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योगी राज में बेलगाम अपराधी: केन्द्रीय मंत्री की बहन की दिनदहाड़े अपहरण की कोशिश

फरहत के मुताबिक एसएसपी दफ्तर से वो एक किलोमीटर ही आगे बढ़ी होगीं कि कार बदमाश उनके पास रुके और उन्हें कार में खींचने की कोशिश की।
प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के बरेली में कुछ बदमाशों ने दिनदहाड़े केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बहन की किडनैपिंग की कोशिश की है। इस घटना के बाद यूपी पुलिस के महकमे में सनसनी मची है। नरेन्द्र मोदी सरकार में कैबिनेट रैंक के मंत्री नकवी की छोटी बहन फरहत नकवी ने बताया कि कुछ बदमाशों ने उन्हें बरेली के चौकी चौराहा के पास अपहरण करने की कोशिश की। फरहत नकवी ने कहा कि वो एसएसपी के दफ्तर से वापस लौट रही थीं, फरहत के मुताबिक एसएसपी दफ्तर से वो एक किलोमीटर ही आगे बढ़ी होगीं कि कार बदमाश उनके पास रुके और उन्हें कार में खींचने की कोशिश की। फरहत ने बताया, ‘सड़क के किनारे खड़ी थी, तभी कुछ लोगों ने मेरे नजदीक अपनी कार रोकी और मुझे कार के अंदर खींचने की कोशिश की।’ फरहत ने कहा कि, ‘वहां पर कुछ महिलाएं खड़ी थी उन्होंने मेरी मदद की और मुझे किसी तरह से बचाया।’

चौकी चौराहा बरेली के व्यस्तम इलाकों में से एक है। यहां पर एक महिला पुलिस थाना भी है, यहीं से कुछ दूरी पर डिविजनल कमिश्नर का दफ्तर भी है। बावजूद इसके बदमाशों ने इस घटना को अंजाम देने की हिमाकत की। फरहत नकवी ने कहा कि जो शख्स कार चला रहा था उसने उन्हें धमकी दी और कहा, ‘हम लोग तुम्हें बाद में देख लेंगे।’ फरहत नकवी ने कहा कि वो लोगों का चेहरा पहचान नही सकी, नहीं आपा धापी में कार का नंबर देख सकी। फरहत नकवी ने कहा कि उसे ठीक तरह से ये भी नहीं मालूम है कि कार के अंदर कितने लोग बैठे थे। पूरे मामले में फरहत नकवी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

फरहत नकवी बरेली में अपने माता-पिता के साथ किला इलाका में रहती हैं और एक महिला अधिकारों के लिए एक एनजीओ चलाती हैं। ये संस्था तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को कानूनी मदद देती है। फरहत नकवी अपने काम के सिलसिले में पुलिस स्टेशन गईं थी। बरेली पुलिस ने इस सिलसिले में जांच शुरू कर दी है। एसएसपी जोगिन्दर कुमार ने कहा कि, ‘हमारी टीम सबूतों को इकट्ठा कर रही है ताकि कार का पता लगाया जा सके और घटना में शामिल लोगों की तलाश की जा सके।’

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  1. B
    bitterhoney
    Sep 16, 2017 at 11:17 pm
    न कार का नंबर देखा न ही यह देखा कि कार में कितने लोग बैठे थे न किसी को पहचान सकीं. पूरी घटना संदिग्ध प्रतीत होती है. हो सकता है कि इसकी इस्क्रिप्ट मुख़्तार अब्बास नक़वी जी ही ने अपने किसी विरोधी से बदला लेने के लिए लिखी हो.
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    सबरंग