ताज़ा खबर
 

किंग जॉर्ज: इतनी खामियां? आग तो लगनी ही थी…

आखिर वो कौन से ऐसे कारण थे, जिनसे लखनऊ के प्रख्यात किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ट्रॉमा सेंटर में भीषण आग लगी?
Author लखनऊ | July 20, 2017 05:25 am
प्रतिकात्मक तस्वीर

आखिर वो कौन से ऐसे कारण थे, जिनसे लखनऊ के प्रख्यात किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ट्रॉमा सेंटर में भीषण आग लगी? इस बात का खुलासा मामले की जांच कर रहे लखनऊ के मंडलायुक्त की रिपोर्ट करती है। मंडलायुक्त अनिल गर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक तमाम चेतावनियों के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की। इसी ने उस अग्निकांड को जन्म दिया जिसमें आधा दर्जन मरीजों को दूसरे अस्पताल ले जाने के दरम्यान अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।  केजीएमयू में हुए अग्निकांड के बाद मंडलायुक्त और जिलाधिकारी लखनऊ के नेतृत्व में गठित टीम ने शासन को पूरे मामले की रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि केजीएमयू प्रशासन ने अस्पताल में लगे अग्निरोधक प्रणाली कभी जांच ही नहीं की। लिहाजा उन्हें इस बात का इल्म ही नहीं हुआ कि अस्पताल में लगे आग बुझाने के उपकरण काम ही नहीं कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी को सौंपी रिपोर्ट में केजीएमयू को आग प्रतिरोधी बनाने के कई सुझाव दिए गए हैं। जांच दल की इन संस्तुतियों के बाद योगी प्रशासन ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि वे 31 जुलाई तक अग्निशमन विभाग का एनओसी लें।

क्या कहते हैं तीमारदार
किंग जॉर्ज में लगी आग में घायल हुए सीतापुर निवासी रामनरेश के परिजन कहते हैं, सुबह से शाम तक ट्रॉमा सेंटर में लखनऊ व उसके आसपास के जिलों से मरीजों का आना लगा रहा है। उसके बाद भी न ही अस्पताल के पास उचित संख्या में स्ट्रेचर हैं और न ही मरीजों को ले जाने में कर्मचारी तत्परता दिखाते हैं।
कब-कब लगी आग :
-30 मार्च 2016 को झलकारी बाई अस्पताल के एसएनआईसीयू में आग लगी।
-10 जनवरी 2011 को बलरामपुर अस्पताल के प्रशासनिक भवन में आग लगी।
-29 दिसंबर 2010 को डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की लांड्री में आग लगी।
8 नवंबर 2016 को सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में शॉर्ट सर्किट हुआ।
-कई मर्तबा लखनऊ के संजय गांधी आयुर्वेदिक संस्थान में भी आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।
ये हैं सुझाव

’जांच कमेटी ने शासन को भेजी सिफारिशों में कहा है कि ट्रॉमा सेंटर में आवश्यक दवाओं के अलावा अन्य सामग्री संग्रहित नहीं की जाएं।
’प्रवेश और निकास द्वार हमेशा भीड़ मुक्त हों।
’ट्रॉमा सेंटर में अग्नि प्रतिरोधक प्रणाली को पूरी तरह हाईटेक बनाया जाए।
’सेंसर युक्त स्मोक सिस्टम लगाया जाए, ताकि धुआं उठते ही आग पर काबू पाया जा सके।

-अस्पताल कर्मचारियों को वहां लगे अग्निरोधक उपकरणों को चलाने का प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि आग लगने की स्थिति में अग्निशमन दल के पहुंचने के पूर्व कर्मचारी आग काबू करने की कार्रवाई शुरू कर सकें।
-ऊपर की मंजिलों में लगी खिड़कियों में लोहे की जालियां न लगाई जाएं।
– ट्रॉमा सहित अन्य अस्पतालों में बाहर की तरफ रैंप निकाले जाएं।
-प्रत्येक माह अस्पतालों में मॉक ड्रिल हो ताकि इस बात का इत्मीनान किया जा सके कि वहां लगे उपकरण काम कर रहे हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग