते के तहत जमीन मिली थी। जबकि अन्य बिल्डर कंपनियों ने प्राधिकरण से भूखंड आबंटित कराए थे। जेपी समूह को सेक्टर-19, 22बी, 22सी और 25 में रिहायशी और वाणिज्यिक परियोजनाएं बनानी थी। जेपी की 11 परियोजनाओं के ‘ले आउट प्लान’ को प्राधिकरण ने मंजूरी प्रदान कर दी थी। अलबत्ता इमारत नक्शे के प्रस्ताव पर प्राधिकरण अधिकारियों ने आपत्तियां लगाई थीं। तय समय के भीतर आपत्तियों को दूर कर नया नक्शा सौंपा जाना था। जो जेपी समेत अन्य बिल्डर कंपनियों ने नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक, 1 साल के भीतर नया इमारत नक्शा तैयार कर मंजूर कराना जरूरी है।
जेपी की तरह सेक्टर-19 में गौरसन, सेक्टर-25 में वीजीए डिवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, सेक्टर- 22ए में अजनारा इंडिया लिमिटेड, सेक्टर- 22डी में औरिस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, सेक्टर- 25 में अर्बेनिया प्राइवेट लिमिटेड और सेक्टर-14 में गौरसन बिल्डर कंपनी की परियोजनाओं के इमारत नक्शे निरस्त कर दिए गए हैं।

जिन परियोजनाओं के इमारत नक्शे निरस्त हुए हैं, उनमें अकेले जेपी समूह को ही करीब 5.50 लाख वर्ग मीटर के भूखंड पर इमारत बनानी थी। वहीं, सेक्टर-22डी में औरिस बिल्डर कंपनी ने प्राधिकरण से 8.19 लाख वर्गमीटर का भूखंड आबंटित कराया था। यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अरुणवीर सिंह ने बताया कि बिल्डरों को आपत्तियां दूर कर इमारत नक्शा जमा कर मंजूरी लेनी थी। सूत्रों के मुताबिक, अभी तक कितने खरीदारों ने इन परियोजनाओं में निवेश किया है, इसका अभी तक पता नहीं चल सका है। माना जा रहा है कि लाखों वर्ग मीटर की परियोजनाओं में हजारों की संख्या में निवेशक फंस सकते हैं।

 

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