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माटी के मोल आलू बिकने से किसान संकट में

आलू का मंडियों में थोक भाव 400 से 600 रुपए कंविटल है। यह विगत पांच वर्षों मे सबसे कम रहा है।
Author हापुड़ | August 2, 2017 05:07 am
पंजाब में आलू की कीमतों में गिरावट के चलते किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने 50 दिन के लिए आलू की भंडारण करने का निर्देश जारी किया है।

दीपक अग्रवाल

उत्तर प्रदेश मे सब्जियों के राजा आलूू की मिट्टी पलीद हो रही है। आलू माटी के मोल बिक रहा है। आलू की अच्छी फसल किसानों को मुसीबत बन गई है। इससे आलू उत्पादक किसान बर्बाद हो रहा है। आलू का मंडियों में थोक भाव 400 से 600 रुपए क्ंिवटल है। यह विगत पांच वर्षों मे सबसे कम रहा है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री आदित्यानाथ योगी की भाजपा सरकार ने आलू का समर्थन मूल्य घोषित कर अपने फर्ज की कागजी इतिश्री कर ली। पंरन्तु अधिकारियों को आलू खरीद के कड़े दिशा निर्देश जारी नहीं किए। आलू की मंदी का लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। थोक बाजार मे चार से पांच रुपए किलो मे बिकने वाला आलू बिचौलियों के माध्यम से लोगों को खुदरा बाजार में 12 से 15 रुपए किलो ही मिल रहा है। जनपद हापुड़ में बुआई के समय 2300-2400 रुपए क्ंिवटल बीज खरीदकर आलू बोने वाले किसान को आलू के दाम नई मंडी गढ़रोड पर 400-500 रुपए क्ंिवटल प्राप्त हो रहे हैं।

किसान नीवन सैनी, वीरेन्द्र चौधरी आदि का कहना है कि इन दामों पर आलू बेचकर कोल्डस्टोरेज का किराया मुश्किल से अदा हो पाएगा। जनपद में 1.25 लाख मीट्रिक टन आलू उत्पादन हुआ है। आलू के बड़े थोक व्यापारी भाजपा विधायक विजयपाल आढ़ती का मानना है कि बरसात के मौसम मे हरी सब्जियों के अभाव के वाबजूद आलू के थोक दाम न बढ़ना चिंताजनक है। विधायक का कहना है कि सरकार आलू किसानों के लाभ के लिए दक्षिणी राज्यों में सप्लाई में जुटी है। आलू के दामों मे बढ़ोतरी न होने पर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट नजर आ रही हैं। क्योंकि इससे शीतगृह व किसान को नुकसान की आशंका है।

 

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