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मेरठ: शाह के फंडे और योगी के डंडे के डर से बूचड़खाने हुए ठंडे, शासन स्तर पर ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है

पुलिस प्रशासन के कड़े रुख को देखते हुए पिछले दो दिनों से इन कमेलों में पशु कटान का कारोबार पूरी तरह बंद है।
Author मेरठ | March 21, 2017 04:19 am
बूचड़खाना (Express Photo)

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही पश्चिम उत्तर प्रदेश में भारी तादाद में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खानों पर पुलिस प्रशासन शिकंजा कसने की तैयारी में जुट गया है। पशिचम में बूचड़खानों को कमेले के नाम से भी जाना जाता है। पुलिस प्रशासन के कड़े रुख को देखते हुए पिछले दो दिनों से इन कमेलों में पशु कटान का कारोबार पूरी तरह बंद है। इसके चलते शहर के मीट दुकानदारों को आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है। पशुओं के अवैध कटान को लेकर पिछले सालों में यहां कई बार सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं भी हो चुकी हैं। विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान पश्चिम में हुई रैलियों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने साफ कहा था कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद कमेलों को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। सरकार बदलते ही जिस तरह अखिलेश सरकार के कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया गया। तभी से यह भी कयास लगाये जा रहे थे कि पश्चिम में अवैध रूप से चल रहे इन बूचड़खानों पर भी भाजपा सरकार कड़ा रुख अख्तियार करेगी। हालांकि अखिलेश यादव व मायावती के शासनकाल में इन कमेलों पर पुलिस प्रशासन का रुख नरम ही रहा। अब पुलिस प्रशासन पशुओं के अवैध कटान को लेकर हरकत में आ गया है।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अवैध रूप से चल रहे करीब 300 कमेलों में सन्नाटा पसरा था और उलझन का माहौल था। इस कारोबार से जुड़े लोग एकाएक इन कमेलों के पास भी नजर नहीं आ रहे थे। हालाकि प्रदेश सरकार की ओर से अवैध कटान को लेकर अभी कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। लेकिन रविवार व सोमवार भी पुलिस की चहल-पहल उन इलाकों में दिखाई दी जहां ये छोटे-बड़े कमेले चल रहे हैं। पशुओं को लाने वाली गाड़ियों पर भी पुलिस ने कड़ी निगाहें रखी। पुलिस ने उन छोटे-बड़े ट्रको की चेंकिंग की जो तिरपाल लगाए हुए थे। उधर पुलिस की गाड़ियां भी इन कमेलों के पास में मौजूद दिखाई दीं। सर्किल आफिसर विनोद सिरोही व खरखौदा थाना प्रभारी मनीश सक्सेना ने भी अवैध कटान को लेकर अपने इलाकों का दौर किया। इस वजह से रविवार और सोमवार मीट की सप्लाई नहीं हो सकी। मेरठ में ही करीब 300 मीट बेचने की दुकानें हैं जिन पर रोजाना 250 से 300 पशुओं के मांस की खपत बताई जाती है। मीट आपूर्ति के लिए पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से बड़ी तादाद में अवैध पशुओं का कटान होता रहा है। लेकिन पिछले दो दिनों से इन कमेलों में काम पूरी तरह ठप्प है। पशुओं को ठंूस-ठंूसकर लाने वाली गाड़ियां इन कमेलों में जाती नहीं दिखाई दी। आमतौर पर इन कमेलों के साथ-साथ कई मुस्लिम इलाकों के गली-मोहल्लों में भी पशुओं का कटान होता रहा है।

भाजपा के मेयर हरिकांत अहलूवालिया का कहना है कि उन्होंने करीब तीन साल से नगर निगम के चलाए जा रहे कमेलों को बंद कराया है। कमेले बंद कराना भाजपा का मुख्य एजंडा है। नगर निगम ने जिन मास विक्रेताओं को लाइसेंस दिए हैं उनको भी निरस्त कराया जाएगा। उधर बसपा के पूर्व सांसद व मीट कारोबारी शाहिद अखलाक का कहना है कि मीट कारोबारियों में कोई खौफ नहीं है, यह मूलभूत अधिकारों में शामिल है। पहले भी नियम के मुताबिक ही कटान होता आया है आगे भी नियमों के दायरे में यह काम होगा। बाकि जो सरकार की नीति होगी उस हिसाब से देखा जाएगा।

 

 

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