December 05, 2016

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यूपी चुनाव: साफ हैं संकेत, फिर भी नहीं मान रही बीजेपी जिताऊ नहीं रहा राम मंदिर का मुद्दा

साल 2012 के विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पहली बार अयोध्या विधान सभा सीट पर जीत हासिल की। इस सीट पर 1991 से ही लगातार बीजेपी जीतती आ रही थी।

Author October 18, 2016 19:15 pm
दशहरा कार्यक्रम के दौरान लखनऊ में तीर चलाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Source: Twitter/NarendraModi)

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधान सभा चुनाव होने वाले हैं और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को अभी से राम की सुध सताने लगी है। 11 अक्टूबर को राज्य की राजधानी में लखनऊ में एक दशहरा कार्यक्रम में शामिल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार मंच से “जय श्री राम” का नारा लगाया तो मंगलवार (18 अक्टूबर) केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री महेश शर्मा केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित रामायण संग्रहालय के लिए अयोध्या में चिह्नित भूखंड का निरीक्षण करने आए। शर्मा मंगलवार को रामजन्म भूमि के दर्शन करने भी गए और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं से भी मिले। जाहिर है कि यूपी के आगामी चुनाव में बीजेपी राम मंदिर को मुद्दा बनाने की कोशिश करती दिख रही है। लेकिन चुनावी भवसागर में पार्टी की नाव केवल राम मंदिर के मुद्दे से शायद ही पार हो सकेगी।

यूपी में हुए पिछले कई चुनावों के दौरान किए गए चुनावी सर्वेक्षणों की मानें तो राज्य के मतदाताओं ने राम मंदिर के मुद्दे को तरजीह देनी बंद कर दी है। साल 2009 के लोक चुनाव में राम मंदिर आंदोलन का चेहरा रहे लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। तब पार्टी को राज्य की कुल 80 सीटों में से केवल 10 पर जीत मिली थी। साल 2012 के विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पहली बार अयोध्या विधान सभा सीट पर जीत हासिल की। इस सीट पर 1991 से ही लगातार बीजेपी जीतती आ रही थी।

वीडियो:  यूपी की सियासत में राम मंदिर फिर बन सकता है मुद्दा- 

पिछले कई दशकों से विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने अयोध्या का काफी राजनीतिक इस्तेमाल किया है। लेकिन देसी पर्यटकों में सर्वाधिक लोकप्रिय शहरों में एक होने के बावजूद इसे शायद ही इसका कोई लाभ मिला हो। अयोध्या में हर साल एक करोड़ से भारतीय पर्यटक आते हैं फिर यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में जब बीजेपी समाजवादी पार्टी से अयोध्या और यूपी दोनों की सत्ता वापस पाने की कोशिश कर रही है तो उसे समझना होगा कि केवल राम मंदिर से बात नहीं बनेगी। केंद्र का रामायण संग्रहालय और राज्य सरकार का  अंतरराष्ट्रीय रामलीला थीम पार्क लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ा था लेकिन अब जाकर जिस तरह दोनों सरकारें इन्हें लेकर जागी हैं उससे साफ है कि अयोध्या को लेकर राजनीति तेज होने वाली है। कांग्रेस और बसपा ने दोनों दलों के फैसलों को यूपी चुनाव से जोड़कर देखा है।

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पिछले कुछ चुनावों में अपनाई गई बीजेपी की रणनीति पर गौर करें तो इस बात की काफी उम्मीद है कि पार्टी अयोध्या के विकास को भी प्रमुख मुद्दा बनाएगी। अयोध्या, मथुरा और काशी में विकास कार्य करने और गंगा की सफाई जैसे मुद्दे राम मंदिर जैसे भावनात्मक मुद्दे नहीं हैं लेकिन इनसे पार्टी की हिंदू अस्मिता की राजनीति के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि होगी।  बीजेपी आगामी विधान सभा चुनाव में हिंदू वोटरों को एकजुट करने की पूरी कोशिश करेगी। इस मुद्दे पर वो दूसरी पार्टियों से ज्यादा मजबूत स्थिति में है। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी पिछले महीने अयोध्या दौरे पर आए तो वो रामजन्मभूमि के दर्शन करने नहीं गए थे।

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यूपी की अखिलेश यादव कैबिनेट ने जब सोमवार को लाल बलुआ पत्थरों से  रामलीला थीम पार्क को बनवाने की घोषणा की बसपा प्रमुख मायावती ने बीजेपी और सपा के मंसूबों पर सवाल उठाया। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव इस थीम पार्क को बनवाकर खुद की सेक्युलर दावेदारी को मजबूत करना चाहते हैं। समाजवादी पार्टी में कुछ लोगों को मानना है कि अल्पसंख्यकों का प्रति ज्यादा झुकाव वाली पार्टी की छवि की वजह से उन्हें पिछले लोक सभा चुनाव में काफी नुकसान हुआ था। 1990 में अयोध्या में हुई कारसेवा के दौरान गोली चलवाने के कारण मुलायम सिंह यादव यूपी के मुसलमानों में काफी लोकप्रिय हो गए थे। लेकिन मोदी की लोकप्रियता के चलते सपा का हिंदू वोट बैंक दरकने लगा है जिसका नतीजा लोक सभा चुनाव में साफ दिखा। तब से ही अखिलेश हिंदू वोटरों की लेकर सतर्क हैं। अयोध्या के विधायक पवन पाण्डेय पहली  बार विधान सभा चुनाव जीते थे फिर अखिलेश ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया।

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First Published on October 18, 2016 7:15 pm

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