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सपा की हार पर मंथन करने अखिलेश यादव ने बुलाई कार्यकारिणी की बैठक, नहीं आए मुलायम सिंह, शिवपाल यादव, आजम खान

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार के बारे में चर्चा के लिए समाजवादी पार्टी ने कार्यकारिणी की बैठक बुलाई थी।
समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ शिवपाल यादव। ( Photo Source:

विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली हार पर मंथन करने के लिए बुलाई गई नेशनल एग्जीक्यूटिव बैठक में पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और शिवापल यादव नहीं पहुंचे। इस बैठक की अध्यक्षता यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने की। बैठक से मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के नजदीकी पार्टी नेता भी गायब रहे। पार्टी के नेतृत्व को लेकर अखिलेश और मुलायम सिंह यादव में हुए विवाद में बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान भी बैठक में नहीं पहुंचे।

शुक्रवार को पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि मुलायम सिंह यादव नेशनल एग्जीक्यूटिव बैठक में हिस्सा लेंगे, क्योंकि पार्टी में अब किसी भी तरह का कोई झगड़ा नहीं बचा है। यह भी बताया जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव ने पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से कहा था कि पार्टी में गुटबाजी की वजह से विधानसभा चुनाव में हार हुई है। इसके बाद अंदाजा लगाया जा रहा था कि मुलायम सिंह यादव इस बैठक में पहुंचेंगे।

क्या है अखिलेश-मुलायम विवाद?
समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को लेकर यादव परिवार में काफी खींचातनी चली थी। यादव परिवार में दो खेमे बन गए थे। एक खेमा अखिलेश नेतृत्व वाला था तो दूसरा खेमा शिवपाल समर्थक वाला था। 31 दिसंबर 2016 को समाजवादी पार्टी के उस वक्त अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे अखिलेश यादव पर पार्टी के खिलाफ गतिविधियों का आरोप लगाकर उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। लेकिन उसके एक दिन बाद सपा के नेता राम गोपाल यादव ने पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया और उसमें अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया। राम गोपाल यादव को भी अखिलेश यादव के साथ पार्टी से बाहर कर दिया गया था।

बाद में मुलायम सिंह यादव ने पार्टी के संविधान का हवाले देते हुए इस राष्ट्रीय अधिवेशन को अवैध घोषित कर दिया था। यह लड़ाई चुनाव आयोग तक पहुंच गई थी, जिसका फैसला अखिलेश यादव के पक्ष में आया। अखिलेश यादव को पार्टी का चुनाव निशान साइकिल दे दिया गया। पिता को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाने के बाद अखिलेश यादव ने घोषणा की थी कि वे विधानसभा चुनाव के तीन महीने बाद पार्टी की बागड़ोर मुलायम सिंह यादव को सौंप देंगे।

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