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विदेश में बैठे पति ने फोन पर सुनाया तलाक, महिला बोली- बेटी पैदा होने से नाराज थे शौहर

महिला का आरोप है कि पति ने उसे विदेश से फोन कर ट्रिपल तलाक के जरिए तलाक दे दिया है। महिला के मुताबिक बच्ची को जन्म देने के चलते पति ने उसे तलाक दिया है।
महिला के पति ने उसे विदेश से फोन कर ट्रिपल तलाक के जरिए तलाक दे दिया। (ANI Photo)

देशभर में ट्रिपल तलाक को लेकर जारी बहस के बीच एक मुस्लिम महिला के साथ हुई ज्यादती का एक नया मामला सामने आया है। यह मामला यूपी के मुजफ्फरनगर का है। महिला का आरोप है कि पति ने उसे विदेश से फोन कर ट्रिपल तलाक के जरिए तलाक दे दिया है। महिला के मुताबिक बच्ची को जन्म देने के चलते पति ने उसे तलाक दिया है। महिला ने बताया कि वह (पति) हमेशा से लड़का चाहते थे लेकिन बच्ची पैदा होने के बाद से मुझसे मारपीट करते थे। ट्रिपल तलाक की शिकार हुई महिला का कहना है कि इस रिवाज को खत्म किया जाना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपी के सहारनपुर जिले के रहने वाले शाहनवाज ने कुछ दिन पहले अपनी पत्नी को फोन किया और तीन बार तलाक शब्द बोलकर उससे सारे रिश्ते खत्म कर लिए। पीड़िता ने बताया कि पति ने फोन किया और मैंने उन्हें सलाम किया, जिसके बाद उन्होंने मुझे गाली देना शुरू किया और अचानक उन्होंने तीन बार तलाक कहा। महिला के मुताबिक उसके पति ने आगे कहा कि तुझे आजाद कर दिया। मुजफ्फरनगर की रहने वाली पीड़िता की शादी 2 साल पहले शाहनवाज से हुई थी और उन्हें एक बेटी भी है। महिला ने बताया कि बच्चे के जन्म से पहले पति और ससुराल वालों का व्यवहार उसके साथ ठीक था।

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गौरतलब है कि ट्रिपल तलाक और बहुविवाह के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाएं विरोध कर रही है। वह इससे आजादी चाहती हैं। हालांकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ट्रिपल तलाक खत्म किए जाने और यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किए जाने के खिलाफ है। पर्सनल लॉ बोर्ड और मुस्लिम संगठनों ने प्रेस कांफ्रेंस करके समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग की प्रश्नावली का विरोध किया और सरकार पर उनके समुदाय के खिलाफ ‘युद्ध’ छेड़ने का आरोप लगाया। संगठनों ने दावा किया कि अगर समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया जाता है तो यह सभी लोगों को ‘एक रंग’ में रंग देने जैसा होगा, जो देश के बहुलतावाद और विविधता के लिए खतरनाक होगा। वहीं, केन्द्र ने तीन तलाक के मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को नसीहत देते हुए उस पर राजनीति न करने को कहा है। केन्द्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि यह मामला लैंगिक समानता और न्याय का है। लिहाजा, इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। वेंकैया नायडू ने कहा, “अगर आप विधि आयोग का बहिष्कार करना चाहते हैं तो यह आपकी मर्जी है लेकिन आप अपने विचार दूसरों पर नहीं थोप सकते हैं और न ही इसे राजनीतिक बना सकते हैं।”

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