December 04, 2016

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दीवाली 2016: बाजार में मिल रहे हैं यादव परिवार के पटाखे

पटाखों पर लगे लेबल से यादव परिवार की कलह की कहानी साफ बयां हो रही है। अमर सिंह की फुलझड़ी का ताल्लुक अखिलेश, मुलायम, राम गोपाल और शिवपाल से है।

यूपी के इलाहाबाद में बिकते यादव परिवार के पटाखे।

बेशक उत्तर प्रदेश के यादव परिवार में फिलहाल शांति का माहौल हो लेकिन इससे पटाखों के बजार पर इसका असर कम नहीं पड़ जाता। यूपी के इलाहाबाद जिले में आपको अमर सिंह फुलझड़ी और राम गोपाल वर्मा की मिर्ची बम दीवाली को मौके पर बाजार में मिल रहे हैं। पटाखों पर लगे लेबल से यादव परिवार की कलह की कहानी साफ बयां हो रही है। अमर सिंह की फुलझड़ी का ताल्लुक अखिलेश, मुलायम, राम गोपाल और शिवपाल से है। लेकिन फोटो से साफ पता चला रहा है कि आखिर में फायदा किसका होगा। समाजवादी टैग वार नाम से भी पटाखे बिक रहे हैं। इसमें एक तरफ मुलायम और शिवपाल हैं तो दूसरी तरफ अखिलेश और राम गोपाल नजर आ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि बाजार में केवल यादव परिवार के पटाखे मौजूद हैं। यहां आपको मोदी का बम और सर्जिकल स्ट्राइक का रॉकेट भी मिलेगा। एंग्लो बंगाली कॉलेज में पटाखे बेचने वाले कादिर भाई का कहना है कि इन पटाखों को लोगों की मांग के आधार पर डिजायन किया गया है।

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इलाहाबाद के निवासी संजय कुमार ने कहा कि स्थानीय लोग राजनीतिक दिवाली का आंनद उठा रही है। इनकी मदद से पटाखे जलाने का मजा दोगुना हो जाता है। परिवार का हर सदस्य अपने राजनीतिक टेस्ट के अनुसार मनपसंद पटाखे को जला सकता है। वहीं होल सेलर के अनुसार इस साल चाइनीज पटाखों में भारी कमी दर्ज की गई है।

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बता दें कि समाजवादी पार्टी से निष्‍काषित नेता और मुलायम सिंह यादव के भाई, रामगोपाल यादव ने उप चुनाव आयुक्‍त से मुलाकात की है। बैठक में उन्‍होंने एक राजनैतिक पार्टी को रजिस्‍टर कराने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली है। रामगोपाल के इस कदम से समाजवादी पार्टी के सिपहसालारों की परेशानी बढ़ गई है। रेडिफ डॉट कॉम के अनुसार, मुलायम सिंह यादव के खेमे, खासतौर से अमर सिंह ने तुरंत चुनाव आयोग में अपने सूत्रों से संपर्क कर रामगोपाल की मुलाकात की वजहें पता करने की कोशिश की। राजनैतिक पार्टी रजिस्‍टर कराने में कानूनी पेचदगियों को समझने के लिए रामगोपाल अपने साथ सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्‍ठ वकील को साथ लेकर गए थे। समाजवादी पार्टी गहरे पारिवारिक संकट के दाैर से गुजार रही है, जिसके चलते यूपी के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव और पिता मुलायम सिंह यादव अलग-अलग छोर पर खड़े हैं। पार्टी के भीतर इस बात पर लोग बंटे हुए हैं कि क्‍या इस कदम के पीछे अखिलेश यादव हैं या रामगोपाल यादव नई पार्टी बनाने की कवायद में जुटे हैं। मुलायम सिंह की दूसरी पत्‍नी साधना गुप्‍ता के प्रभाव और राजनैतिक दखल के विरोध में रामगोपाल आगे आए थे। दिल्‍ली के राजनैतिक हलकों में चर्चा है कि जल्‍द ही अख‍िलेश की राजनैतिक पार्टी लॉन्‍च की जाएगी। रविवार को मुलायम ने अखिलेश का समर्थन कर रहे रामगाेपाल को छह साल के लिए पार्टी से निष्‍कासित कर दिया था।

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First Published on October 27, 2016 3:56 pm

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