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अपने शौहर को लिखे खुला संबंधी खत पर किए दस्तखत, कहा- अब आजाद हूं

देश में एक साथ तीन तलाक के बारे में सुप्रीम कोर्ट के हाल के ऐतिहासिक फैसले के बाद पैदा सूरतेहाल के बीच एक महिला ने सार्वजनिक तौर पर अपने पति से खुला लेकर उससे अलग रहने का एलान कर दिया।
Author लखनऊ | September 11, 2017 01:56 am
भारतीय मुसलिम महिलाएं

देश में एक साथ तीन तलाक के बारे में सुप्रीम कोर्ट के हाल के ऐतिहासिक फैसले के बाद पैदा सूरतेहाल के बीच एक महिला ने सार्वजनिक तौर पर अपने पति से खुला लेकर उससे अलग रहने का एलान कर दिया। लखनऊ में ब्याही शाजदा खातून ने शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में अपने शौहर जुबेर अली को लिखे गए खुला संबंधी पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि उसने अपने पति से खुला लेने के लिए बहुत कोशिश की। इसके लिए वह दो बार इस्लामी शिक्षण संस्थान नदवा और एक दफा फिरंगी महल भी गईं लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। लिहाजा अब वह सार्वजनिक रूप से अपने शौहर को खुला का नोटिस हस्ताक्षरित करके भेज रही है। कुरान और हदीस में इसे लेकर कोई रोक भी नहीं है, लिहाजा अब वह आजाद है। इस्लाम में शौहर को तलाक देने और महिला को खुला लेने का अधिकार दिया गया है। खुला लेने के बाद औरत अपनी मर्जी से रह सकती है। यह कदम उठाने में खातून की मदद करने वाली ह्यमुसलिम वूमेन लीगह्ण की महासचिव नाइश हसन ने रविवार को बताया कि वह महिला अपने शौहर के जुल्म से बहुत परेशान थी और वह पिछले 18 महीने से उससे अलग रहकर शिक्षण कार्य करके अपना गुजारा कर रही थी। तमाम अपील के बावजूद उसका पति न तो उसे तलाक दे रहा था और न ही खुला।

उन्होंने बताया कि खातून अपना खुला कराने के लिए दो बार नदवा और एक बार फिरंगी महल गई। वहां से उसे यह कहकर लौटा दिया गया कि वह इस बारे में अपने शौहर की रजामंदी लेकर आए जबकि कुरान शरीफ में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। सार्वजनिक तौर पर खुला लेने के अलावा हमारे पास और कोई इलाज नहीं था। महिला की ह्यइद्दतह्ण की अवधि नवंबर में खत्म होगी। उसके बाद उसका खुला मुकम्मल हो जाएगा। ह्यआॅल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि खुला की इच्छुक महिला को अपने शौहर को नोटिस देना होता है। अगर पति तीन नोटिस दिए जाने के बावजूद जवाब नहीं देता है तो खुला अपने आप लागू हो जाएगा। इस बीच, आॅल इंडिया मुसलिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने कहा कि आॅल इडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से जारी किताब ह्यमजमुअ‍े-कवानीन इस्लामीह्ण में भी इस तरीके को जायज बताया गया है। शाइस्ता ने बताया कि कौम को रास्ता दिखाने के लिए जिम्मेदार मुसलिम संगठनों ने महिलाओं के प्रति अपनी सोच अब तक नहीं बदली है। पितृसत्तात्मक मानसिकता की वजह से महिलाओं की जिंदगी नरक बना दी गई है।

आॅल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि खातून ने खुला लेने का जो तरीका अपनाया है, वह सही नहीं है। सिर्फ एक खत के आधार पर खुला नहीं मिलता।
आॅल इंडिया मुसलिम वीमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने खातून के कदम को बिल्कुल दुरुस्त करार देते हुए कहा कि जब शौहर और इस्लामी ओहदेदार लोग खुला के लिए मदद नहीं करते तो महिला ह्यनिकाह फस्ख का रास्ता अपना सकती है।

 

 

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