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UP Budget session: हंगामेदार रहा सत्र, BSP ने लगाए ‘राज्यपाल वापस जाओ’ के नारे

उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र की शुरुआत शुक्रवार को विपक्षी दलों की नारेबाजी और हंगामे के साथ शुरू हुई और दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राज्यपाल राम नाईक अपना अभिभाषण पूरा नहीं कर सके।
हंगामा ऐसा कि अभिभाषण पूरा नहीं पढ़ सके राज्यपाल

उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र की शुरुआत शुक्रवार को विपक्षी दलों की नारेबाजी और हंगामे के साथ शुरू हुई और दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राज्यपाल राम नाईक अपना अभिभाषण पूरा नहीं कर सके। राज्यपाल नाईक की अपील के बावजूद वे विधानमंडल के संयुक्त सदन को संबोधित करने के लिए जैसे ही खडे हुए, बसपा सदस्य ‘राज्यपाल वापस जाओ’ के नारे लगाते हुए सदन के बीचोंबीच आ गए। बसपा, कांग्रेस और रालोद के सदस्य हाथों में सरकार विरोधी नारे लिखे बैनर लहराते देखे गए। कांग्रेस के सदस्य सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तस्वीर छपी टोपी लगाए थे।

राज्यपाल वापस जाओ के नारे लगा रहे बसपा, कांग्रेस और रालोद के सदस्यों ने अपने हाथों में बैनर ले रखे थे, जिन पर ‘बिजली पानी दुरुस्त करो, वरना कुर्सी खाली करो’, ‘कानून व्यवस्था ध्वस्त है, सपा सरकार मस्त है’, ‘किसान विरोधी यह सरकार बर्खास्त हो’ जैसे नारे लिखे हुए थे।

सत्र की इस हंगामाखेज शुरुआत के दौरान सत्तारूढ़ सपा के साथ-साथ भाजपा के सदस्य भी अपने-अपने स्थान पर बैठे रहे। राज्यपाल ने नाईक ने ऐसे मौकों पर पूर्व के राज्यपालों के विपरीत लगभग 20 मिनट तक अपना अभिभाषण जारी रखा और बीच में पानी भी पिया। वे बहरहाल सरकार की उपलब्धियों और कामकाज का ब्योरा समेटे 110 पृष्ठ का अभिभाषण पूरा नहीं कर सके और अंतिम पैराग्राफ पढ़ कर सदन से विदा ली।

राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में कहा कि मेरी सरकार प्रदेश की जनता को प्रगति और खुशहाली की ओर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में तत्परता से काम किया है .. सांप्रदायिक ताकतों की कोशिशों के बावजूद पूरे प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द और कानून व व्यवस्था की स्थिति रही है। उन्होंने किसान हित के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए कहा, ‘मौसम के प्रहार से पिछले वर्ष किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए हर संभव कोशिश की गई है।

हमने भारत सरकार से जितनी सहायता मांगी थी, हमें महीनों बाद उससे आधी धनराशि भी नहीं मिली, मगर हमने उसका इंतजार किए बिना राज्य आकस्मिकता निधि की सीमा बढ़ा कर अपने खजाने से किसानों को राहत पहुंचाई।’ हालांकि प्रदेश सरकार ने लगातार तीसरे साल भी गन्ना समर्थन मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। अभिभाषण में गन्ना किसानों के हित का दावा किया गया है। राज्यपाल के अभिभाषण में कौशल विकास के जरिये नौजवानों को रोजगार पाने लायक बनाने तथा रोजगार देने जैसे ब्योरे के साथ अवस्थापना विकास, बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था में सुधार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र मेें उठाए गए कदमों का विस्तार से जिक्र किया गया है।

बसपा ने जहां एक ओर सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी और भाजपा पर मिलीभगत करके दंगे करवाने का आरोप लगाया, भाजपा ने राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध न करने पर अपना स्पष्टीकरण दिया। भाजपा विधानदल के नेता सुरेश खन्ना और विधानपरिषद में भाजपा नेता हृदय नारायण दीक्षित ने कहा, ‘हमने राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध नहीं किया तो महज इसलिए कि राष्ट्रपति में इस आशय का पत्र भेजा था और हमने शालीनता बनाए रखी। इसका यह मतलब नहीं कि हम अभिभाषण में कही गई बातों और दावों से सहमत हैं.. दोनों सदनों में हम सरकार की नाकामियों को उजागर करेंगे और जनहित के मुददों पर उसका जवाब भी मांगेंगे।’

राज्यपाल के अभिभाषण के बाद दोनों सदनों की अलग-अलग बैठक के साथ सदन की औपचारिक शुरुआत हुई तो भी विपक्षी दलों का तेवर जस का तस रहा। विधानसभा में अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय जैसे ही राज्यपाल के अभिभाषण के औपचारिक पाठ के लिए खड़े हुए बसपा और कांग्रेस के सदस्यों ने फिर नारेबाजी की और विरोध स्वरूप सदन से बहिर्गमन भी किया। पांडेय ने इसी हंगामे में कार्यसूची पर निधारित विधायी कार्यों को पूरा करवाने के बाद सदन की कार्यवाही आठ फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी।

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