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उत्तर प्रदेश: अब भी भीतर ही भीतर सुलग रहा है समाजवादी खेमा, 72 घंटे में बदल दिए 14 उम्मीदवार

विधानसभा चुनाव के पहले के चार महीनों में समाजवादी पार्टी आपसी कलह में बुरी तरह उलझ चुकी है।
Author लखनऊ | December 13, 2016 04:17 am
टिकट बंटवारे को लेकर एक्शन मूड में मुलायम सिंह यादव

चार महीने बाद भी समाजवादी कुनबा भीतर ही भीतर सुलग रहा है। मंच से लेकर सड़क तक तक उतरी चाचा भतीजे की लड़ाई शीत युद्ध की शक्ल अख्तियार कर चुकी है। बीते 72 घंटे यानी तीन दिनों से शिवपाल यादव का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। इस बात के कयास इसलिए भी लगाए जा रहे हैं क्योंकि बिना प्रो राम गोपाल यादव की जानकारी के और सपा संसदीय बोर्ड की रजामंदी के जिस तरह टिकट काटे और बांटे गए, उससे शिवपाल का पलड़ा फिलहाल भारी है।

उत्तर प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के पहले के चार महीनों में समाजवादी पार्टी आपसी कलह में बुरी तरह उलझ चुकी है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी लेकर शिवपाल यादव को सौंपने का मुलायम सिंह यादव का एलान इस कलह की असल वजह करार दिया जा चुका है। खुद अखिलेश यादव इस कलह की पटकथा का लेखक अमर सिंह को ठहरा चुके हैं जिन्हें पार्टी में आने के बाद भी मुख्यमंत्री ने स्वीकार नहीं किया है।बीते तीन दिनों के भीतर 14 पूर्व घोषित उम्मीदवारों के टिकट काट कर उनके स्थान पर नए उम्मीदवारों की घोषणा ने समाजवादी पार्टी के भीतर फिलहाल यह संकेत दे दिया है कि अभी काट-छांट के इस दौर में कई नेताओं के पर कतरने की तैयारी है। इस तैयारी को कौन अंजाम दे रहा है? और किसकी रजामंदी से कटाई-छंटाई पार्टी स्तर पर जारी है? इस पर साफ तौर पर कह पाने का साहस कोई भी नेता बटोरता नजर नहीं आ रहा है। लेकिन दबी जुबान में अधिकांश सपाई यह जरूर कह रहे हैं कि जिन लोगों के टिकट काटे गए वे या तो अखिलेश यादव खेमे के थे या प्रो. रोम गोपाल यादव के खेमे के। जिन लोगों को उनके स्थान पर उम्मीदवार बनाया गया, उनमें से अधिकांश सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के समर्थक बताए जा रहे हैं।

सोमवार को जारी की गई नए उम्मीदवारों की सूची में अमापुर से वीरेंद्र सालंकी का टिकट काट कर राहुल पांडेय को, बिलग्राम मल्लावां से सुभाष पाल से टिकट लेकर अनीस मंसूरी को, तिलोई से मयंकेश्वर शरण सिंह के स्थान पर जुनैल हसन को, जगदीशपुर से अजीत प्रसाद के स्थान पर विमलेश सरोज को, माधवगढ़ से लखन सिंह कुश्वाहा के स्थान पर आरपी निरंजन को, कालपी से विष्णुपाल सिंह के स्थान पर अनूप कुमार सिंह को और खागा से ओम प्रकाश गिहार के स्थान पर विनोद पासी को उम्मीदवार बनाया गया है। घोषित उम्मीदवारों का टिकट काट कर भितरघात के नए बीज रोपने में जुटी समाजवादी पार्टी को मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के बीच रार से कितना लाभ होता है, यह तो विधानसभा चुनाव परिणाम तय करेंगे। लेकिन जिन उम्मीदवारों के टिकट घोषित किए जा चुके हैं वे यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर अपना प्रचार करेंगे भी अथवा नहीं?

 

 

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