December 09, 2016

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काला धन रखने वाले PWD इंजीनियर ने कहा- ”सरकारी नौकरी में रिश्‍वत लेना हराम नहीं”

इंजीनियर ने कहा कि वह जो रिश्‍वत लेता है, वह पहले से प्रोजेक्‍ट्स के इस्‍टीमेट्स में कमीशन के तौर पर लिखी होती है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

देशभर में 500, 1000 के नोट बंद होने के बाद काले धन पर कुछ हद तक लगाम लगने की बात हो रही है। मगर काला धन रखने वाले लोग इससे बेखौफ नजर आते हैं। 8 नवंबर को जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुराने बड़े नोट बंद होने का ऐलान कर रहे थे, उत्‍तर प्रदेश के पीडब्‍ल्‍यूडी में काम करने वाले एक इंजीनियर ध्‍यान लगाए बैठे थे। अपने बेडरूम में स्‍टील के बक्‍से में 48 लाख रुपए छिपाकर रखने वाले इंजीनियर से समाचार एजंसी एपी से पहचान गुप्‍त रखने की शर्त पर बात की है। उसने कहा, ”ऐलान के बाद कुछ मिनट तक मैं कुछ समझ नहीं सका।” उसने बताया कि उसके और उसके सहकर्मियों के पास घूसखोरी और पब्लिक कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स से कमाई गई भारी रकम है। रिश्‍वतखोरी भारत में बिजनेस करने के लिए जरूरी है। हालांकि सरकार के फैसले के बाद उन्‍हें लगता है क‍ि उनके साथ धोखा हुआ है। एजंसी के मुताबिक, इंजीनियर ने कहा, ”सरकारी नौकरी में रिश्‍वत लेना हराम नहीं है।”

बंद की गई करंसी को बैंक में जमा किया जा सकता है लेकिन उनका इस्‍तेमाल फिलहाल सीमित किया गया है। सरकार ने कहा है कि वह उनपर कड़ी कार्रवाई करेगी जिनके द्वारा जमा की गई रकम उनकी आय से मेल नहीं खाती। अगले दो महीनों में ढ़ाई लाख रुपए से ज्‍यादा रकम जमा करने वाले हर शख्‍स की जांच की जाएगी। फोन पर दोस्‍तों से बात करते हुए इंजीनियर ने कहा, ”मैंने उनकी आवाज में तड़प महसूस की। मुझे पता था कि उनके पास भी ब्‍लैक मनी है। उसके अनुसार, ”कमीशन के तौर पर ज्‍यादा पैसा लेना जरूरी है ताकि किसी क्षेत्र में संभावित भुगतान किए जा सकें। लखनऊ स्थित अपने घर में मजे से व्हिस्‍की की चुस्कियां लेते हुए इंजीनियर बताता है कि हर त्‍योहारी सीजन में वह अपने वरिष्‍ठों, यहां तक कि उनके बच्‍चों के लिए महंगे तोहफे जैसे- घड़‍ियां, सूट और सोने के जेवर देते हैं। वह कहते हैं ”उन्‍हें खुश रखना पड़ता है.. लेकिन क्‍या आप चाहते हैं कि मैं उन्‍हें अपने वेतन से तोहफे दूं? नहीं, कभी नहीं।”

इंजीनियर ने कहा कि वह जो रिश्‍वत लेता है, वह पहले से प्रोजेक्‍ट्स के इस्‍टीमेट्स में कमीशन के तौर पर लिखी होती है। उसने कहा, ”आपको इसे (रिश्‍वत) मांगना नहीं पड़ता।” उसने बताया कि प्रोजेक्‍ट के हर चरण पर गैरकानूनी रुपया बदलता जाता है। ‘कमीशन’ से सबको फायदा पहुंचता है, ऊपर बैठे मंत्री से लेकर फाइल ले जाने वाले संतरी तक। उसने कहा, ”मैं जो रिश्‍वत लेता हूं वह दूसरों की तुलता में कुछ नहीं है।”

4 सिंतबर को अशोक कुमार नाम के एक और नौकरशाह ने बस्‍ती में रिपोर्टर्स को बताया था कि उसने जिलाधिकारी बनने की उम्‍मीद छोड़ दी है। क्‍योंकि वह 70 लाख रुपए की घूस नहीं दे प रहा। कुमार को उसके बयान के बाद निलंबित कर दिया गया था, हालांकि उन्‍होंने यह नहीं बताया कि उनसे घूस की मांग कौन कर रहा था।

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First Published on November 23, 2016 5:01 pm

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