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पैसों के लिए रोजाना 10 किमी पैदल चलकर बैंक जाता है किसान, परेशान होकर बोला- नहीं झेल सकता ये सब

40 मिनट बाद किसानों को बताया जाता है कि कैश खत्म हो गया है। बिहारी दास को अभी तक कुछ भी नहीं मिल पाया है।
4 दिन से रोजाना खाली हाथ लौट रहा किसान (representative image)

नोटबंदी के बाद लोगों के सामने अपनी दैनिक जरुरतें और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बुंदेलखंड के महोबा जिले में एक किसान रोजाना 10 किलोमीटर पैदल चलकर पैसे के लेने के लिए बैंक पहुंचा। यह किसान पिछले चार दिनों से रोजाना बैंक के चक्कर लगा रहा है। इस शख्स का नाम बिहारी दास है। उसने कहा कि मेरे लिए यह बहुत परेशान करने वाला है, मैं रोज ये सब नहीं झेल सकता लेकिन मुझे यह सब सहना पड़ रहा है। मैं रोज बैंक तक की दूरी तय करता हूं, लेकिन जैसे ही पैसे लेने की बारी आती है कैश खत्म हो जाता है। उसने बताया कि उसे खाद खरीदने के लिए 10,000 रुपए की जरुरत है ताकि वह पौधे लगा सके। कई सालों में पहली बार बुंदेलखंड में अच्छा मानसून हुआ है।

एनडीटीवी के मुताबिक 65 साल के किसान बिहारी दास ने कहा कि सरकार ने अचानक नोट बंद करने का फैसला सुना दिया। इससे किसानों के सामने करेंसी की कमी हो गई है और उन्हें बीज और खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। बिहारी दास अकेले नहीं है सुबह 10 बजे उनके जैसे 400 और लोग है। इनमें से ज्यादातर पास के गांवों के किसान है। कल सरकार ने घोषणा की थी कि किसान एक हफ्ते में 25000 रुपए क्रॉप लोन के रूप में ले सकते हैं।

अब तक बैंक मैनेजर पहुंच चुके हैं लेकिन बैंक अभी भी नहीं खुला है। लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। दिलशाद खान नाम का एक किसान कहता है कि आपको लगता है कि मैं झूठ कह रहा हूं? हम सब झूठे हैं? आपको क्या लगता है कि हमें पैसों की जरुरत नहीं है? हमारे गांव में आओ और देखो हम कैसे रह रहे हैं?

40 मिनट बाद किसानों को बताया जाता है कि कैश खत्म हो गया है। बिहारी दास को अभी तक कुछ भी नहीं मिल पाया है। बैंक के हेड कैशियर विक्रांत दुबे ने बताया कि वह और नकदी का इंतजाम कर रहे हैं। मैं रोजाना 13 घंटे की शिफ्ट करता हूं, मैं पूरी कोशिश करता हूं लेकिन कैश की कमी के कारण हम कुछ नहीं कर सकते हैं।

 

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