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रामदेव के पतंजलि को राहत नहीं, यूपी सरकार के हलफनामे के बाद हाई कोर्ट ने मांगा याचिकाकर्ताओं से जवाब

यूपी के नोएडा में 4500 एकड़ जमीन रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद को फूड पार्क बनाने के लिए दी गयी है।
बाबा रामदेव ने पतंजलि आयुर्वेद की स्थापना की है लेकिन उनकी कंपनी में कोई हिस्सेदारी नहीं है। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक पीठ ने सोमवार (चार सिंतबर) को बाबा रामदेव से जुड़े पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को आवंटित जमीन पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवायी 11 सितंबर को होगी। 30 अगस्त को अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और यमुना एक्स्प्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी से संबंधित जमीन पर लगे पेड़ काटने के बारे में हलफनामा देने के लिए कहा था। कोर्ट ने विवादित जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण या यथास्थिति में बदलाव पर रोक लगा रखी है। सोमवार को हाई कोर्ट ने यूपी सरकार और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के हलफनामों को परस्पर विरोधी पाया। अदालत के अनुसार एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के अधिकारियों ने कहा है कि उनका कोई अधिकारी पेड़ कटवाने नहीं गया था जबकि राज्य सरकार ने कहा है कि प्राधिकरण के अधिकारी पेड़ कटवाने गये थे।

यूपी सरकार की तरफ से गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के जिलाधिकारी ने अदालत में हलफनामा दायर करके कहा कि उन्होंने मौके का दौरा किया और देखा कि कुछ हरे पौधे जो हाल ही में लगाए गए थे उन्हें उखाड़ा गया है। अदालत ने जिलाधिकारी की यह दलील उन तस्वीरों का हवाला देकर खारिज कर दी जिसके में काफी बड़े पेड़ दिखायी दे रहे थे। अदालत में दायर की गये पूरक हलफनामे में जेसीबी मशीन की मदद से पेड़ उखाड़े जाते दिख रहे हैं। 29 अगस्त को यमुना एक्स्प्रेसवे प्राधिकरण ने अदालत से कहा था कि अगर विवादित जमीन पर पेड़ उखाड़े भी गए हैं तो इसके ये प्राधिकरम के निर्देश पर नहीं किया गया है।

असफ खान नामक याचिकाकर्ता ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को फूड पार्क बनाने के लिए नोएडा में दी गयी 4500 एकड़ जमीन के आवंटन पर सवाल उठाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दी थी। पतंजलि को 30 साल की लीज पर ये जमीन दी गयी है। याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा है कि इस जमीन पर लगे गुए 600 पेड़ काटने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। अदालत ने इस जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगा रखी है।

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