December 04, 2016

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नोटबंदी से भाजपा ने उठाया आत्मघाती कदम: सपा

अगर बड़े नोटों का चलन बंद कर दिया जाएगा तो लंबे समय तक रहने वाले उसके असर के कारण बाकी दल बैंक से पर्याप्त धन नहीं निकाल पाएंगे।

Author लखनऊ | November 28, 2016 04:42 am
500 के नोट देकर 2000 के नए नोट लेती महिला। (PTI File Photo)

देश में नोटबंदी को लेकर विपक्षी दलों के कड़े रुख के बीच उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) ने केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव में दूसरे दलों पर वित्तीय चोट करने के लिए विमुद्रीकरण का दांव खेलने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इससे बुरी तरह परेशान हुई जनता चुनाव में भाजपा का सफाया कर देगी। सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य किरणमय नंदा ने आरोप लगाया

कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में दूसरे दलों को वित्तीय चोट पहुंचाने के लिए 500 और हजार रुपए के नोटों का चलन बंद किया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए ‘जीवन-मरण’ का सवाल है। भाजपा ने सोचा कि अगर बड़े नोटों का चलन बंद कर दिया जाएगा तो लंबे समय तक रहने वाले उसके असर के कारण बाकी दल बैंक से पर्याप्त धन नहीं निकाल पाएंगे। भाजपा ने अपना इंतजाम करके यह कदम उठाया लेकिन उसकी यह होशियारी उसके गले की फांस बन जाएगी। नंदा ने कहा, ‘भाजपा को अंदाजा नहीं है कि उसने कितना आत्मघाती कदम उठाया है। जो जनता नोट बदलने और जमा करने के लिए बैंक और एटीएम के आगे लाइन में खड़ी है, वही जनता अगले विधानसभा चुनाव में इससे ज्यादा लंबी-लंबी लाइनें लगाकर भाजपा के खिलाफ वोट डालकर उसका सफाया करेगी।’ सपा राज्यसभा सदस्य ने कहा कि वे नोटबंदी के खिलाफ नहीं हैं लेकिन उसके प्रभावों से निपटने के लिए अपनाए गए तरीकों में नीतिनिर्धारकों की अनुभवहीनता खुलकर सामने आ गई है। इससे जनता को परेशानी हो रही है और सपा इसी के खिलाफ है।

नंदा ने तर्क दिया कि देश के हर पांच में से चार गांव बैंकिग सेवा से वंचित हैं। उन गांवों में रहने वाले गरीब लोग कर्ज के लिए महाजनों और अन्य धनवान लोगों पर निर्भर हैं। नोटबंदी से गांवों के घरों के चूल्हे ठंडे पड़े हैं। मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है। नकदी का प्रवाह थम जाने की वजह से हजारों लोगों की नौकरी छूट गई है। सरकार ने प्रचलन में रहे 86 फीसद नोटों को हटाने से पहले उनके बारे में नहीं सोचा।उन्होंने कहा कि भाजपा को इस बात का अंदाजा ही नहीं हो पा रहा है कि उसके कदम की मार आम जनता पर कहां-कहां तक पड़ रही है।

वित्त मंत्रालय रोज जिस तरह से नियम-कायदे बदल रहा है, उससे साबित होता है कि नोटबंदी के बाद की स्थिति से निपटने के लिए आधी अधूरी तैयारी की गई थी। मालूम हो कि नोटबंदी को लेकर सपा बहुत सधे हुए कदम उठा रही है और इसे किसानों, व्यापारियों और आम जनता की परेशानियों से जोड़कर मीडिया से लेकर संसद तक सरगर्म कर रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले गुरुवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करके नोटबंदी की वजह से लोगों को हो रही परेशानियों से अवगत कराया था।
नोटबंदी के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखने वाले मुख्यमंत्री बड़े करंसी नोटों का चलन बंद किए जाने के मामले को अपने लगभग हर कार्यक्रम में उठा रहे हैं और इस कदम के लिए केंद्र सरकार द्वारा बताई जा रही मंशा को लेकर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। अखिलेश का कहना है कि सरकार नोटबंदी के जरिए जिन ‘बड़े लोगों’ का कालाधन बाहर निकालने की बात कर रही है, वे तो बैंक और एटीएम की कतार में नहीं खड़े हैं। वे लोग तो कागजों पर भी काले धन को ‘ठिकाने’ लगा लेते हैं।

 

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First Published on November 28, 2016 4:42 am

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