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जो बना यूपी सीएम का पड़ोसी, उसका तबाह हो गया राजनीतिक करियर, इस बार किसी ने नहीं लिया छह नंबर बंगला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 39 मंत्रियों को बुधवार को सरकारी बंगले आवंटित किए गए हैं।
एसपी सिंह बघेल को मिला 6 कालिदास मार्ग वाला बंगला।

उत्तर प्रदेश के मंत्रियों को बुधवार को सरकारी बंगले आवंटित किए गए। कालिदास मार्ग पर सात नंबर बंगला डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को दिया गया है, इस बंगले में पहले समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव रहते थे। शिवपाल यादव अखिलेश सरकार में मंत्री थे। वहीं यूपी के दूसरे डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को विक्रमादित्य मार्ग पर तीन नंबर बंगला दिया गया है, इस बंगले में पहले आजम खान रहते थे। इसके साथ ही सीएम आवास 5, कालिदास मार्ग में सीएम योगी आदित्यनाथ भी बुधवार को शिफ्ट हो गए। लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ का पड़ोसी बंगला किसी मंत्री को नहीं दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्री छह नंबर बंगले को अपशगुन मानते हैं। राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि इस बंगले में रहने वाला को या तो अपना पद गंवाना पड़ा है या फिर उनका राजनीतिक करियर ही तबाह हो गया। बुधवार को 39 मंत्रियों को बंगले आवंटित किए गए हैं, लेकिन यह बंगला किसी भी मंत्री को नहीं आवंटित नहीं किया गया। सियासी गलियारों में चर्चा है कि इसी बंगले में रहने की वजह से अमर सिंह का सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से झगड़ा हुआ था। यूपी में मुलायम की सरकार के दौरान अमर सिंह इसी बंगले में रहते थे, जिसके बाद दोनों का आपस में झगड़ा हो गया था और अमर सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया गया था।

ऐसी ही कहानी बसपा प्रमुख में मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा के बारे में सुनाई जाती है। मायावती की सरकार के वक्त कुशवाहा भी इसी बंगले में रहते थे, इन्हें माया सरकार का कद्दावर नेता माना जाता था। लेकिन बाद में इनका नाम सीएमओ मर्डर केस और अन्य घोटालों में आ गया। इसके अलावा एक और कहानी अखिलेश के करीबी माने जाने वाले जावेद अब्द की है। जावेद आब्दी अखिलेश का करीबी माना जाता था, उन्हें अखिलेश के बगल में छह नंबर बंगला मिला था। अब्दी को राज्यमंत्री का दर्ज दिया गया था और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था। लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में अखिलेश यादव ने उन्हें पदों से बर्खास्त कर दिया था।

साल 2012 में जब यूपी में सत्ता बदली तो उस वक्त श्रम मंत्री वकार अहमद शाह को छह नंबर बंगला दिया गया था। वे बंगले में कुछ वक्त रहे और एक दिन अचानक उनकी तबियत खराब हो गई। इसके बाद से वे बिस्तर से उठे नहीं है। बाद में उनके परिवार ने वह बंगला खाली कर दिया था। कालिदास मार्ग पर स्थित छह नंबर बंगले की ऐसी ही कई और कहानियां हैं।

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