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किरन रिजीजू बोले- ब्रिटिश दासता के कारण कुछ लोग घर में भी अंग्रेजी बोलते हैं

केंद्रीय गृह राज्‍यमंत्री किरन रिजीजू ने शुक्रवार को अंग्रेजी मीडिया की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी मानसिकता में गड़बड़ी है और वे भारत की मातृ भाषा को आगे नहीं बढ़ना देना चाहते।
गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू (फाइल फोटो)

केंद्रीय गृह राज्‍यमंत्री किरन रिजीजू ने शुक्रवार को अंग्रेजी मीडिया की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी मानसिकता में गड़बड़ी है और वे भारत की मातृ भाषा को आगे नहीं बढ़ना देना चाहते। रिजीजू ने आगरा में राज्‍य भाषा सम्‍मेलन में लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ”हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है जो सभी भारतीय राज्‍यों में समझी जाती है और केवल सरकारी बोलचाल तक सीमित नहीं है।” उन्‍होंने कहा कि 200 साल की ब्रिटिश दासता ने कुछ लोगों की ऐसी हालत कर दी है कि वे घर में भी अंग्रेजी ही बोलते हैं।

रिजीजू ने कहा कि अंग्रेजी की सनक छोड़नी होगी। वे बोले, ”हिंदी को जिस ऊंचाई पर होना चाहिए वहां तक पहुंचाने के लिए बड़े स्‍तर के आंदोलन की जरुरत है। यह आंदोलन किसी क्षेत्रीय भाषा के खिलाफ नहीं है। लेकिन हिंदी हमारी मातृभाषा है और भारतीय संस्‍कृति के मूल्‍य इसमें शामिल हैं।” उन्‍होंने कहा कि हिंदी का प्रचार करना और इसे फैलाना प्रत्‍येक भारतीय की संवैधानिक जिम्‍मेदारी है। हालांकि देश की प्रत्‍येक और सभी भाषाएं समान महत्‍व रखती हैं।

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इस दौरान रिजीजू ने 1987 में सोवियत संघ की यात्रा का किस्‍सा सुनाया। इसमें उनके साथ आगरा यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर सहित कई लोग थे। एक रूसी ट्रांसलेटर की सुविधा उन्‍हें मुहैया कराई गई ताकि वे लोग हिंदी बोल सके लेकिन प्रोफेसर अंग्रेजी में बोल रहे थे। रिजीजू ने उस प्रोफेसर से कहा कि जब एक रूसी लड़की हिंदी सीख सकती है तो वे अपनी मातृ भाषा क्‍यों नहीं बोल सकते। इसके बाद उन प्रोफेसर ने अंग्रेजी में बात नहीं की।

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