December 02, 2016

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यूपी के जेलों में हर 26 घंटे में होती है एक कैदी की मौत

RTI के तहत दाखिल की गई याचिका के जवाब में बताया गया कि जनवरी 2010 से फरवरी 2016 तक 2,062 कैदियों की मौत हो चुकी है।

जेल सुरक्षा के संबंध में दाखिल RTI याचिका में ये आंकड़े सामने आए हैं।

उत्तर प्रदेश में औसतन हर 26 मिनट में एक कैदी की मौत होती है। राज्य जेल विभाग ने एक RTI एप्लीकेशन का जवाब देते हुए बताया कि साल 2010 से अब तक 2,050 कैदियों की मौत हो चुकी है। मानवाधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस ने इस मामले में राज्य जेल विभाग में RTI दाखिल किया था। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और पीएमओ को इस मामले कार्रवाई करने के लिए भी लिखा। RTI के तहत दाखिल की गई याचिका के जवाब में बताया गया कि जनवरी 2010 से फरवरी 2016 तक 2,062 कैदियों की मौत हो चुकी है। औसतन देखा जाए तो 74 महीनों में इतने कैदियों की मौत हुई है। इनमें 50% को अभी सजा भी नहीं सुनाई गई थी। 2010 से 2015 के बीच 44 कैदियों ने खुदकुशी कर ली है। जबकि 24 की मौत पुलिस की हिरासत में हुई है। आरोप यह भी है कि इनका मर्डर किया गया है।

भारत में जेल प्रशासन और जेल सुरक्षा को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। कुछ समय पहले दिल्ली की तिहाड़ जेल में निर्भया मामले सजा काट रहे दोषी राम सिंह ने भी आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद तिहाड़ जेल की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। इनमें से कुछ मामले में मौत का कारण उम्र भी है। उत्तर प्रदेश में जेल के अंदर मेडिकल सुविधाओं का अभाव है। पारस बताते हैं कि जेल प्रशासन को कैदियों के अधिकारों की कोई चिंता नहीं है। पुलिसकर्मियों का व्यवहार कैदियों को खुदकुशी करने पर मजबूर करता है। जेल में खुदकुशी की घटनाएं अब अक्सर सामने आती हैं। साल 2010 में 322 कैदियों की मौत हुई थी। इनमें से आधे दर्जन कैदियों ने खुद को खत्म कर लिया था जबकि एक की मौत पुलिस की हिरासत में हुई थी और 6 की हत्या की गई थी। इनमें से एक कैदी पाकिस्तान का भी था।

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First Published on October 17, 2016 10:17 am

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