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सहारनपुर विवाद: तो हिंसा रोकने में इसलिए नाकाम रही पुलिस? स्वीकृत किए गए थे 111 पुलिसकर्मी, मगर तैनात किए सिर्फ 22

शुक्रवार को शब्बीरपुर गांव में दो समूहों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गयी थी
Author May 8, 2017 11:25 am
शब्बीरपुर गांव में चौकसी करते पुलिसकर्मी (Express Photo)

सहारनपुर में बीते दिनों दलित और ठाकुरों के बीच हिंसा भड़क गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई व 25 घर आग के हवाले कर दिए गए। सहारनपुर पुलिस ने जब इस मामले की जांच को तो खुद उनके ही पुलिस स्टेशन की एक बड़ी खामी सामने आई। बडगांव पुलिस स्टेशन के अंतर्गत शब्बीरपुर समेत 52 गांव आते हैं और यह 2 लाख से ज्यादा जनसंख्या को कवर करता है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस पुलिस थाने को जितनी संख्या में पुलिस बल स्वीकृत किया गया है उसके 20 फीसदी ही यहां तैनात हैं। इस थाने को 111 पुलिसवाले स्वीकृत हैं लेकिन सिर्फ 22 ही यहां हैं।

शुक्रवार को हुई हिंसा के बाद जिला पुलिस लाइन तबादला किए गए बडगांव स्टेशन ऑफिसर महेंद्र पाल सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि SO के अलावा, स्टेशन के लिए स्वीकृत किए गए 87 कॉन्सटेबलों में से सिर्फ 17, स्वीकृत किए गए 17 हेड कॉन्सटेबलों में से सिर्फ एक और सात सब इंस्पेक्टर में से सिर्फ तीन तैनात हैं। रविवार को अन्य ऑफिसर को चार्ज सौंपने आए सिंह ने कहा, “इस 22 फीसदी में से 13 तो फील्ड में रहते हैं, जिसमें से एक मैं भी था। हमें 52 गांव कवर करने होते हैं। बाकी बचे हुए ऑफिस का काम संभालते हैं।”

सिंह ने कहा, “अगर मेरे पुलिस स्टेशन में स्वीकृत किए गए पुलिस बल में से आधी संख्या भी होती तो हिंसा नहीं फैलती। शुक्रवार को हम सिर्फ छह थे और वो लोग 2000 की तादात में थे।” SP (ग्रामीण इलाका) रफीक अहमद ने कहा कि लगभग हर पुलिस स्टेशन में पुलिस बल की कमी है। उन्होंने कहा, “ये बात सही है कि अगर पुलिस वालों की संख्या पर्याप्त होती तो यह घटना नहीं हो पाती।” गौरतलब है कि शुक्रवार को शब्बीरपुर गांव में  दो समूहों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गयी थी।

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