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ISIS इस्लाम विरोधी, मदीने में बम धमाके करने वाले मुसलमान नहीं हो सकते: मौलाना फरंगीमहली

जिस व्यक्ति के अंदर इस्लाम से थोड़ी भी मोहब्बत होगी वह कभी भी रमजान जैसे पवित्र महीने में इस प्रकार के इस्लाम विरोधी कार्य को अंजाम नहीं दे सकता।
Author लखनऊ | July 7, 2016 19:56 pm
मौलाना राशिद अली फरंगीमहली।

बांग्लादेश में हुए आतंकी हमलोें की निंदा करते हुए राजधानी के ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना राशिद अली फरंगीमहली ने आईएसआईएस को इस्लाम विरोधी करार देते हुए आज यहां कहा कि ऐसे संगठनों से जुडे लोगों को मुसलमान नहीं कहा जा सकता। ईदगाह में आज ईद-उल-फितर की नमाज के बाद अपने ह्णखुतबेह्ण में मौलाना फरंगीमहली ने ढाका और मदीने में हुए आतंकवादी हमले की कठोर शब्दों में निन्दा करते हुए कहा, जिस व्यक्ति के अंदर इस्लाम से थोड़ी भी मोहब्बत होगी वह कभी भी रमजान जैसे पवित्र महीने में इस प्रकार के इस्लाम विरोधी कार्य को अंजाम नहीं दे सकता।

उन्होंने कहा, इस्लाम में मक्का व मदीना सबसे ज्यादा पवित्र स्थल हैं। कोई भी बुरा से बुरा मुसलमान भी इन स्थलों पर ऐसी घिनौनी हरकत नहीं कर सकता। इसलिए मदीने में हुए बम धमाके करने वाले मुसलमान नहीं हो सकते। मौलाना ने आईएसआईएस को इस्लाम विरोधी संगठन घोषित करते हुए संयुक्त राष्ट्र से उसके पीछे चल रहे षड़यंत्र को उजागर करने की अपील की।

मौलाना ने कहा कि कुछ साम्प्रदायिक नेता मुसलमानों के खिलाफ जहर उगल रहे है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे संगठनों से जुडे लोग मुसलमान नहीं हो सकते। मौलाना फरंगीमहली ने कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड का मसला बार बार उठाना अवाम को बुनियादी मसलों से उनका जहन हटाने की एक साजिश है, क्योंकि हकीकत यह है कि हमारे देश हिन्दुस्तान में यूनिफार्म सिविल कोड जमीनी स्तर पर लागू किया ही नहीं जा सकता।
उन्होंने मुसलमानों से मुस्लिम पर्सलन लॉ पर पूरी तरह अमल करने पर जोर देते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सलन लॉ की बुनियाद कुरान व हदीस हैंै और इसमें किसी किस्म की तबदीली करना मुमकिन नहीं है।

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