May 24, 2017

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रामलीला के मंच पर राजनीति

इस साल दशहरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के बजाए लखनऊ में रहेंगे

Author October 11, 2016 03:39 am
विज्ञान भवन में भाषण देते पीएम नरेन्द्र मोदी। (Photo-ANI)

परंपरा को तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल दशहरे के दिन दिल्ली के बजाए लखनऊ में रहेंगे। उनके इस कदम को भले ही अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है, लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इसे अस्वाभाविक नहीं मानते। पिछले दिनों इस बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि वे देश के प्रधानमंत्री हैं और उत्तर प्रदेश के सांसद भी। इसे अलग नजरिए से नहीं देखा जा सकता है। सालों तक दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान की रामलीला से जुड़े रहे और पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी को न्योता देने के सवाल समेत कई मुद्दों पर मतभेद होने के बाद इससे अलग हुए पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल इसे गंभीर बात नहीं मानते हैं। वे रामलीला कमेटी से अलग होने को निजी मामला बताते हुए कहते हैं कि यह सही है कि दिल्ली की रामलीलाओं में आजादी के समय से ही देश के बड़े नेता आते रहे हैं, लेकिन कौन किस रामलीला में जाएगा यह उसका निजी फैसला है। पिछली बार प्रधानमंत्री किसी भी रामलीला में नहीं गए थे। इसीलिए दिल्ली के बजाए लखनऊ की रामलीला में उनका जाना अस्वाभाविक माना जा रहा है।

दिल्ली में रामलीला की परंपरा मुगल काल से ही रही है और यहां की संस्कृति का अंग बन चुकी है। दिल्ली में पिछले तीन दशकों में बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बंगाल और पूर्वोत्तर की बड़ी आबादी आने के बाद रामलीला के साथ-साथ दुर्गा पूजा भी बड़े पैमाने पर होने लगी है। रामलीला को शुरू से ही दिल्ली की पहचान माना जाता है, लेकिन दुर्गा पूजा को अपनाने में दिल्ली को काफी समय लगा है। वैसे दावा तो यही किया जाता है कि राजधानी के चितरंजन पार्क इलाके में सबसे ज्यादा बंगाली आबादी रहती है इसलिए ज्यादा प्रचलित दुर्गा पूजा वहीं की रही है, लेकिन दिल्ली के पुराने इलाकों-गोल मार्केट, करोल बाग और पुरानी दिल्ली में भी काफी समय से पूजा होती रही है। आज तो स्थिति ऐसी है कि यह तय करना कठिन है कि दिल्ली में रामलीला ज्यादा होती है या दुर्गा पूजा।

कांग्रेस के नेता और लालकिला मैदान के नव श्री धार्मिक लीला कमेटी से जुड़े बृज मोहन शर्मा बताते हैं कि दिल्ली में रामलीला का इतिहास मुगल काल से शुरू होता है। आज जहां तीस हजारी कोर्ट है पहले वहां रामलीला होती थी। फिर आयोजकों में से एक गुट अलग होकर चांदनी चौक के जुबली सिनेमा के पास गांधी मैदान में लीला आयोजित करने लगा।रामलीला के आयोजन की बड़ी खासियत यह है कि इसके आयोजक हर दल के लोग होते हैं। चूकि रामलीला दिल्ली की संस्कृति से जुड़ी हुई है इसलिए हर दल के बड़े नेताओं में लीला में आने की होड़ लगती है। आयोजक भी यही चाहते हैं कि रोजाना लीला में कोई बड़ी हस्ती (राजनेता के अलावा फिल्मी कलाकार, खिलाड़ी आदि) शामिल हो और दशहरे के दिन भी रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का दहन भी कोई नामचीन व्यक्ति ही करे।

जय प्रकाश अग्रवाल कहते हैं कि कई ऐसे प्रधानमंत्री ऐसे हुए जो रामलीला में नहीं गए, लेकिन गांधी परिवार के ज्यादातर नेता आयोजनों में शामिल होते रहे हैं। इस बार दशहरे पर मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी लाल किले की धार्मिक लीला कमेटी में रहेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई नेता भी दशहरे के दिन कई लीलाओं में मौजूद रहेंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी आज ही लव कुश रामलीला में जाने वाले हैं। इसके अलावा अनेक मंत्री, नेता, अभिनेता अनेक कमेटियों में जाते रहे हैं। अशोक विहार फेज-2 की रामलीला कमेटी के प्रमुख और दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मांगेराम गर्ग ने बताया कि उनकी लीला में अनेक केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता आ चुके हैं। मंगलवार को भी कई नेता आने वाले हैं।रामलीला के आयोजन से जुड़े सभी नेता मानते हैं कि उनका प्रयास लीला को राजनीति से अलग रखना है, लेकिन व्यवहार में ऐसा होता नहीं है।
जयप्रकाश अग्रवाल के मुताबिक, सभी नेताओं को यह आजादी होनी चाहिए कि वे कहां जाएं।

पीवी नरसिंह राव, वीपी सिंह, देवेगौड़ा जैसे कई प्रधानमंत्री किसी रामलीला में नहीं गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछली बार नहीं आए और इस बार वे दिल्ली के बजाए लखनऊ की रामलीला में शामिल हो रहे हैं। अग्रवाल इसे ज्यादा राजनीतिक मुद्दा नहीं मानते, लेकिन अन्य नेता ऐसा जरूर मानते हैं। बृजमोहन शर्मा कहते हैं कि संभव है कि प्रधानमंत्री को लखनऊ जाने में राजनीतिक लाभ ज्यादा दिखा हो। वैसे दिल्ली में जिस तरह रामलीला और दुर्गा पूजा में लोगों की भागीदारी दिख रही है उससे तो यही लग रहा है कि जो नेता इसमें शामिल नहीं होगा, राजनीतिक नुकसान उसका ही ज्यादा होगा। समय के साथ पूजा और रामलीलाओं की संख्या बढ़ गई है। साथ ही इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या भी। दिल्ली में वैसे तो अब कई त्योहारों में खूब रौनक दिखाई देती है, लेकिन रामलीला और दुर्गा पूजा उसमें अव्वल होता जा रही है।

 

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First Published on October 11, 2016 3:39 am

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