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इंदौर-पटना एक्सप्रेस: मरने वालों की संख्या हुई 146, कमिश्नर रेलवे ने शुरू की जांच

कानपुर ट्रेन हादसे में मरने वालों की संख्या 146 तक पहुंच गई है।
Author पुखरायां (कानपुर देहात) | November 22, 2016 03:19 am
सीएम ने कहा, ”मैं लगातार रेल मंत्री सुरेश प्रभु और पीएम नरेंद्र मोदी के संपर्क में हूं और उन्हें पल-पल की जानकारी दी जा रही है।

कानपुर ट्रेन हादसे में मरने वालों की संख्या 146 तक पहुंच गई है। सोमवार शाम शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती जिला उरई के बुरी तरह से घायल एक व्यक्ति ने दम तोड़ दिया। शुरुआती जांच में हादसे का कारण पटरी का टूटना बताया जा रहा है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। लोकसभा में सोमवार को स्वत: संज्ञान से बयान देते हुए उन्होंने कहा कि सभी संभावित कोणों पर गौर करने के लिए एक उचित एजंसी से आधुनिक तकनीक व फोरेंसिक विश्लेषण की मदद से एक पृथक विस्तृत जांच होगी। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त संभव कार्रवाई की जाएगी। प्रभु ने कहा कि हादसे का सही कारण पता करने के लिए रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने वैधानिक जांच का भी बाकी आदेश दिया है।

उत्तर-मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे में मरने वालों की संख्या 146 हो गई है। उन्होंने कहा कि ट्रैक पर से पूरी तरह से मलबा हटा दिया गया है। क्षतिग्रस्त डिब्बे भी पटरी से हटा दिए गए हैं। अब और शवों के मिलने की संभावना लगभग न के बराबर है। कानपुर जोन के पुलिस महानिरीक्षक जकी अहमद ने बताया कि पूरे घटनास्थल का निरीक्षण स्निफर डाग से करवाया गया है। इसलिए अब घटनास्थल पर किसी भी शव के होने की संभावना न के बराबर है। कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामायण प्रसाद ने बताया कि शाम चार बजे शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती उरई जिले के राम प्रवेश सिंह (55) की मौत हो गई। वह ट्रेन दुर्घटना में बुरी तरह से घायल हुए थे। उनको वेंटीलेटर पर रखा गया था लेकिन शाम को उन्होंने दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में ट्रेन हादसे में घायल के मरने की यह पहली घटना है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में मरे सात शवों की पहचान नहीं हो पाई है। बाकी सभी शवों की पहचान हो गई है। 133 मृतकों के परिजनों के आ जाने के बाद उनके शवों को सरकारी वाहन से उनके घर भेज दिया गया है। सात शवों को छोड़कर सभी शवों का पोस्टमार्टम हो गया है।

इसी बीच, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत आने वाले ईस्टर्न सर्कल के कमिश्नर आफ रेलवे (सेफ्टी) पीके आचार्य ने ट्रेन हादसे की जांच का काम शुरू कर दिया है। उन्होंने दुर्घटनास्थल पर पहुंच कर टूटे हुए रेलवे ट्रैक को देखा और ट्रेन की क्षतिग्रस्त बोगियों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने रेलवे ट्रैक और बोगियों की वीडियो फोटोग्राफी भी करवाई। उन्होंने वहां काम कर रहे इंजीनियरों और टेक्निकल स्टाफ से भी पूछताछ की। एनसीआर रेलवे के डिप्टी जनरल मैनेजर अमित मिश्रा ने यह जानकारी हुए बताया कि आचार्य 22 और 23 नवंबर को सुबह साढ़े नौ बजे से कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर सुबह से शाम तक बैठेंगे। इस दुर्घटना से संबंधित कोई भी व्यक्ति कोई भी जानकारी उन्हें देना चाहता है तो वह दे सकता है। इसमें ट्रेन में बैठे यात्री या ऐसे आम लोग जिन्हें दुर्घटना के बारे में कुछ भी जानकारी हो, अपना बयान दे सकते हैं।

मिश्रा और पीआरओ अमित मालवीय ने बताया कि बचाव अभियान, बोगियों और मलबे को हटाने का काम तड़के पूरा हो गया था। अब रेलवे के इंजीनियर और टेक्नीशियन की टीम रेलवे ट्रैक को ठीक कर रही है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की टीम ओवरहेड बिजली के तार ठीक कर रही है। उम्मीद है कि सोमवार आधी रात के बाद रेलवे ट्रैक ठीक हो जाएगा और मंगलवार सुबह से कानपुर-झांसी मार्ग पर ट्रेनों का आवागमन शुरू हो जाएगा।उधर, कई हताश लोग सोमवार को अपने लापता प्रियजनों के बारे में किसी सुराग के लिए मौके पर एकत्रित सामान और अन्य वस्तुओं को खंगालते रहे। रामानंद तिवारी ने कहा कि मैं अपने भाई को खोज रहा हूं। पता नहीं उसे क्या हुआ? हो सकता है कि उसने अपनी सीट बदल ली हो। हमने हर जगह उसे खोज लिया। अपने तीन परिजनों के शव देखने के बाद निर्मल वर्मा बेहद दुखी थे। वर्मा को अपने परिवार के साथ शादी समारोह में शामिल होना था लेकिन उन्हें काम से छुट्टी नहीं मिली और वे बाद में शादी में पहुंचने वाले थे। उन्होंने कहा कि मैंने जिसे भी खोजा, उसकी मौत हो गई- मेरा भाई, मेरी बड़ी भाभी, बेटी। मुझे अब तक अपनी मां नहीं मिली। मुझे डर है कि मैं उन्हें भी इसी स्थिति में पाऊंगा।
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