April 29, 2017

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‘राम मंदिर आंदोलन संघ ने नहीं चलाया, यह जनता और संत चलाते हैं’

तीन तलाक पर बोला संघ, लैंगिक आधार पर नहीं होना चाहिए अन्याय।

Author लखनऊ | October 28, 2016 19:12 pm
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कार्यकर्ता। (फाइल फोटो)

मुसलमानों में एक साथ तीन बार तलाक बोलने को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शुक्रवार (28 अक्टूबर) को कहा कि लैंगिक आधार पर अन्याय नहीं होना चाहिए। संघ के अवध प्रांत संघचालक प्रभुनारायण ने कहा, ‘मुस्लिम बहनों ने यह मामला उठाया है। संघ का मत है कि लैंगिक आधार पर अन्याय नहीं होना चाहिए। मुस्लिम बहनों के साथ न्याय होना चाहिए।’ संवाददाताओं ने तीन तलाक के बारे में उनकी राय पूछी थी। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर प्रभुनारायण ने कहा, ‘राम मंदिर आंदोलन संघ ने पहले भी नहीं चलाया और आगे भी नहीं चलाएगा। यह आंदोलन जनता और संत चलाते हैं। संत और जनता यदि आंदोलन चलाएंगे तो हम उनका साथ देंगे।’

प्रभुनारायण ने 23 से 25 अक्तूबर के बीच हैदराबाद के भाग्यनगर में हुई संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में पारित प्रस्तावों और चर्चा किए गए विषयों की जानकारी देने के लिए संवाददाता सम्मेलन बुलायी थी। जब सवाल किया गया कि क्या उत्तर प्रदेश के बारे में चर्चा हुई तो जवाब मिला, ‘हां, उत्तर प्रदेश में संगठन के कार्यों को लेकर चर्चा की गयी।’ फिर जब प्रदेश के राजनीतिक हालात के बारे में पूछा गया तो बोले, ‘नो कमेंट (टिप्पणी नहीं करूंगा)।’ उन्होंने बताया कि हैदराबाद बैठक में पारित एक प्रस्ताव में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा केरल में संघ के स्वयंसेवकों की हत्या और हिंसा का विरोध किया गया। उन्होंने कहा कि माकपा असहिष्णु और अधिनायकवादी मनोवृत्ति की है। अपनी विचारधारा के अलावा अन्य किसी विचारधारा को दोयम दर्जे का मानती है।

प्रभुनारायण ने माकपा पर प्रहार जारी रखते हुए कहा कि खुद को प्रगतिशील कहने वाली माकपा लोकतंत्र विरोधी आचरण करती है और उसकी मनोवृत्ति हिंसक है। वाम दलों से पलायन कर संघ में शामिल हो रहे गरीब और मछुआरों से माकपा को जलन हो रही है, इसी कारण उनकी हत्याएं कर रही है। उन्होंने बताया कि विश्व के समक्ष उभरती वर्तमान चुनौतियों मसलन वैश्विक ऊष्मीकरण (ग्लोबल वॉर्मिंग) और वैश्विक आतंकवाद को लेकर दूसरा प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें कहा गया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा शाश्वत भारतीय चिन्तन के आधार पर प्रतिपादित ‘एकात्म मानव दर्शन’ के अनुसरण से ही इन सबका समाधान संभव है। प्रभुनारायण ने बताया कि बैठक में सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, पारिवारिक मूल्यों एवं ग्राम विकास से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। दलितों की खराब स्थिति और दलितों को लेकर हो रही राजनीति के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि संघ का मानना है कि समाज में परस्पर सहभागिता हो, सदभाव हो और द्वेष का भाव ना हो। सामाजिक समरसता और सहजता लेकर चलने की जरूरत है।

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First Published on October 28, 2016 7:12 pm

  1. A
    Avinash
    Oct 28, 2016 at 3:49 pm
    सरासर झूठ बोल रहे हैं.
    Reply

    सबरंग