December 04, 2016

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शिवपाल यादव की सपा बैठक से अखिलेश ने बनाई दूरी

शिवपाल ने चर्चा के दौरान यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव में अखिलेश ही सपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे।

Author लखनऊ | October 21, 2016 19:55 pm
(बाएं से दाएं) शिवपाल सिंह यादव, सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।

उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) में गहराते मतभेदों को और हवा देने वाले घटनाक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शुक्रवार (21 अक्टूबर) को अपने चाचा और सपा के प्रान्तीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव द्वारा बुलायी गयी पार्टी के जिला पदाधिकारियों की बैठक में शरीक होने के बजाय उन्हें अपने आवास पर बुलाकर मुलाकात की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक शिवपाल ने अखिलेश से मुलाकात करके उन्हें सपा के जिला पदाधिकारियों की बैठक में व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया था, लेकिन मुख्यमंत्री के बैठक में शिरकत ना करने और पदाधिकारियों को अपने घर पर बुलाकर बातचीत करने से एक बार फिर संकेत मिले हैं कि पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं है।

बैठक में शामिल कुछ पदाधिकारियों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि शिवपाल ने चर्चा के दौरान कई बार यह बात समझाने की कोशिश की कि आगामी चुनाव के बाद अखिलेश के दोबारा मुख्यमंत्री बनने से उन्हें कोई तकलीफ नहीं होगी और विधानसभा चुनाव में अखिलेश ही सपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। एक पदाधिकारी ने बताया कि शिवपाल ने सभी जिला पदाधिकारियों को चुनाव की तैयारियों में पूरी तरह जुट जाने और आगामी पांच नवम्बर को लखनऊ में मनाए जाने वाले सपा के रजत जयन्ती समारोह को सफल बनाने के आदेश दिए।

यह बैठक खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ने सभी जिलाध्यक्षों को अपने सरकारी आवास पर बुलाकर उनसे बात की। इस संक्षिप्त बातचीत में अखिलेश ने उन्हें आगामी तीन नवम्बर को शुरू होने वाली अपनी विकास रथयात्रा के बारे में बताया। उन्होंने जिलाध्यक्षों से अपने-अपने क्षेत्र में जनता के बीच जाकर काम करने के निर्देश देते हुए कहा, ‘सब कुछ ठीक हो जाएगा।’ ‘समाजवादी परिवार’ में जारी रार को जाहिर करने वाले एक घटनाक्रम में अखिलेश ने पिछले दिनों अपने पिता सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को पत्र लिखकर कहा था कि वह आगामी तीन नवम्बर से अपनी विकास रथयात्रा शुरू करेंगे। ऐसे में उनके पांच नवम्बर को होने वाले सपा के रजत जयन्ती समारोह में शिरकत की सम्भावनाओं को लेकर संदेह पैदा हो गया था।

अखिलेश और शिवपाल के बीच जारी ढकी-छुपी तनातनी को देखते हुए यह आशंका पैदा हो गयी है कि जैसे-जैसे चुनाव प्रचार परवान चढ़ेगा, यह तल्खी नये रंग दिखायेगी। सोशल मीडिया पर अखिलेश द्वारा ‘नेशनल समाजवादी पार्टी’ और ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी’ बनाये जाने और चुनाव आयोग से ‘मोटरसाइकिल’ का चिह्न मांगे जाने की अटकलें लगातार बढ़ रही हैं। संगठन कौशल में माहिर माने जाने वाले शिवपाल को पिछले महीने अखिलेश की जगह सपा का प्रान्तीय अध्यक्ष बनाया गया था। अखिलेश चाहते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण का अधिकार उन्हें दिया जाए और वह इससे कम पर समझौता करने को तैयार नहीं है।

अखिलेश को सपा के प्रान्तीय अध्यक्ष पद से हटाए जाने के विरोध में पिछले महीने पार्टी राज्य मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले कई युवा नेताओं को शिवपाल ने पार्टी से निकाल दिया था। निष्कासित नौजवान नेता अखिलेश के करीबी माने जाते हैं। मुख्यमंत्री इन सभी की सपा में वापसी चाहते हैं। गत जून में माफिया-राजनेता मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी की अगुवाई वाले कौमी एकता दल (कौएद) के शिवपाल की पहल पर सपा में विलय को लेकर अखिलेश की नाराजगी के बाद पार्टी में तल्खी का दौर शुरू हो गया था। कुछ दिन बाद इस विलय के रद्द होने से यह कड़वाहट और बढ़ गई थी।

शिवपाल ने कुछ दिन बाद प्रदेश में जमीनों पर अवैध कब्जों को लेकर इस्तीफे की पेशकश की थी। गत 15 अगस्त को सपा मुखिया ने मैदान में उतरते हुए शिवपाल की हिमायत की थी और कहा था कि अगर शिवपाल पार्टी से चले गए तो सपा टूट जाएगी। अखिलेश ने गत 12 सितम्बर को भ्रष्टाचार के आरोप में तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रजापति तथा एक अन्य मंत्री राजकिशोर सिंह को बर्खास्त कर दिया था। ये दोनों ही सपा मुखिया के करीबी माने जाते हैं। मुलायम के कहने पर बाद में प्रजापति की मंत्रिमण्डल में वापसी हो गयी थी। इसे मुख्यमंत्री अखिलेश के लिये करारा झटका माना गया था।

मुख्यमंत्री 13 सितम्बर को शिवपाल के करीबी माने जाने वाले मुख्य सचिव दीपक सिंघल को पद से हटाकर अपने पसंदीदा अधिकारी राहुल भटनागर को यह पद दे दिया था। उसके फौरन बाद मुलायम ने अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ काबीना मंत्री शिवपाल को यह जिम्मेदारी दे दी थी। इससे नाराज मुख्यमंत्री ने शिवपाल से उनके महत्वपूर्ण विभाग छीन लिए थे। अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद पर वापस लेने से सपा मुखिया के इनकार से पार्टी के युवा नेताओं में नाराजगी की लहर दौड़ गयी और वे पार्टी राज्य मुख्यालय के सामने सड़क पर उतर आये, जिसके बाद तीन विधान परिषद सदस्यों समेत कई युवा नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया।

हाल में मुलायम द्वारा कौएद के सपा में विलय को बहाल किए जाने सम्बन्धी शिवपाल की घोषणा को अखिलेश की एक और पराजय के तौर पर देखा गया। पार्टी में अखिलेश के हिमायती गुट का आरोप है कि यह सब मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल करने और सपा में उनकी स्थिति कमजोर करने के लिये किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के पैरोकार समझे जाने वाले पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने पिछले दिनों सपा मुखिया को लिखे पत्र में कहा था कि मुलायम शिवपाल को निष्कासित युवा नेताओं को पार्टी में वापस लेने को कहें और विधानसभा चुनाव के टिकटों के बंटवारे में मुख्यमंत्री को भी अधिकार दें।

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First Published on October 21, 2016 7:35 pm

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