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भाजपा जातिवाद-परिवारवाद की राजनीति नहीं, बल्कि ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस’ चाहती है: अमित शाह

अमित शाह ने कहा, ‘नोटबंदी से विपक्षियों के चेहरे मुरझा गए हैं। कांग्रेस, सपा, बसपा, केजरीवाल, ममता ... फलाने ढिकाने ... सब एक हो गए हैं।'
Author लखनऊ | November 19, 2016 17:50 pm
त्रिपुरा फतेह की तैयारी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। (PTI Photo/FILE)

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले सपा और बसपा पर जोरदार हमला बोलते हुए शनिवार (19 नवंबर) को कहा कि भाजपा जातिवाद और परिवारवाद की राजनीति नहीं चाहती बल्कि ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस’ चाहती है। अमित शाह ने यहां बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय में ‘यूपी के मन की बात’ कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद करते हुए कहा, ‘जातिवाद हावी है। ज्यादातर पार्टियां परिवार की पार्टियां बनकर रह गयी हैं। वहां बेटा होते ही तय हो जाता है कि पार्टी का अगला नेता कौन होगा। कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन होगा, ये आप सब बता सकते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आप ये कभी नहीं बता सकते कि भाजपा का अगला अध्यक्ष कौन होगा? जातिवाद और परिवारवाद ने राजनीति में जवाबदेही कम की है और काम का महत्व कम कर दिया है। भाजपा चाहती है कि ये देश ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस’ की ओर बढे। जो काम करेगा, जनता उसे स्वीकार करेगी और जो नहीं करेगा, जनता उसे निकाल देगी।’

शाह ने कहा कि जनतंत्र के जिम्मेदार नागरिक के नाते सोचना होगा कि देश कैसा हो। युवाओं को इस बारे में सोचना होगा। लोकतंत्र को जातिवाद से ऊपर उठाना होगा। काले धन पर अमित शाह ने सख्त लहजे में चेताया, ‘मोदी सरकार काले धन के मामले में किसी को नहीं बख्शेगी। मैं मानता हूं कि करोड़ों रुपये के काले धन पर सिर्फ भारत के युवाओं का अधिकार है, अन्य किसी का नहीं।’ उन्होंने कहा कि जब केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो विरोधी दल हाय तौबा मचा रहे थे कि काले धन का क्या करोगे? आपने (मोदी) चुनावी वादा किया था, काला धन खत्म करोगे लेकिन अब तक क्या किया? ‘भाजपा सरकार ने पहला कानून क्या बनाया? काले धन के खिलाफ विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया। पांच सौ और हजार रुपये के नोट बंद किये। अब हाय तौबा मची है कि फैसले को वापस ले लो, क्यूं भई …।’

शाह ने कहा, ‘नोटबंदी से विपक्षियों के चेहरे मुरझा गए हैं। कांग्रेस, सपा, बसपा, केजरीवाल, ममता … फलाने ढिकाने … सब एक हो गए हैं और सब इकट्ठा बोल रहे हैं।’ उन्होंने सपा और बसपा की सरकारों के शासनकाल में कानून व्यवस्था की खराब स्थिति, भ्रष्टाचार और अराजकता की चर्चा करते हुए मौजूदा सपा सरकार पर तंज कसा, ‘गोमती किनारे सौन्दर्यीकरण करने से उत्तर प्रदेश का विकास नहीं हो सकता। परिवर्तन भाजपा ही कर सकती है।’ साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की ओर से युवाओं का आहवान किया, ‘इतिहास युवा बनाता है, परिवर्तन युवा करता है। देश को युवा आगे बढाता है इसलिए युवा उत्तर प्रदेश के चुनाव महोत्सव में जुटें और परिवर्तन कर हम सबका सहयोग करें।’

अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अगले पांच साल किसकी सत्ता होगी, युवाओं को तय करना होगा। ‘जब तक उत्तर प्रदेश का विकास नहीं होगा, देश का विकास नहीं हो सकता। हम चाहते हैं कि सबकी आकांक्षाओं का स्थान भाजपा के चुनावी एजेंडा में हो। हम आपकी (जनता) आकांक्षाओं को मानना और पहचानना चाहते हैं। आपसे संवाद करना चाहते हैं। अगला चुनाव जन-भागीदारी पर होगा। हमने इसकी शुरुआत की है। अगर ये प्रयोग सफल रहा तो सभी पार्टियों को संवाद करना होगा, लोगों की अपेक्षा जाननी होगी और उन पर खरा उतरना होगा।’ उन्होंने कहा कि उतर प्रदेश का जितना विकास होना चाहिए था, नहीं हुआ। भाजपा शासित मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, गोवा और झारखंड जैसे राज्यों में विकास हुआ है। ‘गांव पीछे छूटेगा तो देश का विकास नहीं कर पाएंगे, गरीब पीछे छूटेगा तो विकास नहीं होगा। ये स्थिति भाजपा ही बदल सकती है। और कोई नहीं। हम विकास की राजनीति करने वाली पार्टी हैं। मोदी सरकार सुधार नहीं बल्कि आमूलचूल परिवर्तन चाहती है। परिवर्तन का काम भाजपा करेगी।’ शाह ने मोदी सरकार की ओर से गांव, गरीब, पिछडों और आम जनता के लिए शुरू की गयी योजनाओं और कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।

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