May 23, 2017

ताज़ा खबर

 

उत्तर प्रदेश में अवैध खनन की सीबीआइ जांच पर रोक

हाई कोर्ट के सीबीआइ जांच के आदेश के फैसले से फत्तर प्रदेश में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है और खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को बर्खास्त कर दिया गया था।

Author नई दिल्ली | October 11, 2016 03:02 am
कोयला खदान में काम करता मज़दूर। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गैरकानूनी तरीके से चल रही खनन गतिविधियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो को जांच का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यह आदेश समुचित तरीके से सोच विचार या जांच ब्यूरो की प्रारंंभिक रिपोर्ट के अवलोकन के बगैर ही दिया गया है। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सीबीआइ को इस प्रकरण में आपराधिक मामले दर्ज करने का निर्देश देने और इनकी जांच जारी रखने का निर्देश देने तक हाई कोर्ट के आदेश पर रोक रहेगी।

इसके साथ ही पीठ ने कहा कि हम स्पष्ट करते हैं कि यह आदेश सीबीआइ द्वारा सीलबंद लिफाफे में पेश प्रारंभिक जांच रिपोर्ट की जांच पड़ताल और राज्य सरकार का पक्ष सुनने और इस पर सही तरीके से विचार के बाद उचित आदेश देने से हाई कोर्ट को नहीं रोकता।बताते चलें कि हाई कोर्ट के सीबीआइ जांच के आदेश के फैसले से फत्तर प्रदेश में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है और खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को बर्खास्त कर दिया गया था। तब माना गया था कि यह बर्खास्तगी हाई कोर्ट के आदेश के आलोक में की गई है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल दीवान का तर्क था कि हाई कोर्ट ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर विचार किए बगैर ही यह आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने सही तरीके से विचार के बगैर ही ऐसा किया क्योंकि राज्य में गैरकानूनी खनन के बारे में कोई स्पष्ट आरोप नहीं था, इसलिए जांच ब्यूरो को इस मामले में जांच से रोका जाना चाहिए।

सोनू कुमार और अन्य की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हाई कोर्ट ने एकदम सही आदेश दिया है क्योंकि राज्य सरकार के अधिकारियों की सांठगांठ से प्रदेश में गैरकानूनी तरीके से खनन गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गैरकानूनी खनन गतिविधियां रोकने के लिए जिम्मेदार प्राधिकारी ही राज्य में इसकी सुविधा मुहैया करा रहे हैं।
भूषण ने कहा कि राज्य में मई, 2012 के बाद कई खनन पट्टों की अवधि ‘गैरकानूनी तरीके से बढ़ा’ दी गई है। भूषण के इस आरोप पर पीठ ने जानना चाहा कि क्या हाई कोर्ट ने जांच ब्यूरो की प्रारंभिक रिपोर्ट का अवलोकन किया था। यदि ऐसा करने के बाद आपराधिक मामले दर्ज करने का आदेश दिया गया होता तो एक अलग स्थिति होती। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट ने तो सीलबंद लिफाफे में पेश सीबीआइ की रिपोर्ट खोली तक नहीं। इसलिए यह आदेश बगैर सोचविचार के पारित किया गया।

हाई कोर्ट ने नौ सितंबर को उत्तर प्रदेश सरकार की वह अर्जी अस्वीकार कर दी थी जिसमें 28 जुलाई का आदेश वापस लेने का अनुरोध किया गया था। इसी आदेश के तहत जांच ब्यूरो को राज्य में गैरकानूनी खनन के आरोपों की जांच का आदेश दिया गया था। अदालत ने 28 जुलाई के आदेश में सीबीआइ को छह हफ्ते के भीतर सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। यही नहीं, अदालत ने राज्य सरकार के प्रमुख सचिव (खनन) द्वारा हलफनामे में दिए गए स्पष्टीकरण पर भी असंतोष व्यक्त किया था। प्रमुख सचिव का कहना था कि राज्य में गैरकानूनी खनन गतिविधियों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है लेकिन अदालत ने इसे ‘आंख में धूल झोंकने’ वाला बताया था।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 11, 2016 3:02 am

  1. No Comments.

सबरंग