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योगी कैबिनेट की पहली बैठक आज, अहम फैसले होंगे

सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल की पहली बैठक में किसानों की कर्जमाफी के साथ-साथ अवैध बूचड़खानों के विनियमन, मांस कारोबारियों के लाइसेंस से जुड़े मुद्दों, बुंदेलखंड को और मदद देने के उपायों, पूर्वांचल की समस्याओं को लेकर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं।
Author लखनऊ | April 4, 2017 12:39 pm
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ। (File Photo)

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल की पहली बैठक मंगलवार शाम को होगी। इसमें किसानों की कर्जमाफी समेत कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल की पहली बैठक में किसानों की कर्जमाफी के साथ-साथ अवैध बूचड़खानों के विनियमन, मांस कारोबारियों के लाइसेंस से जुड़े मुद्दों, बुंदेलखंड को और मदद देने के उपायों, पूर्वांचल की समस्याओं को लेकर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रियों ने गत 19 मार्च को शपथ ली थी। मौजूदा सरकार की मंत्रिमंडल की पहली बैठक 16वें दिन होगी। इस विलंब का एक कारण किसानों की कर्जमाफी का चुनावी वादा भी माना जा रहा है।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के कारण राज्य पर सालाना लगभग 25 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ने के बीच किसानों की कर्जमाफी में केंद्र द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार की मदद से इनकार किए जाने से मुश्किल और बढ़ गई है। हालांकि, प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही समेत तमाम मंत्री किसानों की कर्जमाफी के वादे पर जल्द से जल्द अमल की बात कह रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि मौजूदा सूरतेहाल में सरकार को अपना यह वादा पूरा करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी है। भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में इसका वादा किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हर चुनावी सभा में जनता को भरोसा दिलाया था कि प्रदेश में पार्टी की सरकार बनने के बाद कैबिनेट की पहली ही बैठक में प्रदेश का सांसद होने के नाते वे किसानों का कर्ज माफ करवाएंगे।

वित्त विभाग के एक प्रवक्ता के अनुसार भाजपा के ‘लोक कल्याण संकल्प पत्र-2017’ में ऐसी अनेक प्रतिबद्धताएं हैं जिन्हें पूरा करने के लिए सरकार को काफी वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा। लिहाजा सरकार को अपने चुनावी वादों को अमली जामा पहनाने में आगे भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मालूम हो कि प्रदेश में दो करोड़ से ज्यादा लघु व सीमांत किसान हैं, जिन पर करीब 62 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है।प्रवक्ता के मुताबिक किसानों की कर्जमाफी के फलस्वरूप माफ की गई धनराशि का भुगतान बैंकों को राज्य सरकार करेगी। इसके लिए अतिरिक्त कर्ज की आवश्यकता के मद्देनजर राज्य सरकार केंद्र से अतिरिक्त ऋण के लिए किए जाने वाले बंध पत्रों की धनराशि व उस पर लगने वाले ब्याज को एफआरबीएम एक्ट के अंतर्गत निर्धारित कर्ज सीमा से बाहर रखने का अनुरोध करेगी। प्रदेश में इस वक्त लगभग दो करोड़ 30 लाख किसान हैं। प्रदेश में लघु व सीमांत कृषकों की कुल संख्या 2.15 करोड़ है। प्रदेश में 2013-14 के रबी मौसम से 2015-16 के रबी मौसम तक लगातार दैवीय आपदाओं के कारण फसलों का उत्पादन व उत्पादकता अत्यधिक प्रभावित रही है। इस कारण प्रदेश के विशेषकर लघु व सीमांत कृषकों की आर्थिक दशा गंभीर हो गई है।

 

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