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गोरखपुर में मौत का भयावह मंजर: 10 दिन के बेटे की जान बचाने के लिए लेने गया था खून, वापस लौटा तो आंखों पर नहीं हुआ यकीन

रिपोर्ट के मुताबिक बहुत से पैरेंट्स का कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें उनके बीमार बच्चे से मिलने की इजाजत नहीं दी और तो और उनके साथ बदसलूकी की गई।
गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में मृत बच्चे का शव लिए परिजन। (Photo Source: Express photo by K Sangam)

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अपने बच्चों की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन अपनी आपबीती बताते हुए भावुक हो जाते हैं। दीप चंद नाम एक शख्स ने बताया कि उसका 10 दिन का बेटा अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में भर्ती है। वह बाहर दवा लेने गया था। दवा लेकर आधे घंटे बाद लौटा तो पता चले कि उसके बच्चे की मौत हो गई है। दीप चंद उन लोगों में जिन्होंने सरकारी अस्पताल में अपने बच्चों को खोने का दर्द झेला है। कथित तौर पर बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई है। पिछले सात दिनों में 63 बच्चों की मौत हुई। हालांकि सरकार ने ऑक्सीजन की कमी से इनकार कर दिया।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 7 साल की मृतक बच्ची की मां ने बताया कि सुबह से ही हम सुन रहे थे कि ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौत हो रही है, लेकिन हमें नहीं पता था कि हम भी अपना बच्चा खो दिया है। बच्चों की मौत के लिए डॉक्टरों के अलावा कोई भी ज़िम्मेदार नहीं है। बच्ची को उलटी और तेज बुखार के कारण मंगलवार को भर्ती कराया गया था। बेटे को खाने के बाद से दीप चंद गहरे सदमे में हैं। उन्होंने बताया, “जब मैं खून की बोतल और दवा लेकर वापस आया तो अपने बेटे को मृत पाया। डॉक्टरों ने आसानी से कह दिया कि मेरा बेटा नहीं रहा। मैं समझ नहीं पाया कि मेरा बेटा इतनी जल्दी कैसे मर गया।

रिपोर्ट के मुताबिक बहुत से पैरेंट्स का कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें उनके बीमार बच्चे से मिलने की इजाजत नहीं दी और तो और उनके साथ बदसलूकी की गई। मृत्युंजय नाम शख्स ने कहा कि यहां तक कि जब उन्होंने अपने बच्चे से मिलने की कोशिश की तो डॉक्टरों ने उन्हें (मरीजों) थप्पड़ भी मारा। इसे जांचने के लिए सीसीटीवी रिकॉर्डिंग निकलवाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि 90 फीसदी दवा बाहर से लेनी पड़ती है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के गढ़ गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से हुई मौत का आंकड़ा बढ़कर 63 हो गया है। आज (12 अगस्त को) भी 11 साल के एक बच्चे ने दम तोड़ दिया। वह भी इन्सेफ्लाइटिस से पीड़ित था।

 

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  1. V
    VIJAY LODHA
    Aug 12, 2017 at 2:09 pm
    उन लोगों का सामना कैसे करेंगे आप, जिनके बच्चे इस घोर चिकित्स्कीय लापरवाही से उपजे हादसे से मारे गए.इस पर लीपा-पोती करना छोड़कर, नैतिक जिम्मेदारी समझी जाये. वरना 'सबका साथ-सबका विकास' जैसे दिए गए खुद के नारे बेमानी हो जायेंगे.
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