December 03, 2016

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सपा की रजत जयंती में भी उभरा अखिलेश-शिवपाल का मनमुटाव

कितनी बार भी मुझे बर्खास्त कर लेना, मैं आपके साथ हूं। मुख्यमंत्री नहीं बनना है मुझे। आपके विभाग से कम काम मेरे विभाग में नहीं हुआ।’

(बाएं से दाएं) शिवपाल सिंह यादव, सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।

छोटे लोहिया के नाम पर बने जनेश्वर मिश्र पार्क में अपने गठन की पच्चीसवीं सालगिरह मना रही समाजवादी पार्टी देश के समाजवादी नेताओं की मौजूदगी में भी आपसी द्वंद्व छिपा नहीं पाई। दो मर्तबा बर्खास्त किए गए शिवपाल सिंह यादव ने रजत जयंती समारोह में अपना दर्द बयां कर अखिलेश यादव को घेरने की हर वह कोशिश की, जिससे ऐन चुनाव के पहले समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा पर आंच आए। जनता परिवार को दोबारा एक करने में जुटे शिवपाल परिवार के नेताओं के सामने यह संदेश दे पाने में पूरी तरह नाकाम रहे कि वे एकजुट हैं।

जनेश्वर मिश्र पार्क में अपनी स्थापना की 25वीं वर्षगांठ मना रही समाजवादी पार्टी भव्य आयोजन में जनता परिवार के नेताओं को बुलाकर केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर देने का संदेश देना चाहती थी। ऐसा कर वह अपने अल्पसंख्यक मतदाताओं को संगठित करने की रणनीति के तहत काम कर रही थी लेकिन उसकी सारी योजनाएं धरी की धरी रह गर्इं। मंच पर उपस्थित पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, लालू प्रसाद यादव, शरद यादव, अजीत सिंह, अभय चौटाला, राम जेठमलानी बाकी का स्वागत संबोधन समाजवादी पार्टी के राष्टÑीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की मौजूदगी में कर रहे शिवपाल सिंह यादव ने जो कहा, उसे सुनकर मंच और जनता, दोनों सन्न रह गए। अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नाम लिए बिना प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने क हा, ‘जितना काम मुख्यमंत्री जी ने किया, उससे कम काम मैंने भी नहीं किया। कितनी बार भी मुझे बर्खास्त कर लेना, मैं आपके साथ हूं। मुख्यमंत्री नहीं बनना है मुझे। आपके विभाग से कम काम मेरे विभाग में नहीं हुआ।’

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अखिलेश को नसीहत देते हुए शिवपाल बोले, ‘घुसपैठियों से सावधान रहना। जो चाहो, मांग लेना।’ फिर शिवपाल ने अपनी पुरानी बात दोहराई, ‘मैंने एक दिन कहा था, कुछ लोगों को भाग्य से मिलता है। कुछ लोगों को मेहनत से मिलता है और कुछ लोगों को विरासत से। कुछ ऐसे भी होते हैं जो काम करते रह जाते हैं लेकिन पूरी जिन्दगी उन्हें कुछ नहीं मिलता।’ हालांकि लालू प्रसाद यादव के कहने पर अखिलेश ने शिवपाल के चरण छुए लेकिन उनकी पहल भी संबंधों में जमी बर्फ पिघला नहीं सकी।लोहिया के संदेश -कुछ लोग मेरी सुनेंगे जरूर लेकिन मेरे मर जाने के बाद- को अपने अंदाज में पेश करते हुए अखिलेश ने शिवपाल को वो जवाब दिया जिसकी उम्मीद थी। उन्होंने कहा, कुछ लोग सुनेंगे जरूर लेकिन समाजवादी पार्टी का सब कुछ बिगड़ जाने के बाद। यह कह कर अखिलेश ने आपसी बयानबाजी से सपा को हो रहे नुकसान की पीड़ा सामने रखी।

रजत जयंती समारोह के संयोजक गायत्री प्रसाद प्रजापति के अखिलेश और शिवपाल को चांदी की तलवार भेंट करने पर भी मुख्यमंत्री ने चुटकी ली। उन्होंने कहा, प्रजापति, हमें तलवार दे देते हो और कहते हो तलवार न चलाएं। समाजवादी पार्टी के बीच चल रहे आपसी द्वंद्व पर लालू प्रसाद यादव ने भी चुटकी ली। उन्होंने कहा, ‘हमने अखिलेश और शिवपाल को मंच पर आगे कर यह संदेश देने की कोशिश की कि दोनों के बीच कोई लड़ाई नहीं है। हमसे कोई लड़ता नहीं है। हम आपस में लड़ लेते हैं। फिर एकट्ठा हो जाते हैं। ये परिवार की बात थी लेकिन बहुत से आदमी अपना उल्लू सीधा करने के लिए कान फूंकता है।’

नरेंद्र मोदी की सरकार के ढाई साल पूरे होने पर सवाल उठाते हुए लालू प्रसाद यादव ने कहा कि इन बरसों में देश में न ही बेरोजगारी कम हुई और न ही रोजगार सृजित हुए।’ सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए उन्होंने मुलायम सिंह यादव की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इनके समय में हुई थी सर्जिकल स्ट्राइक। लालू ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव हैं तो उन्हें राम याद आ रहे हैं। पहले हमने समस्तीपुर में रथ पकड़ा। फिर बिहार चुनाव में पकड़ा अब उत्तर प्रदेश में पकड़ने आए हैं। अपना भाषण समाप्त करने के पूर्व लालू प्रसाद यादव फिर यादव परिवार के बीच छिड़े विवाद पर लौट आए। उन्होंने कहा, महाभारत भी परिवार में ही हुआ था। दूसरा कौन लड़ पाया।

कार्यक्रम में शरद यादव ने भी धारा 370, तीन तलाक, कश्मीर में सौ दिनों तक जारी रहे कर्फ्यू और मध्य प्रदेश में मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों का जिक्र किया। जनता परिवार में समाजवादी पार्टी के शामिल होने पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। अलबत्ता वे इतना जरूर कह गए कि अखिलेश के कंधे पर इतिहास की जिम्मेदारी है। यह कह कर शरद यादव ने साफ कह दिया कि समाजवादी पार्टी का भविष्य दरअसल अखिलेश यादव ही हैं। राष्टÑीय लोक दल के अजीत सिंह ने लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए सभी के साथ आने की अपील की।

रजत जयंती समारोह की अध्यक्षता कर रहे समाजवादी पार्टी के राष्टÑीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि सभी नेताओं ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर यह भरोसा दिला दिया है कि वे सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ खड़े हैं। सीमा की सुरक्षा का अपना पुराना सवाल दोहराते हुए मुलायम ने कहा कि इस देश में गैर बराबरी को समाप्त करना बड़ी चुनौती है। देश की 21 करोड़ जनता आज भी भूखी सो रही है। इससे बड़ी चिन्ता की बात कोई हो ही नहीं सकती। उत्तर प्रदेश में जहां हमारी सरकार है, यह सुनिश्चत करना होगा कि क्या यहां भी ऐसा तो नहीं हो रहा है?
मुलायम सिंह यादव ने कहा कि इस वक्त देश में सबसे अधिक अत्याचार मुसलमानों के खिलाफ हो रहा है। मुख्यमंत्री भी देखें कि कहीं उत्तर प्रदेश में भी तो ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने समारोह में आए पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि यहां से संकल्प लेकर जाओ कि न अन्याय करोगे, न अन्याय होने दोगे।

 

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First Published on November 6, 2016 2:22 am

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